जम्मू कश्मीर – आतंकी संगठनों से संबंध पर दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू। आतंकी संगठनों से संबंध होने के आरोपों की पुष्टि के पश्चात जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल ने दो सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। आतंक व उनसे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए आदेश जारी किए। दोनों कर्मचारियों पर लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंध होने के […] The post जम्मू कश्मीर – आतंकी संगठनों से संबंध पर दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त appeared first on VSK Bharat.

Apr 10, 2026 - 08:41
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जम्मू कश्मीर – आतंकी संगठनों से संबंध पर दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू। आतंकी संगठनों से संबंध होने के आरोपों की पुष्टि के पश्चात जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल ने दो सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। आतंक व उनसे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए आदेश जारी किए। दोनों कर्मचारियों पर लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंध होने के आरोप हैं।

प्रशासन ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत कार्रवाई की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में बिना विभागीय जांच के सीधे बर्खास्तगी की अनुमति देता है। यह कदम सरकार की “आतंक के प्रति जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी तंत्र से आतंक से जुड़े तत्वों को पूरी तरह समाप्त करना है।

रामबन का कर्मचारी आतंकी नेटवर्क से जुड़ा

बर्खास्त कर्मचारियों में रामबन जिले के शिक्षा विभाग में तैनात फरहत अली खांडे शामिल है। जांच में सामने आया कि वह कथित रूप से हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था और सरकारी नौकरी की आड़ में आतंकी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, खांडे पहली बार साल 2011 में सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया था, जब एक हवाला नेटवर्क की जांच के दौरान उसका नाम सामने आया। उसे गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन बाद में जमानत पर छूटने के बाद वह कथित रूप से फिर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया। साल 2022 में उसके खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी।

बांदीपोरा का कर्मचारी लश्कर का सहयोगी

दूसरा बर्खास्त कर्मचारी बांदीपोरा का मोहम्मद शफी डार है, जो ग्रामीण विकास विभाग में नियुक्त था। अधिकारियों के अनुसार, वह लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सहयोगी था और आतंकियों को लॉजिस्टिक व ऑपरेशनल मदद पहुंचाता था। जांच में खुलासा हुआ कि वह आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराता था, उनकी आवाजाही में मदद करता था और सुरक्षा बलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करता था। अप्रैल 2025 में एक संयुक्त नाका चेकिंग के दौरान उसे गिरफ्तार किया गया था, जहां से उसके पास से AK-56 राइफल और ग्रेनेड समेत हथियार बरामद हुए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई एक व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत अब तक 90 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को आतंकी संबंधों के आरोप में बर्खास्त किया जा चुका है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक “सरकारी मशीनरी से आतंक का आखिरी अंश समाप्त नहीं हो जाता”, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद को पूरी तरह, निर्णायक और स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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