इतना रो लेना इतना रो लेना
इतना रो लेना इतना रो लेना
इतना रो लेना इतना रो लेना
कि तुम्हारे फूटने से
बनाई जा सके एक
नदी एक पहाड़ के
फूट-फूटकर रोने से
ही बनी होंगी नदियाँ !
आँसुओं के सूख
जाने पर बने होंगे
रेगिस्तान इतना
मत सूखना कि
फूटने पर एक भी
धार न निकले