पंढरपुर पालकी – ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ के जयघोष से गुंजायमान पुण्यनगरी; आज पुणे में ही होगा संतों का विश्राम
पुणे, १० जुलाई २०२६। ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ और ‘विठ्ठळ विठ्ठळ जय हरी विठ्ठल’ के अनंत जयघोष, मंजीरों की थाप और मृदंग की थाप पर उमड़े भक्ति के महासागर के साथ संत शिरोमणि ज्ञानेश्वर माउली और जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पावन पालकियों का कल (गुरुवार, ९ जुलाई) शाम अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धापूर्ण वातावरण में पुण्यनगरी (पुणे) में […] The post पंढरपुर पालकी – ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ के जयघोष से गुंजायमान पुण्यनगरी; आज पुणे में ही होगा संतों का विश्राम appeared first on VSK Bharat.
पुणे, १० जुलाई २०२६।
‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ और ‘विठ्ठळ विठ्ठळ जय हरी विठ्ठल’ के अनंत जयघोष, मंजीरों की थाप और मृदंग की थाप पर उमड़े भक्ति के महासागर के साथ संत शिरोमणि ज्ञानेश्वर माउली और जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पावन पालकियों का कल (गुरुवार, ९ जुलाई) शाम अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धापूर्ण वातावरण में पुण्यनगरी (पुणे) में आगमन हुआ। लाखों वारकरियों (श्रद्धालुओं) की उपस्थिति से संपूर्ण पुणे नगरी विठ्ठळ नाम के जयकारे से गूंज उठी। दोनों पालकियों का आज (शुक्रवार) पुणे में ही पड़ाव है। शनिवार, ११ जुलाई की भोर में पालकियां पंढरपूर धाम के लिए प्रस्थान करेंगी।
संगमवाड़ी में भक्ति का अलौकिक संगम
जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पालकी पिंपरी-चिंचवड़ से और संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी आलंदी से पुणे की ओर बढ़ रही थी। कल शाम ४ से ५ बजे के बीच संगमवाड़ी और पाटिल एस्टेट क्षेत्र में दोनों पालकियों का एक साथ आगमन हुआ। इस अवसर पर पुणे महानगरपालिका और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा पालकी यात्रा का भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया गया। लाखों वैष्णवों पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। संतों के स्वागत के लिए नगर के प्रमुख मार्गों को सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया था और स्थान-स्थान पर भव्य रंगोलियां बनाई गई थीं।
पुण्यनगरी में प्रवेश के उपरांत दोनों पालकियां अपने-अपने पारंपरिक विश्राम स्थलों की ओर बढ़ीं –
– संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी : भवानी पेठ स्थित पालकी विठोबा मंदिर में मुकाम के लिए प्रतिष्ठित हुई।
– संत तुकाराम महाराज पालकी : नाना पेठ स्थित निवडुंगा विठोबा मंदिर में मुकाम के लिए प्रतिष्ठित हुई।
कल रात्रि ८:३० से ९:०० बजे के बीच दोनों मंदिरों में माउळी और तुकोबा की पावन पादुकाओं का विधिवत पूजन और महाआरती संपन्न हुई। इसके पश्चात, हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए रात्रि से ही कतारों में खड़े होकर संतों के दर्शन लाभ ले रहे हैं।
सनातन संस्कृति के अनुरूप वारकरियों की सेवा के लिए पुणे के नागरिक सदैव की भांति इस वर्ष भी अग्रणी रहे। नगर में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क अन्नदान (महाप्रसाद), चिकित्सा शिविर, स्वल्पाहार और विश्राम की उत्तम व्यवस्था की गई थी। अनेक सोसाइटियों और स्थानीय परिवारों ने वारकरियों को अपने घरों में आश्रय देकर पुणे की समृद्ध सेवा परंपरा और ‘अतिथि देवो भव’ के संस्कार को जीवंत किया।
आज दिनभर दर्शन; कल भोर में प्रस्थान
आज १० जुलाई (शुक्रवार) को दोनों पालकियों का पड़ाव पुणे में ही रहेगा। आज दिनभर पुणे और आस-पास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को दोनों पवित्र पालकियों के दर्शन का अनुपम अवसर मिल रहा है। नगर में विभिन्न स्थानों पर भजन, कीर्तन और भारुड (लोक-आध्यात्मिक गीत) के आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
पुणे में दो दिनों का आतिथ्य स्वीकार करने के पश्चात, कल ११ जुलाई (शनिवार) को भोर ५:०० बजे दोनों पालकी यात्राएं अपनी आगे की यात्रा के लिए पंढरपुर की ओर प्रस्थान करेंगी। संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी हडपसर मार्ग से होते हुए सुप्रसिद्ध दिवे घाट की ओर बढ़ेगी, जबकि संत तुकाराम महाराज की पालकी सोलापुर मार्ग से आगे प्रस्थान करेगी।
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