स्वराज्य पुनर्जागरण कार्यक्रम: सामाजिक चेतना और राजनीतिक बदलाव पर विचार-मंथन
स्वराज्य पुनर्जागरण कार्यक्रम का दो दिवसीय आयोजन ग्रेट नोएडा में किया जा रहा है, जिसमें समाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सुधारों पर गहन चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम के पहले दिन एक विशेष नाट्य फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के विभाजन और राजनीतिक स्वार्थों पर प्रकाश डाला गया Two day program Swarajya reawakening organized Great Noida, स्वराज्य का पुनजागरण कार्यक्रम का दो दिवसीय आयोजन ग्रेट नोयडा में
स्वराज्य पुनर्जागरण कार्यक्रम: सामाजिक चेतना और राजनीतिक बदलाव पर विचार-मंथन
स्वराज्य का पुनर्जागरण कार्यक्रम का दो दिवसीय आयोजन ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा ह। दो दिवसीय आयोजन का आज पहला दिन है जहां प्रथम दिन सुबह 8 बजे से नाट्य प्रदर्शन के माध्यम से एक फ़िल्म का प्रदर्शन किया। जिसमें नाट्य मंचन को फ़िल्म के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इस फ़िल्म में राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया है, साथ ही किस तरह से समाज के वर्गों को बाटा गया है और राजनेता इसका अपने स्वार्थ के लिए कैसे समाज के हर तपके का अपने स्वार्थय के लिए उपयोग कर रहे है। फ़िल्म में किस तरह से भौतिक उन्नति हो रही है समाज में और नैतिकता का पतन हो रहा है इसे बजरंग मुनि जी ने सार्थकता के साथ फ़िल्म के माध्यम से जानकारी दी है। उन्होंने कहा फ़िल्म जो दिखाई गई है यह 15 वर्ष पहले बनी फ़िल्म है। इस फ़िल्म में व्यक्तिगत बदलाव को लेकर चर्चा कि गई। हम किस तरह से इस फ़िल्म को समाज में प्रसारित किया जाए। क्योंकि 90 % समाज भावना प्रदान है, और 10 % बुद्धि प्रदान है, जो भावना प्रदान है उनके समक्ष सगींत, नाटक के माध्यम से इस फ़िल्म को प्रसारित किया जा सकता है।
फ़िल्म में दिखाई गई बातों से कई लोग सहमत हुए और कई लोगों ने इसमें कुछ बदलाव और कुछ विषय को जोड़ने कि अपने विचार रखे। मुनि जी से प्रश्न के माध्यम से मनीष शुक्ला ने कहा कि फ़िल्म में दिखाया गया कि विभिन्न समाज वर्ग को बाट कर दिखाया गया है, तो क्या सविधान को बदलना संभव है। जिस पर मुनि जी ने जवाब दिया कि लंका कांड में ये बात आ गई है अभी बाल कांड बाकी है।
इसके आलावा रामलाल जी ने शिक्षा के स्तर पर चर्चा का मुद्दा उठाया, वही संजय तिवारी जी ने सुझाव दिया कि केंद्रित भूमिका में पंडित जी है उस उनका नाम उस हटा दिया जाए। वही दिलीप मृदुल जी ने फ़िल्म कि अमूल अवधारणा पर सवाल उठाए, उन्होंने अपने कुछ पॉइंट भी रखे जैसे-
1. कृत्रिम उर्जा की कमी पर बात की गई।
2. कठोर दंड देने पर
3. परिवार में रक्त सम्बंधित ना होने पर भी परिवार में जोड़ने कि बात पर
4. परिवार में सभी को सामान्य संपत्ति देने पर
5. हम बदलने वाली व्यवस्था पर कैसे जायेंगे।
बजरंग मुनि जी ने उनके सवालों पर जवाब देने हुए कहा कृत्रिम उर्जा ऊर्जा पर रिसर्च के बाद विचार करके इसके फ़िल्म में प्रदर्शित किया है। इसपे कल इस विषय पर और चर्चा करेंगें।
इसके अलावा दूसरी चर्चा में बजरंग मुनि पूरी व्यवस्था को कैसा बदला जाए उसको लेकर जानकारी के साथ चर्चा कि। उन्होंने कहा मै बचपन में ईसाई धर्म को मान रहा था बाद में मै ब्राह्मण बन गया। मै एक बनिया परिवार में जन्मा था। ये बर्ह्माणवादी दिशा को राजनीतिक माध्यम से सुधारा जा सकता है तो मै नेता बन गया। अगर नेता ईमानदार हो जाए तो भूखे मर जाए। ज़ब मै नेता था तो देश में युद्ध हो गया। पहले मैं बर्ह्माण बना, क्षत्रिय बना, शूद्र बना, फिर वैश्य बन गया। मैं 13 साल कि उम्र में बर्ह्माण हुआ और मेरा नाम बजरंग मुनि पड़ा। मुझे चारो वर्गों का प्रत्यक्ष अनुभव है। मुझे 18 महीने जेल में भी रहने का अनुभव है। वर्तमान में जो समाज में समस्या है, सबसे बड़ा कारण समाजिक व्यवस्थाओं में राजनीतिक का प्रमुख हस्तक्षेप, व्यापारीक कारणों में भी राजनीतिक का अधिक प्रभाव है। जो प्रयोग मैंने किए उसपे निष्कर्ष मैंने निकाले लेकिन कोई राजनेता इसे समझने के लिए तैयार नहीं हुआ। अनुभव करते - करते मैं चला गया। मैं ऋषिकेश में 2 साल मैं रहा गंगा किनारे रहते हुए मैंने चिंतन किया।
