तहव्वुर राणा को हो सकती है फांसी की सजा
प्रत्यर्पित करने वाले देश में मृत्युदंड की सजा है तो यहां भी मिल सकती है राणा पर है आतंकवाद का आरोप, इसके लिए अमेरिका में भी है मृत्युदंड का प्रविधान तहव्वुर राणा को हो सकती है फांसी की सजा
तहव्वुर राणा को हो सकती है फांसी की सजा
प्रत्यर्पित करने वाले देश में मृत्युदंड की सजा है तो यहां भी मिल सकती है राणा पर है आतंकवाद का आरोप, इसके लिए अमेरिका में भी है मृत्युदंड का प्रविधान
मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर राणा अमेरिका से प्रत्यार्पित कर भारत लाया गया है। अब यहां उस पर 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर मुकदमा चलेगा। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे। अगर भारत और अमेरिका का कानून देखा जाए तो तहव्वुर राणा को फांसी की सजा हो सकती है।
तहव्वुर को मृत्युदंड की सजा होगी या नहीं, इसके लिए यह देखना होगा कि जिस देश से वह प्रत्यार्पित कर लाया जा रहा है वहां का कानून क्या कहता है और जिस देश में लाया जा रहा है वहां का कानून उस पर लगे आरोपित अपराध में किस दंड का प्रविधान करता है। तहव्वुर को उसके अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा होने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वकील ज्ञानंत सिंह कहते हैं कि प्रत्यर्पण के मामले में अभियुक्त जिस देश से आ रहा है अगर वहां मृत्युदंड की सजा है तो उसे यहां भारत में भी मृत्युदंड दिया जा सकता है। अभियुक्त किस देश का नागरिक है इसका कोई फर्क नहीं पड़ता अगर अपराध भारत में हुआ है तो उसे भारत के कानून से डील किया जाएगा। उस पर भारत का कानून लागू होगा। प्रत्यर्पण के मामले में जिस देश से वह आरोपित लाया जाता है, वह देश शर्त लगा सकता है, लेकिन अगर उस देश में आरोपित पर लगे अपराध में मृत्युदंड की सजा है तो वह सामान्य तौर पर मृत्युदंड नहीं देने की शर्त नहीं लगाता।
भारतीय कानून को देखा जाए तो आतंकी गतिविधियों में शामिल अपराधी के लिए उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक की सजा है और मुंबई हमले के मामले में दोषी पाकिस्तानी नागरिक अजमल कसाब को फांसी हुई थी। लेकिन तहव्वुर राणा का मामला कसाब से थोड़ा अलग है। राणा को अमेरिका से प्रत्यार्पित करके भारत लाया गया है। ऐसे में प्रत्यर्पण की जो शर्तें होंगी उन्हीं के मुताबिक उस पर मुकदमा चलेगा और सजा मिलेगी। नियम के मुताबिक प्रत्यर्पण पत्र में जिस मुकदमे और जिन आरोपों का जिक्र किया गया होगा, उन्हीं मामलों में राणा पर मुकदमा चलेगा। अमेरिका और भारत के बीच 1997 में हुई प्रत्यर्पण संधि को देखा जाए तो उसका आर्टिकल आठ कहता है कि जिस अपराध में मुकदमा चलाने और सजा देने के लिए प्रत्यर्पण की मांग की जा रही है, अगर उस अपराध के लिए प्रत्यर्पण करने वाले देश में मृत्युदंड का प्रविधान है, लेकिन यदि प्रत्यार्पित करने वाले देश में उस अपराध में मृत्युदंड का प्रविधान नहीं है तो वह देश प्रत्यर्पण की मांग ठुकरा सकता है। ये प्रविधान तहव्वुर राणा के मामले में लागू नहीं होगा क्योंकि उस पर आतंकवाद का आरोप है। उस पर भारत पर हमला करने की साजिश के आरोप है और आतंकवाद के अपराध में अमेरिका में भी मृत्युदंड की सजा है।
भारत की न्यायपालिका ने वैसे तो फांसी की सजा के लिए रेयरेस्ट आफ रेवर का सिद्धांत तय कर रखा है, लेकिन भारत की न्यायपालिका भी आंतकवादियों को फांसी देने में कोताही नहीं करती और इसके उदाहरण मुंबई हमलों का दोषी अजमल कसाब, संसद हमलों का दोषी अफजल गुरु और मुंबई में सीरियल बम धमाकों का दोषी याकूब मेमन हैं जिन्हें फांसी दी गई। वैसे राणा को क्या सजा होगी, यह न्यायिक मामला है। एनआइए और अन्य एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगीं और उसके बाद उस पर अदालत में मुकदमा चलेगा फिर सजा होगी।