ओडिशा – 30 जनजाति परिवारों के 151 लोगों ने की सनातन में वापसी

भुवनेश्वर। जनजाति बहुल जिले मयुरभंज के ठाकुरमुंडा प्रखंड में ईसाइयत में मतांतरित हुए 30 जनजाति परिवारों के 151 पुरुष व महिलाओं ने स्व-धर्म सनातन में वापसी की। घर वापसी करने वाले लोगों में संथाल, हो व गोंड जनजाति के लोग शामिल हैं। ये लोग मिशनरियों के बहकावे में आकर ईसाई बन गए थे, अब पारंपरिक […] The post ओडिशा – 30 जनजाति परिवारों के 151 लोगों ने की सनातन में वापसी appeared first on VSK Bharat.

Jan 8, 2026 - 20:39
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ओडिशा – 30 जनजाति परिवारों के 151 लोगों ने की सनातन में वापसी

भुवनेश्वर। जनजाति बहुल जिले मयुरभंज के ठाकुरमुंडा प्रखंड में ईसाइयत में मतांतरित हुए 30 जनजाति परिवारों के 151 पुरुष व महिलाओं ने स्व-धर्म सनातन में वापसी की। घर वापसी करने वाले लोगों में संथाल, हो व गोंड जनजाति के लोग शामिल हैं। ये लोग मिशनरियों के बहकावे में आकर ईसाई बन गए थे, अब पारंपरिक रीति नीति के साथ स्वधर्म में वापसी की। कार्यक्रम में उपस्थित जनजाति समाज के अन्य लोगों ने घर वापसी करने वालों का स्वागत किया। रविवार 4 जनवरी को आयोजित घर वापसी कार्यक्रम में सैकड़ों पुरुष और महिलाएं शामिल हुए।

घर वापसी करने वाले परिवारों के सदस्यों ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व पादरियों के बहकावे में आकर अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं से दूर हो गए थे। उस समय पादरियों द्वारा स्वास्थ्य को लेकर किए गए भ्रामक दावों के कारण उन्होंने कनवर्जन का निर्णय लिया था। परिवार के कुछ सदस्य जब गंभीर रूप से अस्वस्थ थे, तब पादरियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि ईसाई धर्म अपनाने से उनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी। इसी झांसे में आकर उन्होंने मतांतरण कर लिया।

हालांकि, मतांतरण के बाद उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक अलगाव का सामना करना पड़ा। वे अपने समाज से कट गए और अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग नहीं ले पा रहे थे। धीरे-धीरे उन्हें यह महसूस होने लगा कि वे अपनी ही जड़ों और अपने ही लोगों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे मानसिक असंतोष और पीड़ा बढ़ती चली गई।

घर वापसी करने वाले प्रमुख व्यक्ति बंशीधर कालुंडिया ने बताया कि इस दौरान वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यकर्ताओं ने उनसे लगातार संवाद बनाए रखा। कार्यकर्ताओं ने उन्हें समझाया कि स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कनवर्जन में नहीं, बल्कि उचित उपचार और जागरूकता में है। कनवर्जन के नाम पर लोगों को उनके पूर्वजों की संस्कृति से काटना एक साजिश है। इसके बाद उन्हें वास्तविकता का बोध हुआ और उन्होंने घर वापसी का निर्णय लिया। अपने मूल धर्म और संस्कृति में लौटकर संतोष महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय कार्यकर्ता शिव प्रसाद हेम्ब्रम ने बताया कि राज्य में गैर कानूनी तरीके से कनवर्जन पर रोक लगाने के लिए कानून बना हुआ है। लेकिन इस कानून का सही रूप से अनुपालन नहीं हो रहा है। यही कारण है कि मिशनरियां जनजातीय लोगों को विभिन्न प्रकार का झांसा देकर कनवर्ट कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि राज्य में कनवर्जन को रोकने के लिए जो कानून है, उसे सख्ती से लागू करे ताकि जनजातीय समुदाय के लोगों को अपने पूर्वजों की संस्कृति से उखाड़ने का जो प्रयास हो रहा, वह सफल न हो।

घर वापसी करने के बाद इन लोगों का जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से स्वागत किया गया। यह कार्यक्रम मयूरभंज जिले के ठाकुरमुंडा ब्लॉक अंतर्गत बागदफा, जामनांडा और डंगाडिहा गांवों में आयोजित किया गया। हो जनजाति के धर्मगुरु मानाय पूर्ति ने इस अवसर पर आशीर्वचन प्रदान किया।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने घर वापसी करने वाले परिवारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत के महापुरुषों जैसे स्वामी विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक कनवर्जन के खिलाफ थे। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि कुछ शक्तियां विभिन्न उपायों से भोले-भाले वनवासियों का कनवर्जन कराने के प्रयास में लगे हुए हैं तथा उनके पूर्वजों की संस्कृति से काट रहे हैं। इससे वनवासी समाज को सचेत रहने की आवश्यकता है।

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