क्या कहता है देश के बच्चों का मन सब को जानना चाहिए
क्या कहता है देश के किशोरों का मन, What has the heart of the country Bhandara said,
क्या कहता है देश के किशोरों का मन,
What has the heart of the country Bhandara said,
: किशोरावस्था के कच्चे-पक्के मन को समझना एक पहेली की तरह है। समाज और दुनिया उन्हें अपने सांचे में ढालना चाहती है, लेकिन सपनों की उड़ान भर रहा किशोर मन उस ढांचे को बदलना चाहता है। जीवन में उन्हें क्या करना चाहिए, यह तो किशोरों को हर कोई बताता है, लेकिन जीवन से वे क्या चाहते हैं, उनसे कोई नहीं पूछता। उनसे यही पूछने, उन्हें मन की बात रखने देने के लिए आगे आया 'दैनिक जागरण'। अपने सामाजिक अभियान 'जागरण जनमन' के तहत उनके बीच पहुंचने और उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनने की पहल की। जागरण जनमन वर्तमान स्थिति को जान-समझकर राष्ट्र निर्माण करने का एक अभियान है।
जनमन का आरंभ किशोरों के भविष्य को समझने, उनके सामने आ रही चुनौतियों और उनकी दृष्टि से इनके समाधान को जानने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक सोच वाला सर्वेक्षण है। इस सर्वेक्षण का विस्तार भारत के सात राज्यों के 378 शहरों-कस्बों तक रहा। इसकी व्यापकता और विश्वसनीयता इस बात से भी समझी जा सकती है कि इस सर्वेक्षण में कुल 4,02,287 अर्थात चार लाख से अधिक किशोर और किशोरावस्था की ओर बढ़ते बच्चे शामिल हुए। इन उत्तरदाताओं में तीन आयु वर्ग में 1,92,622 लड़कियां और 2,09,665 लड़के शामिल थे।
स्पष्ट था कि मन, मानसिकता और माहौल में अंतर के कारण उत्तर भी अलग-अलग होंगे, लेकिन जब रुझान सामने आने लगे तो सर्वेक्षण का विश्लेषण करने वाले भी चौंक गए। धर्म, जाति, संस्कृति, लिंग, भविष्य, स्वतंत्रता, नैतिक मूल्य, धन तथा जीवन संतुष्टि जैसे गंभीर विषयों पर इस पीढ़ी का दृष्टिकोण कभी संभावनाओं से भर रहा था तो कभी बलवती हो रही थीं आशंकाएं। समझ में आने लगा कि किशोर-भारत के मन के ये विचार कितने गहरे तथा वेगवान हैं। इस सर्वेक्षण का निष्कर्ष बताता है कि आज आवश्यक है कि सभी अभिभावक, समाज और सरकार इसे समझें तथा इस प्रवाह को समुचित संरक्षण-समाधान दें। इसी उद्देश्य से इस सर्वेक्षण में समर्थन और सहयोग देने वाले सभी उत्तरदाताओं, अभिभावकों तथा विद्यालयों के प्रति अपार कृतज्ञता के साथ हम आज से आगामी तीन दिनों तक प्रस्तुत कर रहे हैं- भारत का सबसे बड़ा सर्वेक्षण, 'क्या सोचता है किशोर मन।'