स्त्री में निहित सुप्त शक्ति को जाग्रत करने हेतु 90 वर्ष से कार्यरत राष्ट्र सेविका समिति – अन्नदानम सीता गायत्री जी

भाग्यनगर, 25 जनवरी। रथसप्तमी के दिन, राष्ट्र सेविका समिति सिकंदराबाद विभाग का संक्रांति उत्सव पल्लवी मॉडल स्कूल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री जी उपस्थित रहीं। प्रारंभ में 180 से अधिक सेविकाओं ने गणवेश में पथ संचलन में भाग लिया। मार्ग में समाज जनों ने पुष्पवर्षा कर […] The post स्त्री में निहित सुप्त शक्ति को जाग्रत करने हेतु 90 वर्ष से कार्यरत राष्ट्र सेविका समिति – अन्नदानम सीता गायत्री जी appeared first on VSK Bharat.

Jan 27, 2026 - 08:14
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स्त्री में निहित सुप्त शक्ति को जाग्रत करने हेतु 90 वर्ष से कार्यरत राष्ट्र सेविका समिति – अन्नदानम सीता गायत्री जी

भाग्यनगर, 25 जनवरी।

रथसप्तमी के दिन, राष्ट्र सेविका समिति सिकंदराबाद विभाग का संक्रांति उत्सव पल्लवी मॉडल स्कूल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री जी उपस्थित रहीं। प्रारंभ में 180 से अधिक सेविकाओं ने गणवेश में पथ संचलन में भाग लिया। मार्ग में समाज जनों ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से देखा कि कोई संस्था अपने कार्यकर्ताओं का निर्माण किस प्रकार करती है। उन्होंने समझाया कि हम किसी घटना से इन्फ्लुएंस हो रहे हैं या इंस्पायर – यह अंतर समझना आवश्यक है, तथा सोशल मीडिया हमें किस प्रकार प्रभावित करता है, यह अपने अनुभव के माध्यम से बताया। उन्होंने युवाओं को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनने का आह्वान किया।

प्रमुख कार्यवाहिका ने कहा कि संघ की प्रेरणा से अनेक व्यक्ति और संस्थाएँ किस प्रकार परिवर्तित हुई हैं और हो रही हैं, यह हम आज समाज में देख सकते हैं। उन्होंने स्मरण कराया कि तेलंगाना क्षेत्र में 1968 में प्रथम शाखा प्रारंभ हुई थी तथा 1980 में वे स्वयं यहाँ शाखा में गई थीं।

उन्होंने कहा कि हमारे सनातन धर्म में पर्वों का विशेष स्थान है। पर्वों के समय देवालय से भगवान की शोभायात्रा निकालकर पुरवीथियों में स्वागत किया जाता है, जिससे सभी को भगवान के दर्शन हों। जो लोग प्रतिदिन शाखा जाकर भगवाध्वज के दर्शन नहीं कर पाते, उनके लिए आज के पथसंचलन में भगवाध्वज स्वयं पुरवीथियों में भ्रमण कर सबको दर्शन दे रहा है।

डॉ. हेडगेवार जी द्वारा संघ स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संकल्प व्यक्ति निर्माण के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन देखने का था। उन्होंने कहा कि भारत पर अनेक आक्रमण हुए, स्वतंत्रता के पहले भी और बाद में भी, फिर भी मातृशक्ति निरंतर कार्य करती रही। 1936 में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य महिलाओं में निहित शक्ति को जाग्रत करते हुए व्यक्ति निर्माण करना था।

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त पंच परिवर्तन की अवधारणा का उल्लेख किया गया – पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य। संक्रांति का अर्थ सम्यक् क्रांति बताते हुए कहा कि हम अपने जीवन में नई कांति और नवीनता ला रहे हैं, इसी भाव से तिल-गुड़ मिलाकर सब मिलकर बाँटते हैं।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान में 18 से 20 वर्ष आयु के युवा केवल करियर पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इस करियर की चिंता में माता-पिता भी बह रहे हैं। कई माताएँ यह वेदना प्रकट करती हैं कि उनके बच्चे उनकी बात नहीं सुनते। आज की कुटुंब व्यवस्था में अनावश्यक बातें प्रवेश कर रही हैं, जिससे मनुष्य पास होते हुए भी मन से दूर हो रहे हैं। इस संदर्भ में भगवद्गीता का स्मरण कराते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने स्त्री में स्थित कीर्ति, श्री, क्षमा, वाणी आदि सप्तशक्तियों को स्वयं बताया है। यदि हम समन्वय और संतुलन बना लें तो हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्त्री में निहित सुप्त शक्ति को जाग्रत करने हेतु राष्ट्र सेविका समिति 90 वर्षों से कार्य कर रही है। आने वाली पीढ़ी को हानि पहुँचाने वाले कार्य न करने का आह्वान किया। प्रेम और संवेदनशीलता के साथ समाज में परिवर्तन लाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

 

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