महिलाओं के खिलाफ अपराध मामलों में जल्द न्याय करें अदालतें : मोदी
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जिला अदालतें हमारी न्यायपालिका का दर्पण हैं। इन्हीं के माध्यम से आम जनता अपने मन में न्यायपालिका की छवि बनाती है। पिछले एक दशक में ईज आफ लिविंग के साथ साथ ईज आफ जस्टिस को बढ़ावा देने के सार्थक प्रयास किए गए हैं,
महिलाओं के खिलाफ अपराध मामलों में जल्द न्याय करें अदालतें : मोदी
जितनी तेजी से फैसले आएंगे, महिलाओं को सुरक्षा का उतना भरोसा होगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर चिंता जताते हुए न्यायपालिका से ऐसे मामलों में जल्द फैसला देने की अपील की है। शनिवार को जिला अदालतों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बच्चों की सुरक्षा को ज्वलंत मुद्दा बताते हुए इस पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने ऐसे मामलों में त्वरित न्याय की अपील करते हुए कहा कि महिला अत्याचार से जुड़े मामलों में जितनी तेजी से फैसले आएंगे, आधी आबादी को सुरक्षा का उतना ही बड़ा भरोसा मिलेगा।
न्यायपालिका संविधान की संरक्षक मानी गई है और यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका ने इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करने का प्रयास किया है। इस मौके पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जिला अदालतें हमारी न्यायपालिका का दर्पण हैं। इन्हीं के माध्यम से आम जनता अपने मन में न्यायपालिका की छवि बनाती है। पिछले एक दशक में ईज आफ लिविंग के साथ साथ ईज आफ जस्टिस को बढ़ावा देने के सार्थक प्रयास किए गए हैं, जिसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। कोलकाता में डाक्टर से दरिंदगी की घटना के बाद से महिला सुरक्षा का मुद्दा गर्म है।
इस बीच पीएम मोदी का देशभर के न्यायाधीशों से महिलाओं के खिलाफ अपराध में त्वरित न्याय की अपील करना महत्वपूर्ण है। शनिवार को प्रधानमंत्री भारत मंडपम में जिला अदालतों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में देशभर की जिला अदालतों के 800 से ज्यादा न्यायाधीश और सभी उच्च्च न्यायालयों तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भाग ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर इस सम्मेलन का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर डाक टिकट और सिक्का जारी किया। पीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 75 वर्ष केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है।
यह भारत के संविधान और संवैधानिक मूल्यों की यात्रा है। मोदी ने आपातकाल लगाने को काला दौर करार दिया और कहा कि उस समय न्यायपालिका ने संविधान की रक्षा में अहम भूमिका निभाई। मौलिक अधिकारों पर जब प्रहार हुए, तो सुप्रीम कोर्ट ने उनकी भी रक्षा की। जब-जब देश की सुरक्षा का प्रश्न आया, न्यायपालिका ने राष्ट्रहित सर्वोपरि रखकर भारत की एकता की रक्षा की। पिछले 10 वर्षों में न्याय को सुगम बनाने के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए मिशन स्तर पर काम हो रहा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के सहयोग की बड़ी भूमिका रही है।
आपराधिक न्याय प्रणाली में समन्वय की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कठोर कानून बने हैं। 2019 में सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना की योजना बनाई थी। इसके तहत अहम गवाहों के लिए गवाही केंद्र का प्रविधान है। आपराधिक न्याय प्रणाली के बीच समन्वय बनाने की जरूरत है। एक जुलाई से लागू हुए तीन आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कानूनों की भावना सिटीजन फर्स्ट, डिग्निटी फर्स्ट और जस्टिस फर्स्ट है। न्याय संहिता का सोच सिर्फ सजा देना ही नहीं है, बल्कि सुरक्षा देना भी है।