राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार छठ महापर्व में हुए शामिल, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
छठ महापर्व का पर्यावरण-संरक्षण संदेश छठ पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार छठ महापर्व में हुए शामिल, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
पटना, 8 नवंबर 2024 – लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार पटना के भद्र घाट पर पहुंचे और गंगा जल तथा दूध अर्पित कर छठी मइया का आशीर्वाद प्राप्त किया। छठ पर्व में उनकी सहभागिता को लेकर स्थानीय भक्तों में उत्साह देखा गया। इस मौके पर आलोक कुमार ने समाज को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।
संघ का शताब्दी वर्ष और पंच परिवर्तन का संकल्प
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन का संकल्प ले रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। विजयादशमी के अवसर पर पटना में अपने संबोधन में आलोक कुमार ने कहा था कि भारत की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण की है और इसे संरक्षित करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा, "आज नदियों का जल अत्यधिक प्रदूषित हो गया है, और हमें गंगा, यमुना जैसी नदियों के जल को शुद्ध रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।"
छठ महापर्व का पर्यावरण-संरक्षण संदेश
छठ पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। इस पर्व में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाता है। व्रतियों द्वारा प्रसाद तैयार करने के लिए मिट्टी के चूल्हों का उपयोग होता है, जो पर्यावरण के अनुकूल होता है। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जल का महत्व होता है, और व्रती नदी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस प्रकार, छठ पर्व प्रकृति और समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
आलोक कुमार के अनुसार, संघ की यह पहल केवल संघ के लिए नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए एक उदाहरण है कि हमें अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्वों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देना चाहिए।