इसमें छोटा सा निष्कर्ष निकला जब तक राजनीतिकरण में बदलाव नहीं होगा तब तक कुछ भी संभव नहीं है। सत्ता परिवर्तन कोई समस्या का हल नहीं है। राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है। जब तक भारत का सविधान तंत्र गुलाम रहेगा तब तक व्यवस्था में परिवर्तन नहीं होंगा। सविधान को गुलामी से हटाना है। सविधान किसका इसके लिए विधायिका और न्याय पालिका लड़ती है। तंत्र लोक का प्रतिनिधि नहीं हो सकता। गुलाम बनाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहे है। देश का सविधान तंत्र कि गुलामी से मुक्त होना चाहिए। लेकिन करेगा कौन? अब मैं करुगा। मैंने सोचा था कि 25 दिसंबर 2024 को रिटायरमेंट लूंगा। मेरे मन में एक सवाल आया कि मेरा सारा अनुभव तो बेकार हो जाएगा मैंने इस पर तुरंत किताब लिखी। मेरी तबीयत ज्यादा अच्छी नहीं रहती इसलिए ज्ञान केंद्र कि ज्ञानेंद्र जी हुए लोक स्वराज को नरेंद्र जी को सौंप दिया है, अब ये इनका प्रतिनिधित्व करेंगें। मैं सिख देना चाहता हु कि एकमात्र कार्य है संविधान लोकतंत्र की गुलामी से मुक्त होना चाहिए। संविधान लोकतंत्र को गुलामी से हटाने की शुरुआत ग्राम सभा के कार्यों के संशोधन से होना चाहिए। ग्राम सभाओं की विधान सभाओं में महत्वपूर्ण भूमिका होनी होनी चाहिए। जिससे कार्य लोक स्वराज्य के माध्यम से होंगा।
संविधान ग्राम सभाओं को 29 आदेश का अधिकार देता है। लेकिन वर्तमान में 29 में से एक भी अधिकार नहीं दिया गया। 1950 में लोकतंत्र आया। 1951 में लोकतंत्र को समाप्त करके संसदीय लोकतंत्र कर दिया गया। उसके बाद संविधान संशोधन में राष्ट्रपति की भूमिका थी। 1971 में राष्ट्रपति की भूमिका छीन ली गई। सन 71 तक राष्ट्रपति लोक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब राष्ट्रपति संसद का प्रतिनिधित्व कर रहे है। राष्ट्रपति संविधान की शपथ नहीं लेते है। राष्ट्रपति लोकतंत्र की शपथ लेते है। वही नेता संविधान की शपथ लेते है।
मुनि जी ने कार्यों की जानकारी देते हुए कहा..
हमें पहला राज्य लोक स्वराज्य में ग्राम सभाओं को संविधान में अधिकार देना।
दूसरा कार्य समाज वर्ग को जो बांटने का प्रयास किया जा रहा है समाज में जिस प्रकार से राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से व्यापार हो रहा है। यह कार्य ज्ञान यज्ञ परिवार का है। इसके लिए ज्ञान यज्ञ परिवार को आगे आना होगा। वर्ग विहीन, वर्ग युक्त समाज होना चाहिए। ऐसा बनना चाहिए कि जिसमें वर्ग भेद ना हो।
तीसरा विचार मंथन तर्क शक्ति आपसे जागृत हो भारत देश भर में विश्व गुरु बने हमें इसमें विचार करना चाहते है। तीनों कार्यों को संयुक्त रूप से करना होगा। हम गांव में ज्ञान केंद्र बना रहे हैं।
ज्ञान केंद्र का कार्य क्या है, इसके बारे में जानकारी देते हुए मुनि जी ने कहा कि ज्ञान केंद्र को एक कार्य करना है हर ज्ञान केंद्र को एक काम करना है, वर्ष में एक बार बैठक करना है। हर ग्रामीण अंचल में ज्ञान केंद्र बने चाहिए ज्ञान केंद्र के माध्यम से हम तीनों कार्यों पर मंथन कर सकते हैं। मदद करने के लिए हमारी संस्था है संस्था द्वारा ट्रस्ट भी है। ट्रस्ट सभी चीज के लिए आर्थिक मदद करेगा।