विकसित भारत का मजबूत पायदान बनेगा वर्ष 2025
Strong Strengthening of Developed India Year 2025
विकसित भारत का मजबूत पायदान बनेगा वर्ष 2025
Strong Strengthening of Developed India Year 2025
भारत अमेरिका और चीन जैसी वैश्विक ताकतों की कतार में खड़ा होकर बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को मजबूती देगा। उम्मीद है वर्ष 2025 अर्थव्यवस्था, रक्षा, वैश्विक कूटनीति के साथ विकसित भारत के लिए मजबूत पायदान बनेगा। महिला सशक्तीकरण और जनकल्याण की नीतियों के तहत केंद्र सरकार ने पिछले 8 वर्षों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिये 26.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किए हैं। इससे प्रति व्यक्ति आय में इजाफा होगा।
पहली बार इसरो व नासा मिलकर निसार मिशन लांच करने वाले हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और सीमा सुरक्षा की निगरानी करेगा। धरती पर पारिस्थितिकी तंत्र, बर्फ पिघलने, और भूकंप जैसी गतिविधियों भी की सटीक जानकारी देगा।
2025 वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर भारत के लिए ज्यादा अनूकूल वर्ष साबित हो सकता है। उम्मीद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल भी भारत के लिए बेहतर साबित होगा। इसी वर्ष भारत क्वाड की मेजबानी भी करेगा।
पिछले कई वर्षों से भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। दूसरी तिमाही के आंकड़े कुछ कमजोर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि तीसरी तिमाही में सार्वजनिक खर्च का असर दिखेगा और अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़ेगी। रिजर्व बैंक ने 2025-26 में आर्थिक वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान जताया है। नए वर्ष में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती भी कर सकता है। इससे कर्ज सस्ता होगा और कारोबारी गतिविधियां तेजी होगी। इस वर्ष भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के और करीब पहुंचेगा।
युवाओं को मिलेंगे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में नौकरियों के सृजन और युवाओं को इंडस्ट्री के लिए जरूरी स्किल से लैस करने के लिए योजनाएं शुरू की थीं। इन योजनाओं का लक्ष्य अलगे दो वर्ष में 2 करोड़ नौकरियों का सृजन करना है। उम्मीद है कि 2025 में इनके नतीजे दिखने शुरू हो जाएंगे और बड़ी संख्या में नौकरियां मिलेंगी।
2025 में वायुसेना को स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के उन्नत संस्करण (मार्क 1ए) की डिलिवरी भी शुरू हो सकती है। रक्षा मंत्रालय ने 2021 में 83 तेजस का आर्डर हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को दिया था। एचएएल ने 31 मार्च को पहला विमान सौंपने की समय सीमा तय की है। वायुसेना इन विमानों के साथ तेजी से अपने बेड़े को मजबूत बना पाएगी। नए वर्ष में भारत स्वार्म ड्रोन और रक्षा क्षेत्र में तकनीक के मोर्चे पर अपनी क्षमताओं को और मजबूत बना सकता है।