सिख दंगा-सज्जन की सजा का ऐलान टला:पीड़ित पक्ष ने फांसी मांगी, 21 फरवरी को सुनवाई; पिता-पुत्र की हत्या में दोषी हैं

1984 सिख दंगा के एक केस में सज्जन कुमार को आज दिल्ली की राउज एवेन्ययू कोर्ट में सजा सुनाई जानी थी, जो टाल दी गई। यह मामला दिल्ली के सरस्वती विहार में 2 सिखों की हत्या से जुड़ा है। दरअसल आज सजा के ऐलान से पहले पीड़ित पक्ष ने सज्जन को फांसी की सजा देने की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने सजा नहीं सुनाई, अब इस केस की सुनवाई 21 फरवरी को होगी। 41 साल पहले हुए सिख दंगों के दौरान सरस्वती विहार में 2 सिखों की हत्या से जुड़ा है। 6 दिन पहले 12 फरवरी को कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था और कहा था कि सजा का ऐलान 18 फरवरी को किया जाएगा। वकील ने निर्भया केस का हवाला दिया बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि निर्भया केस की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए, इस मामले में सजा-ए-मौत दी जाए। वकील ने कोर्ट में लिखित में अपना हलफनामा पेश किया। सज्जन को एक और केस में पहले ही उम्रकैद दिल्ली दंगों में सज्जन के खिलाफ 3 से ज्यादा केस चल रहे हैं। एक में वे बरी हो चुके हैं। दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उन्हें हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल सज्जन तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं। सज्जन कुमार के खिलाफ दंगा, हत्या और डकैती के आरोप में IPC की धारा 147, 149, 148, 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436, 440 के तहत केस दर्ज किया गया था। 1984 में हत्या, 2021 में आरोप तय, 2025 में फैसला... सरस्वती विहार की कहानी 1 नवंबर 1984: सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी। पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 16 दिसंबर 2021: पुलिस जांच को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सज्जन के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस दौरान पीड़ित के वकील ने दलील दी थी, "वकील ने कहा था, "बड़ी भीड़ खतरनाक हथियार लेकर सरस्वती विहार में घुसी। उन्होंने लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी। वे सिखों की प्रॉपर्टीज पर हमला कर रहे थे। वे इंदिरा गांधी की हत्या का बदला ले रहे थे। भीड़ ने जसवंत के घर हमला किया, उसकी और बेटे की हत्या कर दी। लूटपाट के बाद घर में आग लगा दी। 12 फरवरी 2025: स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाया- इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सज्जन कुमार न केवल भीड़ में शामिल थे, बल्कि भीड़ की अगुआई भी कर रहे थे। पहले तीन बार टल चुका है फैसला 31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला टाल दिया था। इससे पहले 8 जनवरी और 16 दिसंबर 2024 को भी फैसला टाला गया था। दोनों बार विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की कोर्ट में तिहाड़ में बंद सज्जन कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुआ था। दिसंबर 2021 को सज्जन कुमार ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी। ट्रायल में सज्जन कुमार को दोषी माना गया था। इसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। सुल्तानपुरी दंगा केस में बरी, लेकिन 5 सिखों की हत्या मामले में दोषी 1984 सिख विरोधी दंगा: कब-क्या हुआ... ................................... सिख विरोधी दंगे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... तापसी के पिता को मारने दंगाई घर तक पहुंचे थे, घर के बाहर खड़ी कार को फूंक दिया था तापसी पन्नू ने एक इंटरव्यू में 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान अपनी फैमिली के बुरे अनुभव को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा कि जब ये दंगा हुआ था तो वो पैदा भी नहीं हुई थीं। उनकी मां बताती हैं कि उनके घर को दंगाइयों ने चारों तरफ से घेर लिया था। दंगाई उनके घर के सामने तलवारें, पेट्रोल बम लेकर आए थे। पूरी खबर पढ़ें...

