11 अक्टूबर: इतिहास में आज का दिन – प्रमुख घटनाएँ, जन्म, निधन और महत्वपूर्ण अवसर
11 अक्टूबर: इतिहास में आज का दिन – प्रमुख घटनाएँ, जन्म, निधन और महत्वपूर्ण अवसर,October 11 This day in history major events births deaths and important occasions
11 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1737 - कोलकाता में भीषण चक्रवात
11 अक्टूबर 1737 को कोलकाता में इतिहास का सबसे विनाशकारी चक्रवात आया। इस चक्रवात से करीब 3 लाख लोग मारे गए और शहर में व्यापक तबाही मची। माना जाता है कि इस तूफान ने भारी बारिश और बाढ़ के कारण गंगा नदी के आसपास के क्षेत्रों को तहस-नहस कर दिया। यह भारत में आने वाले सबसे खतरनाक चक्रवातों में से एक था। उस समय मौसम की सही भविष्यवाणी करने की तकनीक नहीं थी, जिससे लोग पहले से सतर्क नहीं हो पाए। इस चक्रवात के प्रभावों ने बाद में बंगाल के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात प्रबंधन की आवश्यकता को उजागर किया।
1869 - थॉमस एडीसन का पहला पेटेंट
महान अमेरिकी वैज्ञानिक और आविष्कारक थॉमस एडीसन ने 11 अक्टूबर 1869 को अपने पहले आविष्कार का पेटेंट फाइल किया। यह एक इलेक्ट्रिक मशीन थी, जिसका उपयोग वोटों की तेज़ और सटीक गिनती के लिए किया जाता था। हालांकि, यह मशीन उस समय अधिक लोकप्रिय नहीं हो सकी क्योंकि चुनाव अधिकारी पारंपरिक तरीकों पर अधिक भरोसा करते थे। बाद में, एडीसन ने कई और आविष्कार किए, जिनमें से इलेक्ट्रिक बल्ब, ग्रामोफोन और मोशन पिक्चर कैमरा सबसे प्रसिद्ध हैं। एडीसन को 1000 से अधिक पेटेंट मिले, और वे आधुनिक तकनीकी विकास के जनक माने जाते हैं।
1881 - रोल फिल्म का पेटेंट
अमेरिकी आविष्कारक डेविड हेंडरसन हॉस्टन ने 11 अक्टूबर 1881 को पहली रोल फिल्म का पेटेंट कराया। इससे पहले कैमरे में ग्लास प्लेट्स का उपयोग किया जाता था, जो भारी और अव्यवहारिक थीं। हॉस्टन के आविष्कार ने फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति ला दी। इस तकनीक को आगे चलकर कोडक कंपनी ने विकसित किया और इसे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया। रोल फिल्म ने फोटोग्राफी को आम जनता के लिए आसान बना दिया और आधुनिक कैमरों की नींव रखी। हॉस्टन के इस आविष्कार से सिनेमा और फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक नई क्रांति आई, जिससे दुनिया के दृश्य दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया सरल और व्यापक हो गई।
1932 - पहला राजनीतिक प्रसारण
11 अक्टूबर 1932 को न्यूयॉर्क में पहली बार राजनीतिक अभियान के लिए रेडियो प्रसारण किया गया। यह उस समय के लिए एक क्रांतिकारी कदम था क्योंकि इससे राजनेताओं को जनता तक सीधे पहुंचने का अवसर मिला। यह प्रसारण अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अभियान का हिस्सा था, जिसमें उम्मीदवारों ने अपने विचार और नीतियां जनता के सामने रखीं। इस माध्यम ने राजनीतिक संचार में एक नया युग शुरू किया और बाद में टेलीविजन और इंटरनेट के माध्यम से प्रचार अभियानों की शुरुआत हुई। आज के समय में डिजिटल मीडिया ने राजनीतिक अभियानों को और भी प्रभावशाली बना दिया है।
1939 - आइंस्टीन का पत्र और परमाणु कार्यक्रम
अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट को 11 अक्टूबर 1939 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने जर्मनी के परमाणु अनुसंधान के बढ़ते खतरे के बारे में चेतावनी दी। इस पत्र में आइंस्टीन और भौतिक विज्ञानी लियो स्ज़िलार्ड ने अमेरिका को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी पत्र के कारण बाद में ‘मैनहट्टन प्रोजेक्ट’ शुरू हुआ, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका को पहला परमाणु बम बनाने में सक्षम बनाया। यह पत्र इतिहास के सबसे प्रभावशाली पत्रों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसके कारण ही परमाणु युग की शुरुआत हुई।
11 अक्टूबर की अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1968 - अपोलो 7 मिशन और पहला टेलीविजन प्रसारण
11 अक्टूबर 1968 को अमेरिका ने अपने पहले मानवयुक्त अपोलो मिशन, अपोलो 7, को प्रक्षेपित किया। इस मिशन की खासियत यह थी कि पहली बार अंतरिक्ष से टेलीविजन प्रसारण किया गया। यह नासा के अपोलो कार्यक्रम के तहत पहला सफल मिशन था, जिसमें अंतरिक्ष यात्री वॉल्टर शिर्रा, डॉन आइज़ले और वाल्टर कनिंघम शामिल थे। अपोलो 7 ने पृथ्वी की कक्षा में दस दिनों तक उड़ान भरी और यह भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस मिशन ने अपोलो 11 के ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग के लिए रास्ता बनाया और अंतरिक्ष विज्ञान में नई तकनीकों की शुरुआत की।
