मेरे हाथों में जब मेरी पहली सैलरी आई तो मुझे इस बात की बहुत खीज हुई कि एक अच्छा खासा अमाउंट तो पीएफ में ही कट गया लेकिन जब पता चला कि यह मेरे ही बेनिफिट की चीज है और इसी से बुढ़ापे में मुझे पेंशन मिलने वाली है तो आई राहत की सांस वैसे मैं शर्त लगा सकती हूं कि अभी भी कई लोगों को इसका कोई आईडिया नहीं है कि उनके पीएफ अकाउंट में जमा होने वाला पैसा ही उन्हें फ्यूचर में पेंशन भी दिलाएगा इसलिए हमने सोचा कि इस बार पैसा वसूल के ज्ञान में यही समझ लेते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपको कितनी पेंशन मिले और इस बारे में ईपीएफओ के नियम क्या कहते हैं तो सबसे पहले थोड़ा बैकग्राउंड जान लेते हैं कोई भी एंप्लॉई चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट सेक्टर में काम करता हो उसका एक पीएफ अकाउंट होता है उसकी बेसिक सैलरी का 12 पर यानी कि 12 फीदी हिस्सा इस अकाउंट में जमा होता है और उसकी कंपनी भी इतना ही यानी 12 पर का कंट्रीब्यूशन करती है लेकिन कंपनी या एंप्लॉयर के अकाउंट में जमा होने वाले इस 12 अमाउंट का 8.33 हिस्सा पेंशन फंड में और बाकी का 3.67 पर हिस्सा पीएफ में जमा होता है नहीं नहीं अभी इसे कैलकुलेटर मत उठाइए वरना आपका पीएफ का हिसाब गड़बड़ आ जाएगा असल में सरकार ने पेंशन लायक सैलरी की मैक्सिमम लिमिट ₹1500000 या इससे कम है तो आप कर्मचारी पेंशन स्कीम यानी ईपीएस के हकदार होंगे चलिए इसे एक एग्जांपल से समझते हैं
अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹1 ज है तो इसका मतलब है कि हर महीने इसका 8.33 यानी 1250 आपके पेंशन फंड में जमा
होंगे अब आप पूछेंगे कि अगर बेसिक इससे ज्यादा है मसलन 0000 है तो तब भी अपर
लिमिट के हिसाब से कंपनी या एंप्लॉयर का
हिस्सा 50 ही कटेगा और बाकी की रकम पीएफ
अकाउंट में जमा होगी अब लौटते हैं ईपीएस
के कायदे कानूनों पर ईपीएफओ यानी एंप्लॉई
प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन ने अपनी
कर्मचारी पेंशन योजना 16 नवंबर 1995 को
शुरू की थी योजना की प्रोविजंस के मुताबिक
पेंशन योजना का कोई भी मेंबर 10 साल तक
पीएफ कंट्रीब्यूशन देने पर पेंशन का हकदार
हो जाता है और 58 साल की उम्र पूरी करने
पर वह पेंशन ले सकता है चाहे वह अपनी
कंपनी से रिटायर हो या ना हो इसके अलावा
अगर कोई सदस्य 50 साल की उम्र में ही
नौकरी छोड़ देता है तो भी वह पेंशन पाने
का हकदार हो जाता है हालांकि उसे यह पेंशन
घटी दर पर मिलेगी शर्त यही है कि पीएफ पें
में उसका कंट्रीब्यूशन कम से कम 10 साल हो
यानी अगर आप 50 से 58 साल के बीच नौकरी
छोड़ देते हैं तो आपकी जज 58 साल से जितनी
कम होगी उसके अकॉर्डिंग पेंशन में 4 पर की
दर से कमी कर उसे पेंशन दी जाएगी अगर आप
58 साल की बजाय 60 साल की उम्र में पेंशन
क्लेम करते हैं तो हर साल आपकी पेंशन में
4 पर की बढ़ोतरी हो जाएगी यानी 59 साल में
पेंशन 4 पर बढ़कर मिलेगी और अगर 60 वें
साल में पेंशन क्लेम करते हैं तो पेंशन 8
फीदी बढ़कर मिलेगी यहां भी यह फार्मूला
काम करता है जितने ज्यादा साल नौकरी उतनी
ही ज्यादा पेंशन अब सवाल उठता है कि पेंशन
कैलकुलेशन का फार्मूला क्या है तो अब आप
यहां अपना कैलकुलेटर हाथ में ले सकते हैं
तो जैसा कि हमने शुरू में ही बताया था कि
पेंशन योग्य सैलरी की अधिकतम सीमा 000 तय
है और हमने यह भी बताया था कि इसका 8.33
पर जो है व पेंशन फंड में जमा होता है तो
इसे हम कैलकुलेट कुछ ऐसे करेंगे 15000 को
8.33 से मल्टीप्लाई एंड 100 से डिवाइड अब
जब आपको अपना कुल पेंशन अमाउंट कैलकुलेट
करना है तो आपको यूज करना होगा यह
फार्मूला अपनी पेंशन योग्य सैलरी को अपने
टोटल सर्विस ईयर यानी जितने साल नौकरी की
है उससे मल्टीप्लाई करें और फिर इसे 70 से
डिवाइड कर दें है ना आसान तो पेंशन पाने
के लिए मैक्सिमम सर्विस ईयर 35 साल माना
गया है इस हिसाब से अधिकतम पेंशन हुई
15000 जिसे आप मल्टीप्लाई करेंगे 35 से और
डिवाइड करेंगे 70 से जवाब आया ₹5000000
महीनों का एवरेज होगी आप सोच रहे होंगे कि
अगर बेसिक सैलरी अधिकतम 15000 की लिमिट से
अधिक हुई तो उस केस में ₹1 ज ही पेंशन
योग्य सैलरी मानी जाएगी अगर एंप्लॉई की
नौकरी 20 से अधिक की है तो उसे 2 साल का
बोनस भी मिलेगा इस केस में चूंकि सर्विस
पीरियड 30 साल था इसलिए इसमें 2 साल बोनस
के जुड़ जाएंगे और इस तरह यह होंगे 32 साल
तो कर्मचारी की पेंशन हुई 15000 * 32 / 70
यानी
857 इसके अलावा आप ईपीएफओ की वेबसाइट पर
जाकर पेंशन कैलकुलेटर की मदद से अपनी
पेंशन जान सकते हैं पैसा वसूल के इस
एपिसोड में इतना ही