राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें युवा – दत्तात्रेय होसबाले जी

प्रयागराज, 25 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त रविवार को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एमपी हॉल में आयोजित युवा सम्मेलन एवं संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें। भारत को सच्चे अर्थों में […] The post राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें युवा – दत्तात्रेय होसबाले जी appeared first on VSK Bharat.

Jan 27, 2026 - 08:14
 0
राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें युवा – दत्तात्रेय होसबाले जी

प्रयागराज, 25 जनवरी।

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त रविवार को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एमपी हॉल में आयोजित युवा सम्मेलन एवं संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें। भारत को सच्चे अर्थों में भारत बनाने के लिए युवाओं को अपने घरों से बाहर निकलना होगा।

राष्ट्र पुनर्निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर मेडिकल कॉलेज, आईआईआईटी, एमएनआईटी तथा विभिन्न महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय से युवा उपस्थित रहे।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि ‘देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें’, यह हम सभी का मूलमंत्र होना चाहिए। भारत के बारे में दृष्टि सही होनी चाहिए। आज भारत को महान कैसे बना सकते हैं, यह विचारणीय विषय है। देश के सभी महापुरुषों ने ऊंच-नीच का भेदभाव छोड़ने के लिए कहा है। उद्योग, व्यापार, शिक्षा सभी क्षेत्रों में भारतीयता दिखनी चाहिए। भारत की सांस्कृतिक एकता महत्वपूर्ण है। इसके लिए मिलजुल कर प्रयास करना होगा। पर्यावरण की रक्षा करने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाना हम सभी का कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परम्परा को आगे बढाना है। भारत की युवा पीढ़ी अपने कर्तव्यों के बारे में दृढ़ प्रतिज्ञ हो। पूर्व से आज तक कई परिवर्तन हुए हैं और परिवर्तन प्रकृति का नियम है। राष्ट्र एवं समाज के लिए अच्छी बातें बोलने-सुनने में अच्छी लगती हैं, पर करने में कठिनाई होती है। जिस दिन हम इसे स्वीकार कर लेंगे, उसी दिन अपना देश लक्ष्य की प्राप्ति कर लेगा।

उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने रामायण में कहा था – नाम लेने से ही हम सफल नहीं होंगे। इसके लिए हमें कुछ कार्य अवश्य करना होगा। लंका समृद्ध होने के बावजूद श्री राम ने विभीषण को वहां का राज्य दिया और वहां से वापस अयोध्या आ गए। आज भी भारत इस संस्कृति को लेकर चल रहा है। भारत ने कभी किसी राष्ट्र का दमन करने के लिए अपने को विकसित नहीं किया। वह अपनी संस्कृति में सहजता, सरलता एवं समभाव रखते हुए, सभी का आदर करना चाहता है। किसी को हड़पने की आकांक्षा, इच्छा नहीं रखता है। कई सारी संस्कृतियां भारतीय संस्कृति की मुख्य धारा में विलीन हो गई और यहीं की बनकर रह गईं, यह भारतीय संस्कृति की महत्ता है।

भारत अपने ज्ञान को संग्रहालय एवं पुस्तकालयों में रखने के लिए नहीं, बल्कि अपने अनुभवों को, अपने ज्ञान को बांटने के विचार के लिए जाना जाता है। धर्मपाल जी की ‘प्राइड ऑफ इंडिया’ पुस्तक में भारत की शिक्षा प्रणाली, पंचायत व्यवस्था एवं संस्कृति की अभिव्यक्ति पर व्याख्या की गई है।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के लिए लाल, बाल, पाल ने आगे बढ़कर अपने आप को देश के लिए समर्पित किया था।

पर्यावरण की चर्चा के क्रम में उन्होंने इंदौर का उदाहरण देते हुए बताया कि विगत 8 वर्षों से इंदौर स्वच्छता के लिए प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है। क्या प्रयागराज भी इस स्थान पर पहुंच सकता है, जिस दिन प्रयागराज के युवा संकल्पित हो जाएंगे, उस दिन प्रयागराज को भी यह गौरव प्राप्त हो जाएगा।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि यदि हम लालसा और उपभोग में फसेंगे तो पुरुषार्थ का सही प्रयोग नहीं कर सकेंगे। प्रत्येक व्यक्ति को अपने पुरुषार्थ का प्रयोग करते हुए राष्ट्र को उन्नति तक ले जाने का प्रयास करना होगा। राष्ट्र प्रथम की भावना हम सभी में होनी चाहिए। राजगोपालाचारी ने अपनी पुस्तक में बताया कि हमें ‘पर कैपिटा इनकम’ ना देखते हुए ‘पर कैपिटा करेक्टर’ की ओर दृष्टि करनी होगी, तभी हमारा राष्ट्र चरित्र से मजबूत बन सकता है। सरकार्यवाह जी ने नवाचार के लिए भी युवाओं को प्रेरित किया।

संयुक्त परिवार के विखंडन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपने परिवार के साथ अवश्य बैठना चाहिए और परिवार को लेकर चलना ही हमारे लिए हितकर होगा। वह देश के निर्माण में भी सहायक है।

जिज्ञासा समाधान सत्र में पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी किया। एमएनआईटी के निदेशक प्रोफेसर  रमाशंकर वर्मा ने कहा कि इस तरह के युवा संवाद से युवकों का चिंतन राष्ट्रोन्मुखी होता है।

मंच पर सह प्रांत संघचालक प्रोफेसर राणा कृष्ण पाल एवं आईआईआईटी के निदेशक मुकुल यश सुतावडे उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वैदिक बटुकों ने स्वस्ति वाचन कर मंगलाचरण किया।

The post राष्ट्र पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें युवा – दत्तात्रेय होसबाले जी appeared first on VSK Bharat.

UP HAED सामचार हम भारतीय न्यूज़ के साथ स्टोरी लिखते हैं ताकि हर नई और सटीक जानकारी समय पर लोगों तक पहुँचे। हमारा उद्देश्य है कि पाठकों को सरल भाषा में ताज़ा, विश्वसनीय और महत्वपूर्ण समाचार मिलें, जिससे वे जागरूक रहें और समाज में हो रहे बदलावों को समझ सकें।