1984 - कैथरीन डी. सुलिवन: अंतरिक्ष में सैर करने वाली पहली महिला
11 अक्टूबर 1984 को अमेरिकी अंतरिक्ष वैज्ञानिक कैथरीन डी. सुलिवन अंतरिक्ष में सैर करने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनीं। वे नासा के स्पेस शटल चैलेंजर (STS-41-G) मिशन पर सवार थीं। अंतरिक्ष में उनकी इस ऐतिहासिक ‘स्पेसवॉक’ ने महिला अंतरिक्ष यात्रियों के लिए नए दरवाजे खोल दिए। सुलिवन ने अंतरिक्ष यान के बाहर 3.5 घंटे बिताए और शटल पर महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य किए। उनके इस योगदान ने भविष्य में महिलाओं के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कीं। वे बाद में समुद्र विज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान से भी जुड़ीं।
1994 - कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
11 अक्टूबर 1994 को अमेरिका में कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विरोधी कानूनों को असंवैधानिक घोषित कर दिया। यह फैसला समलैंगिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। कोलोराडो में एक कानून पारित किया गया था, जो समलैंगिक समुदाय के लोगों को कानूनी सुरक्षा से वंचित करता था, लेकिन इस फैसले ने इसे असंवैधानिक करार दिया। यह निर्णय अमेरिका में LGBTQ+ अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ था और बाद में इसे राष्ट्रीय स्तर पर समानता के लिए बड़े संघर्षों का आधार माना गया।
2000 - हैन्सी क्रोनिए पर आजीवन प्रतिबंध
11 अक्टूबर 2000 को दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड ने अपने पूर्व कप्तान हैन्सी क्रोनिए पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। यह फैसला उनके खिलाफ मैच फिक्सिंग में शामिल होने के आरोप साबित होने के बाद लिया गया। क्रोनिए दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक थे, लेकिन 2000 में सामने आए मैच फिक्सिंग स्कैंडल ने उनके करियर को समाप्त कर दिया। उन्होंने भारतीय सट्टेबाजों के साथ साठगांठ की बात स्वीकार की थी, जिसके कारण क्रिकेट जगत में बड़ी हलचल मच गई। यह घटना क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़े घोटालों में से एक मानी जाती है।
2001 - वी. एस. नॉयपाल को नोबेल साहित्य पुरस्कार
11 अक्टूबर 2001 को भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक विद्याधर सूरज प्रसाद नॉयपाल (V. S. Naipaul) को नोबेल साहित्य पुरस्कार देने की घोषणा की गई। नॉयपाल का जन्म त्रिनिदाद में हुआ था, लेकिन वे बाद में ब्रिटेन में बस गए। उनके लेखन में प्रवासियों के संघर्ष, औपनिवेशिक समाज और भारतीय मूल के लोगों के जीवन को गहराई से दर्शाया गया है। उनकी प्रमुख कृतियों में "A House for Mr. Biswas", "In a Free State", और "Half a Life" शामिल हैं। नोबेल पुरस्कार समिति ने उनके साहित्य को "दमन और अलगाव के अनुभवों को प्रकट करने वाला" बताया।
11 अक्टूबर की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ
2002 - नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र ने लोकेन्द्र बहादुर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया
11 अक्टूबर 2002 को नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र ने लोकेन्द्र बहादुर चंद को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया। इससे पहले, उन्होंने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को बर्खास्त कर दिया था। यह फैसला नेपाल के राजनीतिक संकट के दौरान लिया गया था, जब देश में माओवादी विद्रोह अपने चरम पर था। ज्ञानेन्द्र ने संसद को भी भंग कर दिया, जिससे नेपाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हुई। लोकेन्द्र बहादुर इससे पहले भी नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके थे, लेकिन उनका यह कार्यकाल अस्थायी साबित हुआ और नेपाल की राजनीति अस्थिर बनी रही।
2005 - तीसरे अंतरिक्ष पर्यटक ग्रेगोरी ओल्सन पृथ्वी पर लौटे
11 अक्टूबर 2005 को अमेरिकी व्यवसायी और वैज्ञानिक ग्रेगोरी ओल्सन अंतरिक्ष की यात्रा से वापस पृथ्वी पर लौटे। वह दुनिया के तीसरे अंतरिक्ष पर्यटक बने, जिन्होंने अपनी निजी पूंजी से अंतरिक्ष यात्रा की। उन्होंने रूस के सोयुज TMA-7 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक यात्रा की थी। यह मिशन 10 दिनों तक चला, और उन्होंने अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग भी किए। ओल्सन की यह यात्रा साबित करती है कि अंतरिक्ष पर्यटन एक नई संभावना के रूप में विकसित हो रहा था, जो आने वाले दशकों में और अधिक लोकप्रिय हुआ।
