1914 – प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: जर्मनी द्वारा रूस पर युद्ध
1914 World War I begins Germany declares war on Russia 1914 – प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: जर्मनी द्वारा रूस पर युद्ध
1914 – प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: जर्मनी द्वारा रूस पर युद्ध
1914 का वर्ष मानव इतिहास में एक निर्णायक मोड़ लेकर आया। इसी वर्ष 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया पर युद्ध की घोषणा की, और कुछ ही दिनों में यह संघर्ष पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। इसी क्रम में 1 अगस्त 1914 को जर्मनी ने रूस पर औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा की। यही घटना प्रथम विश्व युद्ध (World War I) के व्यापक प्रसार का एक बड़ा कारण बनी।
पृष्ठभूमि
19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोप कई सैन्य और राजनीतिक गठबंधनों में बंटा हुआ था। दो प्रमुख खेमे बने थे:
-
ट्रिपल एलायंस – जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, इटली
-
ट्रिपल एंटेंटे – रूस, फ्रांस, ब्रिटेन
28 जून 1914 को साराजेवो में ऑस्ट्रिया-हंगरी के उत्तराधिकारी आर्चड्यूक फ्रांज फर्डिनेंड की हत्या ने पूरे यूरोप में तनाव भड़का दिया। यह हत्या एक सर्ब राष्ट्रवादी द्वारा की गई थी, जिससे ऑस्ट्रिया-हंगरी और सर्बिया के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया। रूस ने सर्बिया का समर्थन किया, जबकि जर्मनी ने अपने सहयोगी ऑस्ट्रिया-हंगरी का साथ देने का फैसला किया।
जर्मनी और रूस के बीच तनाव
जब ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, रूस ने अपनी सेना की लामबंदी (Mobilization) शुरू कर दी। जर्मनी ने इसे सीधा खतरा माना और रूस से तुरंत लामबंदी रोकने की मांग की। लेकिन रूस पीछे हटने को तैयार नहीं था।
इसके जवाब में 1 अगस्त 1914 को जर्मनी ने रूस पर औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा कर दी। इसके तुरंत बाद जर्मनी ने रूस के सहयोगी फ्रांस के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
महत्व और प्रभाव
-
युद्ध का विस्तार – जर्मनी-रूस युद्ध ने प्रथम विश्व युद्ध को यूरोप भर में फैला दिया।
-
गठबंधन प्रणाली सक्रिय – रूस के समर्थन में फ्रांस और ब्रिटेन युद्ध में उतरे।
-
विश्वव्यापी संघर्ष की नींव – यह घटना आगे चलकर चार साल लंबे और विनाशकारी विश्व युद्ध में बदल गई, जिसमें लाखों लोगों की जान गई।
1 अगस्त 1914 का दिन केवल जर्मनी और रूस के बीच युद्ध की शुरुआत नहीं था, बल्कि यह एक ऐसे वैश्विक संघर्ष का संकेत था, जिसने दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना को हमेशा के लिए बदल दिया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि कैसे आपसी अविश्वास, सैन्य गठबंधन और आक्रामक नीतियां दुनिया को विनाश की ओर ले जा सकती हैं।