शुद्ध घी के दावों में दम नहीं, समय-समय पर जांच जरूरी
घी के लिए 10 प्रतिशत दूध ही उपलब्ध होता है। एक किलो घी के लिए कम से कम 17-18 लीटर दूध की जरूरत होती है। ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इतनी मात्रा में घी आता कहां से है
शुद्ध घी के दावों में दम नहीं, समय-समय पर जांच जरूरी
तिरुपति बालाजी के प्रसाद ( लड्डू) में चर्बी मिले घी का इस्तेमाल आस्था का मामला है, लेकिन डेरी कंपनियों के साथ गांव-गांव में फैले मिलावट के इस धंधे से करोड़ों लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है। पशुपालन मंत्रालय के मुताबिक देश में दूध का कुल उत्पादन प्रतिदिन लगभग 2,400 लाख लीटर से अधिक है। इसमें घी के लिए 10 प्रतिशत दूध ही उपलब्ध होता है। एक किलो घी के लिए कम से कम 17-18 लीटर दूध की जरूरत होती है। ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इतनी मात्रा में घी आता कहां से है? घी में मिलावट का सबसे ज्यादा धंधा त्योहारों में ही होता है। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई तरह के खाद्य पदार्थों की अक्सर कमी पड़ जाती है, जिससे उसके दाम बढ़ जाते हैं, किंतु टमाटर-प्याज की तरह कभी नहीं सुना गया कि घी भी बाजार से गायब है। जब जितनी जरूरत है, उतना घी उपलब्ध रहता है। स्पष्ट है, ऐसा मिलावट की वजह से होता है। उपभोक्ता मंत्रालय की सचिव निधि खरे का कहना है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) को देखना चाहिए कि शुद्ध घी बताकर जो बेचा जा रहा है, उसमें कितनी मिलावट है। राज्यों के पास अपनी फूड टेस्ट लैब हैं, उन्हें सक्रिय करके और समय-समय पर जांच करके असंगठित क्षेत्रों में भी मिलावटखोरी पर अंकुश लगाया जा सकता है। जांच में दोषी पाने पर सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ना ठीक नहीं, क्योंकि कोई गारंटी नहीं कि वह दोबारा ऐसा जुर्म नहीं करेगा। पटना के एक बड़े डेरी कारोबारी का कहना है कि शुद्ध घी के दावे पर एकदम से भरोसा नहीं किया जा सकता। घी में वनस्पति घी एवं पाम आयल मिलाना तो आम बात है। धंधेबाजों को आलू एवं शकरकंद के अतिरिक्त पशुओं की चर्बी व हड्डियों से निकले फैट को मिलाने से भी परहेज नहीं है। एनिमल फैट (इसमें सभी तरह के जानवरों की चर्बी व मछली का तेल) मिलाने का धंधा तेजी से पनपने लगा है। घी को गाढ़ा करने के लिए मैदा, आल और शकरकंद के चूर्ण को मिलाया जाता है। सबसे ज्यादा मिलावट की शिकायत वनस्पति घी और पाम आयल की होती है। लखनऊ का उदाहरण ताजा है, जिसमें इसी हफ्ते खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आलमबाग की एक फैक्ट्री से 10 क्विंटल से ज्यादा नकली घी बरामद किया था। उसे वेजिटेबल आयल, पिघला हुआ बटर, हाइड्रोजेनेटेड तेल एवं आलू मिलाकर बनाया जा रहा था। फैक्ट्री से दर्जनभर ब्रांडेड कंपनियों के एक्सपायरी घी भी बरामद किए गए थे। नई पैकेजिंग कर अपनी कंपनी का लेबल लगाकर उसे बेचा जा रहा था।
आमजन भी कर सकता असली-नकली की पहचान बिहार एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में डेरी विशेषज्ञ डा. संजीव के मुताबिक नकली घी की पहचान आम आदमी भी कर सकता है। थोड़े से घी में एक बूंद सल्फ्यूरिक एसिड डालने पर यदि घी का रंग गुलाबी हो जाए तो समझो वनस्पति घी की मिलावट होती है। लाल हो जाए तो वेजिटेबल आयल की मिलावट होती है। आयोडीन डालने पर घी का रंग नीला हो जाए तो इसका मलब है कि घी में स्टार्च की मिलावट है।
सेहत से खिलवाड़ मिलावट से लोगों की सेहत पर पड़ रहा बुरा असर, घी में मिलावट का सबसे ज्यादा धंधा त्योहारों के दौरान, टमाटर-प्याज की तरह कभी नहीं सुना गया कि घी बाजार से गायब, जितनी मांग उतना उपलब्ध यानी मिलावट पक्की