Kodandera Madappa आजाद भारत के पहले फील्ड मार्शल थे केएम करियप्पा,
28 जनवरी 1925 भारत के परमाणु वैज्ञानिक पद्मभूषण राजा रमन्ना जयन्ती
28 जनवरी 1899 भारतीय सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल जनरल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा जयन्ती
- करियप्पा को 15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल बनाया गया और वे भारतीय सेना के पहले फाइव स्टार रैंक के अधिकारी थे।
- उन्होंने सेना के कमांडर इन चीफ के रूप में भारत की सेना का कमांड संभाला और उनके प्रमुखत्व में भारत ने पहले सेना प्रमुख की पदभार संबोधित की।
- करियप्पा ने भारतीय-ब्रिटिश फौज में सेकेंड लेफ्टिनेंट के रूप में नौकरी की शुरुआत की और फिर भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर सेवाएं दी।
- उन्होंने 1986 में फील्ड मार्शल का पद प्राप्त किया और उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले।
- करियप्पा ने भारतीय सेना के साथ सेवा के बाद भी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में राजदूत के रूप में भी कार्य किया।
- उनके बेटे केसी नंदा करियप्पा ने भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के गिरफ्तार होने के बाद बड़ी संवादशीलता के साथ छोड़ा जाना।
- करियप्पा ने सेना दिवस को 15 जनवरी को मनाने का पर्व किया, जो भारत में हर साल मनाया जाता है।
- उन्होंने देशभक्ति और सेना के प्रति अपनी अद्वितीय सेवा के लिए सम्मानित किया गया और उन्हें भारतीय सेना के एक महान नेता के रूप में याद किया जाता है।
- उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी देश के लिए अपना समर्पण बनाए रखा और नवाजे जाने वाले अंग्रेजी ऑर्डर्स और सम्मानों से सम्मानित किया गया।
- केएम करियप्पा का योगदान भारतीय सेना और देश के लिए एक उदाहरणपूर्वक सेवा और नेतृत्व का प्रतीक रहा है।
28 जनवरी 1925 भारत के परमाणु वैज्ञानिक पद्मभूषण राजा रमन्ना जयन्ती
- डॉ. राजा रामन्ना भारतीय वैज्ञानिक और भारत के पहले न्यूक्लियर परीक्षण के सूत्रधार थे।
- उन्होंने 18 मई 1974 को भारत के पहले सफल परमाणु परीक्षण कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई थी।
- उनका जन्म 28 जनवरी 1925 को कर्नाटक के टुम्कुर में हुआ था।
- रामन्ना को विज्ञान और संगीत में गहरी रुचि थी, और उन्होंने इंग्लैंड में डॉक्टरेट करने के लिए जाने का निर्णय लिया।
- उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय के किंग्स कॉलेज से परमाणु भौतिकी में पीचएडी किया और इस शाखा में विशेषज्ञता प्राप्त की।
- रामन्ना ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में भौतिकी और रिएक्टर भौतिकी कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाई।
- उन्होंने विभिन्न सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर वर्गीकृत परमाणु हथियार परियोजनाओं पर काम किया।
- 18 मई 1974 को भारतीय न्यूक्लियर परीक्षण के दिन, उन्होंने प्रधानमंत्री को संदेश भेजकर बताया, 'बुद्ध मुस्कराए'।
- उन्हें 1968 में पद्म श्री, 1973 में पद्म भूषण, और 1976 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
- डॉ. राजा रामन्ना का निधन 24 सितंबर 2004 को हुआ था, और उन्हें उनकी पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
28 जनवरी 1926 भारत बोध के साधक मनीषी पद्मभूषण डॉ. विद्यानिवास मिश्र जयन्ती
विद्यानिवास मिश्र एक प्रमुख हिन्दी लेखक और समीक्षक थे जो अपने ललित निबंधों और साहित्यिक योगदानों के लिए प्रसिद्ध थे। उनका जन्म 28 जनवरी, 1926 में पकडडीहा गाँव, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा को इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरा किया और बाद में अनेक स्थानों पर अध्यापन कार्य किया। वह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र अज्ञेय, कबीर, रसखान, रैदास, रहीम और राहुल सांकृत्यायन समेत भारतीय साहित्य के विभिन्न पहलुओं की रचनाओं को संपादित कर उन्हें प्रस्तुत करने का कार्य किया।
उनका योगदान सिर्फ साहित्यिक क्षेत्र में ही नहीं था, बल्कि उन्होंने मीडिया में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1990 के दशक में, विद्यानिवास मिश्र ने 'नवभारत टाइम्स' के संपादक के रूप में कार्य किया और उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को मजबूती प्रदान की। उनके द्वारा संपादित कई साहित्यिक और सामाजिक मुद्दों पर लेख और रिपोर्ट ने हिंदी पत्रकारिता को नए आयाम दिए।
उनके ललित निबंधों में जीवन, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के सौंदर्य का उच्च स्तर पाया जाता है। उन्होंने वसंत ऋतु के माध्यम से भारतीय साहित्य को और भी रिचा और रंगीन बनाया।
विद्यानिवास मिश्र ने मीडिया और साहित्य के माध्यम से अपनी विचारशीलता को प्रस्तुत किया और उनका योगदान साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्रों में अद्भुत रूप से याद किया जाता है।