छह गुना से अधिक बढ़ गया है राज्यों का पेंशन पर खर्च

छह गुना से अधिक बढ़ गया है राज्यों का पेंशन पर खर्च

छह गुना से अधिक बढ़ गया है राज्यों का पेंशन पर खर्च

छह गुना से अधिक बढ़ गया है राज्यों का पेंशन पर खर्च 

States expenditure on pension has increased more than six times 

जेएनएन, नई दिल्ली: पिछले 40 वर्षों में राज्यों का पेंशन पर खर्च छह गुना से अधिक बढ़ गया है। 1980-81 में राज्यों ने अपने राजस्व प्राप्तियों का 2.1% पेंशन पर खर्च किया था, वहीं 2021-22 में यह खर्च बढ़ कर राजस्व प्राप्तियों का 13% तक पहुंच गया है।


राज्यों का पेंशन पर खर्च राजस्व प्राप्तियों का प्रतिशत  राजस्व की तुलना में तेजी से बढ़ा पेंशन पर खर्च 1.6% हो गया है जीडीपी का राज्यों का पेंशन खर्चपीआरएस लेजिस्टलेटिव रिसर्च के एक अध्ययन के अनुसार 1980 से 2002 के बीच राज्यों का पेंशन का खर्च राजस्व की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ा। बढ़ते पेंशन खर्च को देखते हुए पेंशन सुधारों को लागू किया गया और ज्यादातर राज्यों ने 2004 के बाद अपने कर्मचारियों के लिए डिफाइंड कंट्रीब्यूशन पेंशन प्लान नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) लागू किया। एनपीएस में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं और पेंशन की रकम इकट्ठा हुए कार्पस पर निर्भर करती है।

हालांकि पिछले दो वर्षों के दौरान कुछ राज्य सरकारों जैसे हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और पंजाब ने ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू करने का फैसला किया है। ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को एक तय रकम पेंशन के तौर पर मिलती थी और स्कीम में कर्मचारियों को योगदान भी नहीं करना होता था।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्यों में ओपीएस फिर से लागू करने की मांग ने जोर पकड़ा और राज्यों के चुनाव में यह एक बड़ा नाराजगी में ओपीएस और एनपीएस दोनों के फीचर्स को शामिल किया गया है। मुद्दा बन कर उभरा। एनपीएस के खिलाफ बढ़ती को देखते हुए केंद्र सरकार ने अगस्त, 2024 में कर्मचारियों को पेंशन के तौर पर एक तय रकम मुहैया कराने के लिए यूनीफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) पेश की है।

इस स्कीम  प्रमुख राज्यों का पेंशन और रिटायरमेंट लाभों पर खर्च (राशि करोड़ रुपये में)