सिर्फ़ एक बात पर

सिर्फ़ एक बात पर

सिर्फ़ एक बात पर

सिर्फ़ एक बात पर

मुस्कुराती आँखों

के लिए मुश्किल होता है 

सच को देख पाना। 

कि आँसुओं के पार ही दिखते हैं

सात रंग अपनी असली शक्ल में।

 कभी-कभी मैं सोचता हूँ

कि तुम लौटा दो मेरा पासा

और चला जाऊँ उठकर।

 कि इस प्रेम वाली बिसात पर

दर्द वाले खाने कुछ ज्यादा हैं।