हर कोई जानना चाहता है कि उसका जन्म क्यों हुआ है।
हर व्यक्ति जीवन में संघर्ष करता है, परंतु हर किसी का जीवन मूल्यवान है। इस लेख में जानिए जीवन का उद्देश्य, आत्महत्या की समस्याओं, संघर्षों से उबरने और दूसरों के जीवन में बदलाव लाने की प्रेरणा के बारे में। युवाओं, छात्रों और समाज के लिए एक सोचने योग्य लेख।
जीवन का उद्देश्य क्या है? | आत्महत्या, संघर्ष और जीवन की वास्तविकता | प्रेरणादायक लेख
हर कोई जानना चाहता है कि उसका जन्म क्यों हुआ है। इस दृष्टि में जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु भी संभव है।
पेड़ हो, जीव हो, जंतु हो, आदमी हो या पुरुष – सभी के जीवन का कोई न कोई आधार होता है।
बढ़ती जनसंख्या में युवाओं के अंदर, खासकर आजकल के नवयुवक, पढ़ाई के साथ-साथ बहुत-सी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
समस्याओं से जूझते हुए एक मन में ख्याल आता है कि मेरा जन्म क्यों हुआ है, मैं इस दुनिया में क्यों जन्म लिया हूँ।
मेरा उद्देश्य क्या है?
अगर मैंने यह नहीं किया तो मेरा जीवन बेकार है – और लोग खुदकुशी कर लेते हैं, अपने प्राणों का त्याग कर देते हैं।
खासकर एमबीबीएस की तैयारी कर रहे हैं, कोटा से सबसे ज्यादा हैं। इस तरह की घटनाएं आती हैं कि कोचिंग करते-करते घर वालों और पढ़ाई का बोझ सहन नहीं कर पाते, अपना फ्यूचर, अपनी समस्याएं लोगों को समझा नहीं पाते और आत्महत्या कर लेते हैं। मौत को गले लगा लेते हैं।
जीवन से लड़ने से ज्यादा जीवन को त्याग देना आसान समझते हैं।
जीवन क्या है?
अस्पताल में जिंदगी-मौत से लड़ते हुए उसे मरीज से पूछिए।
हाथों में इंजेक्शन लग रहे हैं, बॉटलें चल रही हैं, घरवाले जमीन बेच रहे हैं, गहने गिरवी रख रहे हैं, खून दे रहे हैं।
अपनी भूख-प्यास बेच रहे हैं अपने किसी बेटे, पिता, मां-बाप की जीवन देने के लिए।
अस्पताल के डॉक्टर दिन-रात पढ़ रहे हैं, रिसर्च चल रही हैं कि समस्याएं कम हों, जिंदगी ज्यादा बच सके।
एक तरफ है कि लोग समस्याओं से जूझते हुए अपने जीवन को त्याग देते हैं।
जीवन का उद्देश्य क्या है?
अगर सभी को अपने जीवन का उद्देश्य पता हो तो शायद वे अपने जीवन की ओर सही ढंग से चल सकें, अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें, अपनी समस्याओं से लड़ सकें, क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें वहां पहुंचना है और रास्ते में जो भी पत्थर आएं, उन्हें हटाना है।
पर यह हमेशा संभव नहीं है।
जब एक पेड़ लगाया जाता है तो उसे अपनी मंजिल का पता नहीं होता।
उसे नहीं पता होता कि कितनी आंधियों से जूझना पड़ेगा, कितनी तूफानों से लड़ना पड़ेगा, कितना पानी मिलेगा या नहीं मिलेगा।
पर उसके होने से फर्क पड़ता है।
उसके आसपास के लोगों को ऑक्सीजन मिलती है, लकड़ी मिलती है, फल मिलते हैं, एक अच्छा वातावरण मिलता है, छाया मिलती है।
उस पेड़ के लिए भले उसका अपना कुछ न हो, उसे लगता है कि मेरा जन्म हुआ है, मैं यही खड़े-खड़े मर जाऊंगा, एक दिन बूढ़ा होकर सूख जाऊंगा और मेरी लकड़ी को ही लोग जला देंगे।
उसके जीवन में भले कुछ न हुआ हो, उसने जन्म लिया है, अपना कार्य किया है जो उसे मिला है।
पर उसकी वजह से बाकी लोगों के जीवन में कितना बदलाव आया है।
उसे पेड़ की छांव में बैठकर लोगों ने गर्मी से राहत पाई है।
क्या उसके बिना छांव संभव थी बाकी लोगों के लिए?
उस वृक्ष पर लगे हुए मीठे फल लोगों ने खाए, अपनी भूख मिटाई।
उन व्यक्तियों को भी कुछ तो मिला है।
जब पेड़ खत्म होगा, तो उसकी लकड़ी से बहुत-से उपयोग होंगे – पेपर बनेंगे, लकड़ी बनेगी, घर बनेंगे, दीवारें बनेंगी, छत बनेगी, किसी बच्चे का खिलौना बनेगा।
क्या उसे पता था कि उसके जीवन से किसी के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आ सकता है?
यही बदलाव एक व्यक्ति के जीवन से दूसरे व्यक्ति के जीवन में होता है।
कभी न सोचें कि “मेरे होने या न होने से किसी को फर्क नहीं पड़ता।”
ऐसा नहीं है।
आपके जीवन से किसी के जीवन में परिवर्तन जरूर होगा।
अपने जीवन को अनमोल समझिए।
आपका जीवन दूसरे के लिए बहुत कुछ देता है।
किसी एक व्यक्ति के लिए आपका अस्तित्व एक संसार के बराबर है।
आपका होना आने वाले समाज के लिए एक परिवर्तन का मूल आधार है।
यह मत सोचिए कि “मैंने यह नहीं किया, तो जीवन बेकार है।”
जो भी आप कर रहे हैं, उसे बेहतर करें और करते रहें निरंतर।
जो भी परिणाम आए, उसे स्वीकार करें।
क्योंकि शायद वही आपका मुकाम था।
सही समय पर आपको सही सफलता मिलेगी।
अगर सफलता न भी मिले, तो कोई बात नहीं।
आप जहां हैं, वहीं चीजों को सही करें।
यह न सोचें कि “मैंने यह नहीं किया, तो क्या ही मिला।”
आप सृष्टि में आए हैं, उसका कोई न कोई मूल उद्देश्य है।
उसका कोई न कोई दूरगामी सोच है भगवान की।
भगवान ने जो भी करते हैं, सोच-समझकर करते हैं।
उन्होंने जन्म दिया है, मृत्यु भी खुद लेंगे, तो उससे पहले आपको वो सभी काम करने हैं जिससे आपके साथ-साथ आपके आसपास के लोग भी आप पर गर्व करें।
उन्हें लगे कि “आपके होने से मेरे जीवन में एक सुखद अनुभव हुआ है, मेरी जिंदगी में बदलाव आया है।”
यही आपका उद्देश्य है।
आपके जीवन का यह उद्देश्य है कि आपके होने से लोगों में खुशी का अनुभव हो।
उन्हें विश्वास हो कि हां, यह व्यक्ति है तो मुझे किसी चीज़ की चिंता नहीं है।
दूसरों के लिए जीवन जीएं, हां, अपनी पहचान न खोएं, यह अवश्य ध्यान रखें।
धन्यवाद।