कोई भी हिंदुओं की चिंता तभी करेगा जब वह काफी मजबूत होंगे : मोहन भागवत जी
संघ प्रमुख ने कहा- अब दुनिया को एक 'धार्मिक' क्रांति की आवश्यकता, इतनी सैन्य और आर्थिक ताकत हो कि अविजित रहे भारत : भागवत, Anyone will care about Hindus only when they are strong enough
इतनी सैन्य और आर्थिक ताकत हो कि अविजित रहे भारत : भागवत
हिंदू समाज को मजबूत करने का काम अधूरा भागवत ने कहा कि कोई भी हिंदुओं की चिंता तभी करेगा जब हिंदू पर्याप्त रूप से मजबूत होंगे। जैसे हिंदू समाज और भारत एक-दूसरे से जुड़े हुए है, हिंदू समाज की महिमा भारत को महिमा प्रदान करेंगी। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को मजबूत करने के लिए काम चल रहा है, लेकिन यह अभी पूरा नहीं हुआ है। धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से वह स्थिति विकसित हो रही है। इस बार, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ जो आक्रोश व्यक्त किया गया है, वह अभूतपूर्व है। यहां तक कि स्थानीय हिंदू (बांग्लादेश में) अब कहते हैं, 'हम नहीं भागेंगे। हम रहेंगे और अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।
अगले 25 वर्षों के लिए संघ का संकल्प उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की "आंतरिक शक्ति बढ़ रही है। दुनिया में जहां भी हिंदू है, अंतरराष्ट्रीय मानदडों का पालन करते हुए हम उनके लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। संघ इसी के लिए अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि पूरे हिंदू समाज को एकजुट करना और भारत को महिमा के शिखर पर ले जाना ही अगले 25 वर्षों के लिए संघ का संकल्प है। हिंदू समाज को अब जागरूक होना चाहिए। विभाजन व स्वार्थ को भुलाते हुए हमे अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और पेशेवर जीवन को हिंदुत्व में निहित 'धार्मिक' मूल्यों के आधार पर आकार देना चाहिए। यह एक शक्तिशाली, धर्मनिष्ठ और आत्मनिर्भर भारत के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
कहा-कोई भी हिंदुओं की चिंता तभी करेगा जब वह काफी मजबूत होंगे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज में एकता का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को इतनी सैन्य शक्ति और आर्थिक ताकत हासिल करनी चाहिए कि इसे "कभी भी" "कई शक्तियों के एक साथ आने" पर भी "विजित" नहीं किया जा सके। उन्होंने कहा, "कृषि, औद्योगिक और वैज्ञानिक क्रांतियां समाप्त हो चुकी हैं। अब दुनिया को एक 'धार्मिक' क्रांति की आवश्यकता है। मानव जीवन को सत्य, पवित्रता, करुणा और संयम के आधार पर पुनर्गठित करना जरूरी है। दुनिया को इसकी जरूरत है, भारत को अनिवार्य रूप से यह मार्ग दिखाना है।"
भागवत ने संघ की साप्ताहिक पत्रिका 'आर्गनाइजर' में प्रकाशित साक्षात्कार में कहा कि भारत के पास शक्तिशाली बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है
क्योंकि यह "दुष्ट शक्तियों की बुराइयों" का सामना कर रहा है जो सभी सीमाओं पर सक्रिय हैं। हमें शक्ति के लिए प्रयास करना चाहिए। जैसे हम दैनिक प्रार्थना करते हैं- 'अजय्यम च विश्वास्य देहिस शक्ति' (हमें ऐसी शक्ति दें कि हम वैश्विक स्तर पर अजेय रहें)।" भागवत ने कहा कि भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। हमें अपनी रक्षा करने में सक्षम होना चाहिए। कोई भी हमें विजित नहीं कर सकता, यहां तक कि कई शक्तियों के एक साथ आने पर भी।" संघ प्रमुख ने कहा, "दुनिया में ऐसी दुष्ट शक्तियों हैं जो स्वभाव से आक्रामक हैं। हमारे पास शक्तिशाली बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, "शक्ति को धर्म के साथ मिलाना चाहिए। हमें सद्गुण और शक्ति दोनों की पूजा करनी चाहिए। अच्छे की रक्षा और बुरे का विनाश करने के लिए हमारे पास शक्ति होनी चाहिए।"