कांग्रेस अध्यक्ष के घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई

गुवाहाटी/सिलचर, 07 अप्रैल 2026 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दक्षिण असम में आयोजित चुनावी रैली के दौरान दिए गए कथित अपमानजनक, उकसावेपूर्ण एवं साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील बयान को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की उत्तर असम प्रांत एवं दक्षिण असम प्रांत इकाइयों ने विधिक कार्रवाई की मांग करते हुए क्रमशः दिसपुर पुलिस थाना तथा […] The post कांग्रेस अध्यक्ष के घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई appeared first on VSK Bharat.

Apr 10, 2026 - 08:41
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कांग्रेस अध्यक्ष के घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई

गुवाहाटी/सिलचर, 07 अप्रैल 2026

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दक्षिण असम में आयोजित चुनावी रैली के दौरान दिए गए कथित अपमानजनक, उकसावेपूर्ण एवं साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील बयान को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की उत्तर असम प्रांत एवं दक्षिण असम प्रांत इकाइयों ने विधिक कार्रवाई की मांग करते हुए क्रमशः दिसपुर पुलिस थाना तथा सिलचर पुलिस थाना में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतों के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्रीभूमि जिले के करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नीलामबाजार में आयोजित चुनावी सभा में विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा की तुलना “ज़हरीले साँप” से करते हुए उसे समाप्त किए जाने का आह्वान किया।

शिकायत में उद्धृत कथन के अनुसार, खड़गे ने कहा – “यदि आप नमाज़ अदा कर रहे हों और आपके सामने एक ज़हरीला साँप आ जाए, तो आपको नमाज़ रोककर पहले उस साँप को मारने के लिए दौड़ना चाहिए – क़ुरान यही सिखाती है। मैं कहता हूँ कि आरएसएस और भाजपा उसी ज़हरीले साँप की तरह हैं; यदि आप आरएसएस और भाजपा जैसे ज़हरीले साँप को समाप्त नहीं करेंगे, तो आप जीवित नहीं रह पाएंगे।”

संघ ने इस प्रकार के वक्तव्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ चुनावी अभियान के दौरान धार्मिक भावनाओं का उपयोग करते हुए आरएसएस एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के विरुद्ध शत्रुता, भय तथा हिंसा को उकसा सकती हैं।

शिकायतों में कहा गया है कि यह बयान जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 83 के अंतर्गत भ्रष्ट चुनावी आचरण की श्रेणी में आता है तथा इससे जनता को आपराधिक रूप से भयभीत करने और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक समूहों के समर्थकों के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है। आरएसएस एवं भाजपा की विचारधारा को “ज़हरीला” बताना तथा उनके उन्मूलन की बात करना संगठन के सदस्यों एवं समर्थकों को शारीरिक क्षति पहुँचाने के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

यह बयान हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच साम्प्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का प्रयास प्रतीत होता है, जिससे असम में सार्वजनिक शांति एवं सौहार्द प्रभावित हो सकता है तथा चुनावी वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिकायतों में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इस प्रकार के वक्तव्य साम्प्रदायिक तनाव या टकराव का कारण बन सकते हैं।

आरएसएस ने बल देकर कहा है कि लोकतांत्रिक संवाद संवैधानिक एवं विधिक मर्यादाओं के भीतर रहना चाहिए तथा चुनावी राजनीति में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए जो सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को खतरे में डाले।

शिकायतें निम्नलिखित पदाधिकारियों ने प्रस्तुत की —

1. श्री खगेन सैकिया

प्रांत कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

उत्तर असम प्रांत, गुवाहाटी (दिसपुर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज)

 

2. श्री ज्योत्स्नामय चक्रवर्ती

प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

दक्षिण असम प्रांत, सिलचर (सिलचर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज)

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