गठबंधन के लिए भी रजिस्ट्रेशन…अमेरिका में कितनी पार्टियां, कैसा है पॉलिटिकल सिस्टम? मस्क ने किया ऐलान

Elon Musk Launched America Party: अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने नई राजनीतिक पार्टी बना ली. इसका नाम है द अमेरिका पार्टी. मस्क ने ट्रंप को पहले ही चेताया था कि अगर वो वन बिग ब्यूटीफुल बिल पास करते हैं वो मैं नई पार्टी बना लूंगा. आइए जान लेते हैं कि अमेरिका में कितनी पार्टियां हैं, वहां कैसे पार्टी बनाई जाती है और भारत से कितना अलग है वहां का पॉलिटिकल सिस्टम.

Jul 7, 2025 - 17:28
 0
गठबंधन के लिए भी रजिस्ट्रेशन…अमेरिका में कितनी पार्टियां, कैसा है पॉलिटिकल सिस्टम? मस्क ने किया ऐलान
गठबंधन के लिए भी रजिस्ट्रेशन…अमेरिका में कितनी पार्टियां, कैसा है पॉलिटिकल सिस्टम? मस्क ने किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रहे एलन मस्क अब उनके विरोध में खड़े हो गए हैं. दुनिया के सबसे अमीर इंसान मस्क ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को सबसे बड़ा राजनीतिक दान दिया था. सरकार में आने के बाद ट्रंप ने भी उन्हें अहम पद से नवाजा था पर वन बिग ब्यूटीफुल बिल को लेकर दोनों में ठन गई.

मस्क का दावा था कि इससे अमेरिका के कर्ज में बढ़ोतरी होगी. साथ ही ट्रंप को चेताया था कि इस बिल को पास किया तो नई पार्टी बना लेंगे. बिल पास होते ही मस्क ने नई राजनीतिक पार्टी बना ली. इसका नाम है द अमेरिका पार्टी. आइए जान लेते हैं कि अमेरिका में कितनी पार्टियां हैं, वहां कैसे पार्टी बनाई जाती है और भारत से क्या समानता है?

क्या है अमेरिका में पॉलिटिकल सिस्टम?

अमेरिका में भी भारत की तरह कई राजनीतिक पार्टियां हैं. इनमें से ज्यादातर राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेती रही हैं. इन पार्टियों का इतिहास काफी पुराना है. समय के साथ नई-नई पार्टियां नई चुनौतियों और अलग-अलग विचारधारा के साथ उभरती रही हैं. वर्तमान में अमेरिका में बहु पार्टी सिस्टम है. इनमें से डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां सबसे अधिक प्रभावी हैं. इनके अलावा रीफॉर्म, लिबरटेरियन, सोशलिस्ट, नेचुरल लॉ, कॉन्स्टीट्यूशन और ग्रीन पार्टियां हैं. ये भी राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेती रही हैं.

एलन मस्क का ट्वीट

कितने राजनीतिक दल?

अमेरिका में चुनावी सिस्टम को दो पार्टी सिस्टम के रूप में जाना जाता है. इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वहां दो ही पार्टियां हैं. इसका मतलब यह है कि यही दोनों पार्टियां यानी रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी सरकार के तीनों स्तरों पर राजनीतिक रूप से प्रभावी हैं. अन्य पार्टियों द ग्रीन पार्टी, लिबरटेरियन, कॉन्स्टीट्यूशन पार्टी और नेचुरल लॉ पार्टी को थर्ड पार्टियां कहा जाता है.

कैसा है वहां का इलेक्शन कमीशन?

भारत के निर्वाचन आयोग की तरह ही अमेरिका में भी फेडरल इलेक्शन कमीशन है. भारत में जिस तरह से नई पार्टियों का पंजीकरण निर्वाचन आयोग में कराना पड़ता है, उसी तरह से अमेरिका में नई पार्टियों का रजिस्ट्रेशन फेडरल इलेक्शन कमीशन में कराना पड़ता है. इन पार्टियों को फेडरल इलेक्शन कमीशन में तब पंजीकरण कराना होता है, जब वे संघीय चुनाव को लेकर धन जुटाएं या फिर धन खर्च करें.

