दुनिया को प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाने का कार्य भारत का युवा ही कर सकता है
प्रतापगढ़, 13 जनवरी। प्रतापगढ़ नगर स्थित तुलसी सदन में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा विद्यार्थी सम्मेलन एवं युवा व्यवसायी सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि युवा ही भारत के भाग्य विधाता हैं, यदि राष्ट्र की उन्नति और राष्ट्र का […] The post दुनिया को प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाने का कार्य भारत का युवा ही कर सकता है appeared first on VSK Bharat.
प्रतापगढ़, 13 जनवरी।
प्रतापगढ़ नगर स्थित तुलसी सदन में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा विद्यार्थी सम्मेलन एवं युवा व्यवसायी सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि युवा ही भारत के भाग्य विधाता हैं, यदि राष्ट्र की उन्नति और राष्ट्र का विकास तथा पूरी दुनिया को प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाने का कार्य कोई कर सकता है तो वह भारत का युवा ही कर सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी करना नहीं, शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, शिक्षा का उद्देश्य व्यापक है। शंकराचार्य जी ने कहा था – सा विद्या या विमुक्तये अर्थात विद्या मोक्ष का मार्ग है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य है सर्वांगीण विकास और फिर राष्ट्रभक्ति का आचरण करना। इतिहास में भी युवाओं ने भूमिका निभाई है, चाहे वह भारत की आजादी का इतिहास रहा हो अथवा भारत की सांस्कृतिक उन्नति का इतिहास रहा हो या भारत के विकास का इतिहास रहा हो, हर क्षेत्र में युवाओं ने परिश्रम किया है और ईमानदारी पूर्वक किये गए अपने कार्य से देश और राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। जब देश में स्वतंत्रता का आंदोलन चल रहा था, उस समय भी सरदार भगत सिंह, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, चंद्रशेखर आजाद जैसे युवाओं ने ही देश का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। ऐसा इसलिए किया कि क्योंकि भविष्य में देश के नागरिक, देश के युवा स्वतंत्रता की वायु को आत्मसात कर सकें। इसलिए अपने आचरण से, अपने मन, वचन, कर्म से राष्ट्र की सेवा करना ही परम लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने 30 वर्ष की अवस्था में दुनिया को यह संदेश देने का काम किया कि यदि हम अपने आचरण से अपने संस्कारों से और मन, वचन, कर्म से परोपकार की भावना रखते हैं तो निश्चित रूप से पूरी दुनिया सुख और समृद्धि के वातावरण में स्वतंत्र रूप से अपने जीवन को अभिसिंचित करती रहेगी। हमें अपने समाज को जागृत करने के लिए एक राष्ट्र के नाते, एक समाज के नाते, अपने स्वाभिमान को जागृत करना पड़ेगा। प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रति भक्ति होनी चाहिए। वह देशभक्ति जहां भी, हम जिस कार्य में हैं उस कार्य को ईमानदारी से करने में है। विद्यार्थी है तो विद्या अर्जन करने में, कृषक हैं तो तो अच्छी खेती करने में है। इसी प्रकार से यदि व्यवसाय में हैं तो अच्छा व्यवसाय करने में है, वहां भी हम ईमानदारी पूर्वक अपना कार्य करके हम अपनी राष्ट्रभक्ति की दिशा में संलग्न रह सकते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष अर्पित सर्वेश ने कहा कि हम सब युवा हैं और भारत का भविष्य भी युवा के हाथों में है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करना सबको परम आवश्यक है।
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