2007 - ब्रिटिश लेखिका डोरिस लैसिंग को नोबेल पुरस्कार मिला
11 अक्टूबर 2007 को ब्रिटिश उपन्यासकार डोरिस लैसिंग को नोबेल साहित्य पुरस्कार के लिए चुना गया। वह साहित्य का नोबेल जीतने वाली सबसे बुजुर्ग महिला बनीं, जब उन्हें 87 वर्ष की आयु में यह सम्मान मिला। उनकी प्रमुख कृतियों में "The Golden Notebook", "The Grass is Singing", और "The Children of Violence" शामिल हैं। उनके लेखन में नारीवाद, उपनिवेशवाद, और सामाजिक असमानता जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया गया। स्वीडिश अकादमी ने उन्हें “महिला अनुभवों की महाकाव्यात्मक लेखिका” करार दिया। उनकी यह उपलब्धि साहित्य जगत के लिए एक प्रेरणादायक क्षण था।
2008 - कश्मीर घाटी में पहली रेलगाड़ी का शुभारंभ
11 अक्टूबर 2008 को भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नौगाँव स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर कश्मीर घाटी में पहली रेलगाड़ी को रवाना किया। यह रेल सेवा बनिहाल-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत शुरू की गई थी। कश्मीर में यह पहली बार था जब रेल यातायात शुरू हुआ, जिससे स्थानीय लोगों को यातायात की नई सुविधा मिली। यह परियोजना भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक कदम था और कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस पहल से कश्मीर के दूरदराज़ इलाकों को बाकी देश से जोड़ने में मदद मिली और क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला।
11 अक्टूबर को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व
जयप्रकाश नारायण (1902 - 1979)
जयप्रकाश नारायण को "लोकनायक" के नाम से जाना जाता है। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता थे। 1970 के दशक में उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे देश में राजनीतिक बदलाव आया और 1977 में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को आत्मसात किया और स्वतंत्रता के बाद समाजवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक बने। उनके योगदान के लिए उन्हें 1979 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
मगन भाई देसाई (1889 - 1969)
मगन भाई देसाई एक प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक और शिक्षाविद थे। वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी रहे और शिक्षा और सामाजिक सुधारों में योगदान दिया। उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली में मूल्यों और स्वदेशी विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया। उनका कार्य आज भी भारतीय शिक्षा और समाज सुधार में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
नानाजी देशमुख (1916 - 2010)
नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख विचारक, समाजसेवी और जनसंघ के नेता थे। वे ग्राम विकास आंदोलन के प्रणेता थे और भारत में ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए कार्य करते रहे। उन्होंने दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना की और शिक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि के क्षेत्र में योगदान दिया। 2019 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
बी. बी. गुरुंग (1929 - 2011)
बी. बी. गुरुंग सिक्किम के तीसरे मुख्यमंत्री थे। वे भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्ती रहे और सिक्किम की विकास नीतियों में योगदान दिया। उनका कार्यकाल भले ही अल्पकालिक रहा, लेकिन उन्होंने सिक्किम की राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद की।
सतीश शर्मा (1947 - 2021)
सतीश शर्मा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री थे। वे राजीव गांधी के करीबी सहयोगी थे और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय संभाल चुके थे। राजनीति में उनके योगदान के कारण वे एक प्रभावशाली नेता माने जाते थे।
मिथलेश चतुर्वेदी (1954 - 2022)
मिथलेश चतुर्वेदी भारतीय फ़िल्म और टेलीविजन अभिनेता थे। उन्होंने "कृष", "गदर: एक प्रेम कथा", "सत्या" जैसी कई हिट फिल्मों में अभिनय किया। वे अपने बेहतरीन संवाद अदायगी और चरित्र भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी अदाकारी को भारतीय सिनेमा में एक खास स्थान मिला।