डीआरडीओ ने ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 03 फरवरी, 2026 को लगभग 10 बजकर 45 मिनट पर ओडिशा तट पर स्थित चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया […] The post डीआरडीओ ने ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया appeared first on VSK Bharat.

Feb 6, 2026 - 08:20
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नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 03 फरवरी, 2026 को लगभग 10 बजकर 45 मिनट पर ओडिशा तट पर स्थित चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक है। यह प्रौद्योगिकी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विकास में सहायक होगी और शत्रु पर रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगी।

नोजल-लेस बूस्टर, ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर सहित सभी उप-प्रणालियों ने अपेक्षित प्रदर्शन किया। प्रारंभ में इन्हें एक ग्राउंड बूस्टर मोटर के माध्यम से निर्धारित मैक नंबर तक पहुंचाया गया। प्रणाली के प्रदर्शन की पुष्टि आईटीआर, चांदीपुर द्वारा बंगाल की खाड़ी के तट पर तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त उड़ान आंकड़ों के माध्यम से की गई। प्रक्षेपण की निगरानी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने की, जिनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेट्री, हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लैबोरेट्री, रिसर्च सेंटर इमारत और आईटीआर शामिल हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एसएफडीआर तकनीक के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी।

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