Feb 18, 2025 - 12:37
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सिख दंगा-सज्जन की सजा का ऐलान टला:पीड़ित पक्ष ने फांसी मांगी, 21 फरवरी को सुनवाई; पिता-पुत्र की हत्या में दोषी हैं
1984 सिख दंगा के एक केस में सज्जन कुमार को आज दिल्ली की राउज एवेन्ययू कोर्ट में सजा सुनाई जानी थी, जो टाल दी गई। यह मामला दिल्ली के सरस्वती विहार में 2 सिखों की हत्या से जुड़ा है। दरअसल आज सजा के ऐलान से पहले पीड़ित पक्ष ने सज्जन को फांसी की सजा देने की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने सजा नहीं सुनाई, अब इस केस की सुनवाई 21 फरवरी को होगी। 41 साल पहले हुए सिख दंगों के दौरान सरस्वती विहार में 2 सिखों की हत्या से जुड़ा है। 6 दिन पहले 12 फरवरी को कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था और कहा था कि सजा का ऐलान 18 फरवरी को किया जाएगा। वकील ने निर्भया केस का हवाला दिया बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि निर्भया केस की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए, इस मामले में सजा-ए-मौत दी जाए। वकील ने कोर्ट में लिखित में अपना हलफनामा पेश किया। सज्जन को एक और केस में पहले ही उम्रकैद दिल्ली दंगों में सज्जन के खिलाफ 3 से ज्यादा केस चल रहे हैं। एक में वे बरी हो चुके हैं। दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उन्हें हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फिलहाल सज्जन तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं। सज्जन कुमार के खिलाफ दंगा, हत्या और डकैती के आरोप में IPC की धारा 147, 149, 148, 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436, 440 के तहत केस दर्ज किया गया था। 1984 में हत्या, 2021 में आरोप तय, 2025 में फैसला... सरस्वती विहार की कहानी 1 नवंबर 1984: सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी। पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 16 दिसंबर 2021: पुलिस जांच को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सज्जन के खिलाफ आरोप तय किए थे। इस दौरान पीड़ित के वकील ने दलील दी थी, "वकील ने कहा था, "बड़ी भीड़ खतरनाक हथियार लेकर सरस्वती विहार में घुसी। उन्होंने लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी। वे सिखों की प्रॉपर्टीज पर हमला कर रहे थे। वे इंदिरा गांधी की हत्या का बदला ले रहे थे। भीड़ ने जसवंत के घर हमला किया, उसकी और बेटे की हत्या कर दी। लूटपाट के बाद घर में आग लगा दी। 12 फरवरी 2025: स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाया- इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सज्जन कुमार न केवल भीड़ में शामिल थे, बल्कि भीड़ की अगुआई भी कर रहे थे। पहले तीन बार टल चुका है फैसला 31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला टाल दिया था। इससे पहले 8 जनवरी और 16 दिसंबर 2024 को भी फैसला टाला गया था। दोनों बार विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की कोर्ट में तिहाड़ में बंद सज्जन कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुआ था। दिसंबर 2021 को सज्जन कुमार ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी। ट्रायल में सज्जन कुमार को दोषी माना गया था। इसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। सुल्तानपुरी दंगा केस में बरी, लेकिन 5 सिखों की हत्या मामले में दोषी 1984 सिख विरोधी दंगा: कब-क्या हुआ... ................................... सिख विरोधी दंगे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... तापसी के पिता को मारने दंगाई घर तक पहुंचे थे, घर के बाहर खड़ी कार को फूंक दिया था तापसी पन्नू ने एक इंटरव्यू में 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान अपनी फैमिली के बुरे अनुभव को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा कि जब ये दंगा हुआ था तो वो पैदा भी नहीं हुई थीं। उनकी मां बताती हैं कि उनके घर को दंगाइयों ने चारों तरफ से घेर लिया था। दंगाई उनके घर के सामने तलवारें, पेट्रोल बम लेकर आए थे। पूरी खबर पढ़ें...

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