देशहित किसी का एकाधिकार नहीं, हम सबका सामूहिक उत्तरदायित्व है – डॉ. मोहन भागवत जी
राजकोट, 20 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राजकोट में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में सौराष्ट्र-कच्छ के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद किया। सेवा भारती भवन में आयोजित गोष्ठी में सरसंघचालक जी ने कहा कि देशहित पर किसी का एकाधिकार (monopoly) नहीं हो सकता। […] The post देशहित किसी का एकाधिकार नहीं, हम सबका सामूहिक उत्तरदायित्व है – डॉ. मोहन भागवत जी appeared first on VSK Bharat.
राजकोट, 20 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राजकोट में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में सौराष्ट्र-कच्छ के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद किया। सेवा भारती भवन में आयोजित गोष्ठी में सरसंघचालक जी ने कहा कि देशहित पर किसी का एकाधिकार (monopoly) नहीं हो सकता। यह हम सबका सामूहिक उत्तरदायित्व है और संघ ऐसे कार्य करने वाले सभी लोगों के साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि अनेक उपेक्षाओं, विरोधों और प्रतिबंधों के बावजूद संघ आज जिस ऊंचाई पर पहुँचा है, वह हिन्दू समाज के आशीर्वाद का ही परिणाम है। जो लोग देशहित में काम कर रहे हैं, चाहे वे संघ से जुड़े हों या नहीं, संघ उन्हें अपना स्वयंसेवक ही मानता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी को ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित नहीं करता। संघ का कार्य शुद्ध सात्विक प्रेम और आत्मीयता पर आधारित है। शाखा के माध्यम से संस्कार देकर स्वयंसेवक तैयार किए जाते हैं, जो आगे चलकर अपने विवेक से समाज हित में निर्णय लेते हैं।
हिन्दुत्व की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति है। जिस विचार से भारत का संविधान बना है, संघ उसी पद्धति से कार्य करता है। भारत एक ‘हिन्दू राष्ट्र’ है और यही कारण है कि यहाँ सभी पंथों और संप्रदायों का स्वागत किया जाता है।
सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना ही सच्चा ग्लोबलाइजेशन है। अन्य देशों का विचार दुनिया को एक बाजार (Market) बनाना है, जबकि हम दुनिया को एक परिवार मानते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में सरसंघचालक जी ने कहा कि जेन-जी (Gen-Z), ये युवा ‘कोरी स्लेट’ की तरह और बहुत ईमानदार हैं। उनसे संवाद करने की कला विकसित करनी होगी। हमें सोशल मीडिया का मालिक बनना चाहिए, उसे अपना मालिक नहीं बनने देना चाहिए। इसका उपयोग देशहित में हो।
पड़ोसी देश में हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्य के विचार को फिर से हवा दी जा रही है। यह विभाजनकारी विचार भारत में न फैले, इसके लिए सामाजिक जागरूकता आवश्यक है। भ्रष्टाचार व्यवस्था से ज्यादा मनुष्य के मन में है। जब व्यक्ति संस्कारित होगा, तभी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
ईको-फ्रेंडली पहल
राजकोट में आयोजित सभी कार्यक्रम ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ मुक्त रहे। इस दौरान विशेष ईको-फ्रेंडली पेन का उपयोग किया गया, जिसे इस्तेमाल के बाद यदि गमले में रोप दिया जाए, तो वह मिट्टी में मिल जाता है और उसमें से पौधा उगता है।
कार्यक्रम में पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाड़ेसिया, सौराष्ट्र प्रांत संघचालक मुकेशभाई मलकाण सहित उद्योगपति, डॉक्टर, वकील और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
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