लोगों की जरूरत के हिसाब से बनाई योजनाएं
यह कहानी राष्ट्रीय फलक पर अपनी कार्यप्रणाली की चमक बिखेरने वाली बिहार में नालंदा जिले के पार्थु पंचायत की महिला मुखिया कुमारी तृप्ति की है। 11 दिसंबर को इन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा युक्त पंचायत सम्मान मिला। इस उपलब्धि को प्राप्त करने में उनकी योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आदत ने सहयोग किया।
बातचीत में उन्होंने बताया कि वह पंचायत के लोगों की क्षमता एवं आवश्यकताओं को समझती हैं, इसी अनुरूप योजनाएं बनाकर उनका क्रियान्वयन कराती हैं। इसके लिए प्रतिमाह आमसभा करती हैं। सरकार की हर विकास व कल्याणकारी योजनाओं पर नजर रखती हैं और उनका लाभ पंचायत को दिलाने के लिए तत्पर रहती हैं।
2022 में उनका ध्यान मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना की ओर गया तो एक एनजीओ की संचालिका रौनिशा चंद्रा से पंचायत में सिलाई कटाई केंद्र स्थापित करने की बात की। वह तैयार हुईं तो योजना के तहत सहयोग कर 10 लाख रुपये ऋण दिला दिया। एनजीओ ने रामकिशोरी गारमेंट नाम से केंद्र स्थापित कर दिया। आधुनिक मशीनें लगा दीं। शुरू में गांव की महिलाएं सिलाई कटाई का प्रशिक्षण लेने से कतराईं, फिर उन्होंने आमसभा बुलाकर समझाया तो आधा दर्जन महिलाएं तैयार हो गईं। अब 35-40 महिलाएं हुनरमंद हो गईं हैं और स्वयं के हाथों वस्त्र ही नहीं अपना भविष्य भी संवार रही हैं। अब इन महिलाओं की अपनी ख्वाहिशें हैं, अपने सपने हैं। आर्थिक तौर पर स्वतंत्र हैं।
पंचायत भवन में मिलती हैं ज्यादातर
सेवाएं: पंचायत में नए बने तीन आंगनबाड़ी भवन आदर्श स्थिति में हैं। स्कूल जाने के पूर्व की आयु वाले बच्चे नियमित आते हैं, जिन्हें सेविकाएं अक्षरज्ञान कराती हैं और सहायिका उनके लिए पोषाहार बनाती हैं। पंचायत सरकार भवन में लोक सेवाओं के अधिकार कानून के तहत ग्रामीणों को जाति, आय, आवास प्रमाणपत्र, दाखिल खारिज वाद आवेदन, भू-लगान रसीद आदि की सेवा मिल रही है। किसी को इन कार्यों के लिए एकंगरसराय अंचल कार्यालय नहीं जाना पड़ता। पंचायत में मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
मुखिया छोटी-छोटी समस्याओं का रखतीं ध्यान
पंचायत के निवासी कृष्ण कुमार बताते हैं कि मुखिया हर छोटी से छोटी समस्या का ध्यान रखती हैं। पहले गांव की खुली नालियों से दुर्गंध फैलती थी। मक्खी और मच्छर भिनभिनाते रहते थे। मुखिया ने सभी नालियों के ऊपर ढक्कन रखवा दिया। इससे बदबू नहीं फैलती और मच्छरों का प्रकोप भी कम हो गया। वे स्वयं घर-घर गई और महिलाओं को इज्जत घर (शौचालय) बनाने गई है। एकंगरसराय की को प्रेरित किया, जिससे काफी हद तक खुले में शौच पर रोक लग उपाध्याय भी कहती हैं कि प्रखंड पंचायत राज अधिकारी सुमन बीते तीन वर्षों में पारशु पंचायत में आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास हुआ है। मुखिया के कार्य की बदौलत ही आत्मनिर्भर पंचायत सम्मान मिला है।