ज्ञानवापी मुकदमे में पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्र पर वादमित्र ने दाखिल की आपत्ति

ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ

ज्ञानवापी मुकदमे में पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्र पर वादमित्र ने दाखिल की आपत्ति

ज्ञानवापी मुकदमे में पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्र पर वादमित्र ने दाखिल की आपत्ति

  • 1991 के मुकदमे के वादी हरिहर पांडेय की बेटियों के प्रार्थना पत्र पर हुई सुनवाई
  • अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी ज्ञानवापी के दो अन्य मुकदमों में भी तारीखें मिलीं

वाराणसी उत्तर प्रदेश : ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर से पं. सोमनाथ व्यास, डा. रामरंग शर्मा, पं. हरिहर नाथ पांडेय द्वारा 1991 में दाखिल मुकदमे की सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) प्रशांत कुमार सिंह की अदालत में सोमवार को हुई।

मामले में पक्षकार बनने के लिए हरिहर पांडेय की बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा, रेनू पांडेय ने प्रार्थना पत्र दिया। इस पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। अदालत ने सुनवाई की तारीख 21 मार्च दी है। विजय शंकर रस्तोगी की ओर से कहा गया कि कानूनन वादी की मृत्यु होने के बाद वारिस को मुकदमे में उनके स्थान पर प्रतिस्थापित करने का प्रविधान नहीं है। इसके पूर्व हरिहर पांडेय के बेटों को पक्षकार बनाए जाने का प्रार्थना पत्र खारिज कर चुकी है। 

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वाराणसी के लोहता निवासी मुख्तार अहमद अंसारी की ओर से ज्ञानवापी में मजारों का जिक्र करते हुए उर्स, चादरपोशी आदि की अनुमति देने की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर भी इसी अदालत में सुनवाई हुई। मामले में अगली सुनवाई दो अप्रैल को होगी। ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने, वहां मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार देने और पूजा करने से रोकने वालों का प्रवेश प्रतिबंधित करने की मांग को लेकर किरण सिंह की ओर से दाखिल मुकदमे में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई जिला जज की अदालत रिक्त होने की कारण टल गई।

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व्यास जी के तलगृह के मरम्मत की मांग पर मस्जिद पक्ष ने आपत्ति दाखिल की ज्ञानवापी स्थित व्यास जी के तलगृह के मरम्मत की मांग को लेकर नंदी जी ओर से जन उद्घोष सेवा संस्थान द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद (मस्जिद पक्ष) की ओर से आपत्ति सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दाखिल की गई। इसमें कहा गया है कि तलगृह के ऊपर नमाजी अरसे से बिना रोक-टोक नमाज पढ़ते चले आ रहे हैं। कभी कोई नुकसान नहीं हुआ है।

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अदालत ने भी तलगृह में कोई परिवर्तन न करने का आदेश दिया है। इसलिए वादी का प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाए। वादी पक्ष के अनुसार तलगृह की छत जर्जर चुकी है। उस पर लोगों के जमावड़े से पिछले दिनों पत्थर का एक टुकड़ा स्थल में विग्रह के पास गिर गया था। छत से पानी का रिसाव हो रहा है व एक बीम में दरार है। इसलिए तलगृह की मरम्मत करने संग छत पर लोगों के जमा होने पर रोक लगाई जाए।हो पूजा सुनवाई की अगली तारीख 15 अप्रैल मिली है।