किताबों में झुके हुए सिर, ज़िंदगी भर उठे रहते हैं,
किताबों में झुके हुए सिर, ज़िंदगी भर उठे रहते हैं,
किताबों में झुके हुए सिर
ज़िंदगी भर उठे रहते हैं,
ज्ञान के प्रकाश में डूबे रहते हैं।
हर शब्द, हर पंक्ति उनके भीतर
एक नई सोच का बीज बोती है।
शिक्षा का यह सफर आसान नहीं,
कभी असफलताओं की धूप,
तो कभी उम्मीदों की ठंडी छाँव मिलती है।
लेकिन जो सिर किताबों में झुका रहता है,
वही आगे चलकर दुनिया को दिशा देता है।
रातों की नींद कुर्बान करके,
सपनों को आकार देने वाले ये सिर
एक दिन सफलता की ऊँचाइयों पर होते हैं।
कलम की स्याही से लिखी मेहनत
हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज होती है।
संघर्षों से भरी यह यात्रा
सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं होती,
बल्कि सोच को नया आयाम देती है।
ज्ञान की रोशनी से जगमगाने वाले ये सिर
सिर्फ खुद का ही नहीं,
बल्कि पूरे समाज का भविष्य सँवारते हैं।