मतांतरण से व्यक्ति अपनी जड़ से कट जाता है: डॉ. मोहन भागवत
डॉ. भागवत शनिवार को हरियाणा के पानीपत के समालखा स्थित सेवा, साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में आयोजित वनवासी कल्याण आश्रम के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में बोल रहे थे। अधिवेशन के दूसरे दिन उन्होंने वनवासी समाज की पूजा पद्धतियों का अवलोकन किया।
मतांतरण से व्यक्ति अपनी जड़ से कट जाता है: डॉ. मोहन भागवत
पानीपत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मतांतरण से व्यक्ति अपनी जड़ से कट जाता है, जिससे उसका असली स्वत्व और अस्तित्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा, "जड़ से ही रस प्राप्त होता है और जड़ कट जाने पर पूरा मूल ही नष्ट हो जाता है।" डॉ. भागवत शनिवार को हरियाणा के पानीपत के समालखा स्थित सेवा, साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में आयोजित वनवासी कल्याण आश्रम के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में बोल रहे थे। अधिवेशन के दूसरे दिन उन्होंने वनवासी समाज की पूजा पद्धतियों का अवलोकन किया।
डॉ. भागवत ने कहा, "हम कौन हैं और हमारा स्वत्व क्या है, यह जानना बेहद आवश्यक है। भारत की अखंडता और एकता की पहचान उसकी विविधताओं में निहित है। देश के प्रांत भले ही अपनी भाषा, खान-पान, और देवी-देवताओं में भिन्न हों, लेकिन हमारी आत्मा और एकता एक ही है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत से कोई प्रांत अलग होकर सुखी नहीं रह सकता। वनवासी समाज ने देश की संस्कृति और सुरक्षा में हमेशा योगदान दिया है। चाहे भगवान राम का वनवास हो, या महाराणा प्रताप और शिवाजी का संघर्ष, वनवासी समाज ने हमेशा साथ दिया है।
कार्यक्रम में भागवत ने वनवासी समाज की 80 प्रकार की पूजा पद्धतियों का अवलोकन करते हुए कहा कि ये पद्धतियां भारत की एकता का मूलभूत दर्शन कराती हैं। उन्होंने वनवासी समाज के स्वत्व और अस्मिता की रक्षा पर बल दिया और उनके योगदान को सराहा। इस अधिवेशन में देश के विभिन्न प्रांतों से दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिसमें झारखंड सहित अन्य राज्यों के कार्यकर्ता शामिल थे।