संत रविदास जी का चिंतन पहले से कहीं अधिक आज प्रासंगिक है

संत रविदास जी  भारतीय समाज में समता, मानव गरिमा, श्रम की प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक चेतना के महान प्रवक्ता हैं… अजमेर। संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राजीव गांधी सभागार, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, में आयोजित समारोह में प्रख्यात चिंतक एवं लेखक तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष हनुमान सिंह […] The post संत रविदास जी का चिंतन पहले से कहीं अधिक आज प्रासंगिक है appeared first on VSK Bharat.

Jul 24, 2026 - 17:18
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संत रविदास जी का चिंतन पहले से कहीं अधिक आज प्रासंगिक है

संत रविदास जी  भारतीय समाज में समता, मानव गरिमा, श्रम की प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक चेतना के महान प्रवक्ता हैं…

अजमेर। संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राजीव गांधी सभागार, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, में आयोजित समारोह में प्रख्यात चिंतक एवं लेखक तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ द्वारा लिखित पुस्तक ‘संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी’ का लोकार्पण हुआ।

हनुमान सिंह राठौड़ जी ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास केवल एक संत या भक्त कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज में समता, मानव गरिमा, श्रम की प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक चेतना के महान प्रवक्ता हैं। आज जब समाज अनेक प्रकार की विषमताओं और मूल्य-संकटों का सामना कर रहा है, तब संत रविदास का चिंतन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो उठता है। उनका संदेश मनुष्य को जाति, वर्ग और बाह्य आडंबरों से ऊपर उठकर प्रेम, करुणा, सेवा, समरसता और आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल संत रविदास के जीवन-वृत्त का परिचय नहीं है, बल्कि उनकी वाणी, भक्ति-दर्शन, सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चिंतन तथा समकालीन संदर्भों में उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता का प्रामाणिक एवं सरल विश्लेषण प्रस्तुत करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों, साहित्यकारों तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि शैक्षिक फाउंडेशन द्वारा समय समय पर विभिन्न राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व की पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है।

विशिष्ट अतिथि शैक्षिक फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने संत रविदास के समतामूलक चिंतन, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक चेतना के विस्तार पर विचार व्यक्त किए। हनुमान सिंह राठौड़ ने राष्ट्रीय चिंतन, भारतीय संस्कृति, शिक्षा तथा सामाजिक सरोकारों पर आधारित बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिनका प्रकाशन शैक्षिक फाउंडेशन द्वारा किया गया है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती और संत शिरोमणि श्री रैदास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। डॉ. संगीता पांचाल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का संचालन ‘शैक्षिक मंथन’ के संपादक प्रो. शिव शरण कौशिक ने किया। समारोह का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

इस अवसर पर गणमान्य नागरिक, शिक्षक, साहित्यकार, शोधार्थी तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

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