जिस तरह से भारत में किसी पार्टी की पहुंच के हिसाब से उसे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दिया जाता है, उसी तरह से अमेरिका में फेडरल इलेक्शन कमीशन यह देखता है कि कोई पार्टी राष्ट्रीय या प्रांतीय स्तर पर किस तरह की गतिविधियां कर राष्ट्रीय या प्रांतीय स्तर की पार्टी के मानक पूरा करती हैं या नहीं.

Elon Musk Us Party

अमेरिका की सियासत में एलन मस्क की नई पार्टी की एंट्री

गठबंधन के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी

अमेरिका में अगर कोई पार्टी संगठन केवल राज्य या स्थानीय स्तर पर एक्टिव होता है तो उसे फेडरल इलेक्शन कमीशन में पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ती है. हालांकि, अगर किसी पहले से मौजूद पार्टी जैसे डेमोक्रेटिक, रिपब्लिकन या लिबरटेरियन आदि की स्थानीय शाखा बनाई जाती है और स्थानीय शाखा फेडरल इलेक्शन को लेकर धन जुटाती है या खर्च करती है तो अपने संगठन का पंजीकरण फेडरल इलेक्शन कमीशन में कराना पड़ता है.

हालांकि, अगर स्थानीय पार्टी संगठन को फेडरल इलेक्शन कमीशन में पंजीकृत कराना पड़ता है तो वह एक स्थानीय पार्टी कमेटी बन जाती है. इस संदर्भ में किसी स्थानीय पार्टी कमेटी को किसी दूसरी फेडरल पार्टी कमेटी के साथ राज्य में मान्यता प्राप्त होना चाहिए. इन मान्यता प्राप्त समितियों के खर्च करने और धन जुटाने की सीमा तय होती है.

Us Elections

अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा है.

तीसरी पार्टियों को नहीं मिल पाती सफलता

अमेरिका में करीब डेढ़ सौ सालों से डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा दिखता है. वहां पर राष्ट्रपति चुनाव हो या फिर राज्यों की विधानसभाएं, सभी में इन्हीं दो पार्टियों का वर्चस्व है. अमेरिका में तीसरी पार्टियां कभी सफल नहीं हो पाई हैं. साल 1912 में राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने बुल मूस नाम की पार्टी बनाई थी. तब उन्होंने 88 इलेक्टोरियल वोट प्राप्त किए थे. हालांकि, यह पार्टी अगले अमेरिकी चुनाव तक भी नहीं टिकी थी.

असल में फंडिंग हो, मीडिया या फिर संगठन, कहीं भी इन पार्टियों को स्थान नहीं मिलता है. अमेरिका के मतदाताओं का मानना है कि ये पार्टियां केवल वोट काटने के लिए चुनाव में खड़ी होती हैं. इसलिए इन पार्टियों को लोग वोट नहीं देते हैं. तीसरी पार्टियों के सफल न होने का एक और अहम कारण है अमेरिका का चुनावी सिस्टम, जो पूरी तरह से टू-पार्टी सिस्टम का ही समर्थन करता है.

दरअसल, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की तरह कम से कम 50 फीसदी वोट पाने की बाध्यता नहीं होती. इसके स्थान पर अमेरिका में जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट प्रतिशत मिलता है, उसे ही विजेता माना जाता है. चूंकि अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दो ही प्रमुख पार्टियां हैं तो ज्यादातर वोट इन्हीं दो पार्टियों के उम्मीदवारों के पक्ष में जाते हैं.

यह भी पढ़़ें: बारिश के बाद इतनी उमस क्यों होती है, पसीना शरीर को कैसे निचोड़ता है?

सह सम्पादक भारतीय न्यूज़ भारतीय न्यूज़, ताजा खबरें, इंडिया न्यूज़, हिंदी समाचार, आज की खबर, राजनीति, खेल, मनोरंजन, देश दुनिया की खबरें news letter हम भारतीय न्यूज़ के साथ स्टोरी लिखते हैं ताकि हर नई और सटीक जानकारी समय पर लोगों तक पहुँचे। हमारा उद्देश्य है कि पाठकों को सरल भाषा में ताज़ा, Associate Editor, Bharatiya News , विश्वसनीय और महत्वपूर्ण समाचार मिलें, जिससे वे जागरूक रहें और समाज में हो रहे बदलावों को समझ सकें। Bharatiya News पर पढ़ें भारत और दुनिया से जुड़ी ताज़ा खबरें, राजनीति, खेल, मनोरंजन, तकनीक और अन्य विषयों पर विश्वसनीय समाचार