संभल जिले का इतिहास
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित सम्भल जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यह जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक घटनाओं और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। सम्भल का इतिहास प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक विभिन्न सभ्यताओं, राजवंशों और सांस्कृतिक परिवर्तनों का साक्षी रहा है।
कहा जाता है इस मस्जिद की नीव का पहला पत्थर खुद सम्राट बाबर ने अपने हाथों से रखा था दोस्तों यह है प्राचीन कल की
विष्णु मंदिर जिसके आधार पर संभल को कल की नगरी भी कहा जाता है क्रू द्वारा श्री महान गुरु नानक दरबार है कलाकार या कलाबाज एक छलांगा लगाकर इस चक्की के पार्ट को नीचे नहीं उतार देगा दोस्तों अब बात करते हैं आधुनिक संबंध की
भारत के एक प्राचीन शहर संभल जिसका इतिहास काफी ज्यादा पुराना है इतिहास के पन्नों में इसके बारे में बहुत सारी चीज लिखी हुई हैं जो भी है बहरहाल जैसा भी इसका इतिहास है मैं आप लोगों को वहीं पर इसकी ऐतिहासिक चीज दिखाऊंगा और
वर्तमान समय में इसकी स्थिति कैसी है मैं आप लोगों को वो भी दिखाऊंगा दोस्तों ये 2011 से पहले मुरादाबाद जिले के अंदर ही
लगा करता था लेकिन 28 सितंबर 2011 में इस टाइम की वीडियो मुख्यमंत्री थी उन्होंने इसको जिला घोषित कर दिया और इसका नाम रख दिया भीम नगर लेकिन कुछ दिनों के बाद में दोस्तों इस जिले का नाम फिर से संभल रख दिया गया 12 जो भी इसकी हिस्ट्री है जैसा भी है दोस्तों मैं आप लोगों को वहीं पर ले जाकर दिखाऊंगा बिल्कुल लाइव तो बने रहना
भाई लोगों दोस्तों हम लोग कर चुके हैं संभल के अंदर एंट्री और आप लोगों को दिखाना चाहेंगे संभल के अंदर सबसे पहले कुछ ऐतिहासिक चीज है उसके बाद में दिखाएंगे आप लोगों को संभल के करंट टाइम में जो सिचुएशन टाइम की जो हालत संभल के बनी हुई है वो आप लोगों को दिखाएंगे और संभल से जुड़ी हुई
बहुत सारी जानकारी आज आप लोगों को इस
ब्लॉग में देखने के लिए मिलेंगे
बहुत सारी चीज हैं जिन्हें हम धीरे-धीरे
अपनी वीडियो में एक्सप्लोर करने की कोशिश
करेंगे
विष्णु मंदिर जिसके आधार पर संभल को कल की
नगरी भी कहा जाता है यह मंदिर काफी पुराना
है कोई कहता है इस मंदिर का निर्माण राजा
अशोक ने कराया था तो कोई कहता है इस मंदिर
का निर्माण चौधरी सदी के अंतिम हिंदू राजा
पृथ्वी राजा चौहान ने कराया था काफी टाइम
घूमने के बाद में दोस्तों हम लोग मनोकामना
मंदिर पर पहुंच चुके हैं फिर से मैं आप
लोगों को लेकर चलता हूं बैक कैमरे पर
जिससे की आप लोग इस मंदिर को भी अच्छे से
देख पाएं ये है श्री मनोकामना तीर्थ स्थल
जिसके अंदर एक प्राचीन भव्य मंदिर है जिसे
मनोकामना मंदिर के नाम से जाना जाता है
मंदिर के अंदर एक विशाल परिसर है जिसके
अंदर एक 12 लगा हुआ है जो पर्यटकों को
अपनी ओर एकदम से आकर्षित कर लेता है शंकर
चौराहा के उत्तर दिशा में स्थित सूरजकुंड
है जिसे राजा पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया
था यह विशाल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित
करता है इसके अलावा संभल के अंदर कई
गुरुद्वारा भी हैं जिसमें एक महान गुरु
द्वारा गुरु द्वारा श्री महान गुरु नानक
दरबार है जो अंदर से देखने पर लोगों को
एकदम अपनी तरफ खींच लेता है यह महान
गुरुद्वारा बहुत खूबसूरत बना हुआ है
दोस्तों यह है तोता मैना की कब्र जो संभल
के इतिहास को और भी गहरा बनाती है कहा
जाता है चौधरी दौरान राजा पृथ्वीराज चौहान
के बगीचे में तोता मैना का जोड़ा रहा करता
था यह तोता मैना का जोड़ा पृथ्वीराज चौहान
को बहुत पसंद था काफी दिनों के बाद जब
राजा को ये तोता मैना का जोड़ा नहीं दिखाई
दिया तो राजा ने उनकी याद में यहां पे एक
कब्र बनवा लोग कहते हैं की इस कब्र के
चारों ओर कुछ लिखा हुआ है अरबी भाषा में
जिसे आज तक कोई पढ़ नहीं पाया है तोता
मैना की कब्र से दक्षिण की ओर चलने पर एक
कुआं है कोई इस कुए को चोर कुआं कहता है
तो कोई इस चूहे को रहस्य में कोई बुलाता
है इसकी सटीक जानकारी दोस्तों हमारे पास
मौजूद नहीं है यह है संभल का घंट हकर जिसे
हार्ट ऑफ संभल कहा जाता है मतलब संभल का
दिल ये संभल की पुलिस चौकी के और में
मार्केट के पास स्थित है जिस पर एक विशाल
घंटा बना हुआ है बात करते हैं संभल के एक
महान इतिहास एक कला यानी चक्की के पार्ट
के दोस्तों लोग बोलते हैं की संभल आए
चक्की का पार्ट नहीं देखा तो क्या खास
संभल देखा दोस्तों इस चक्की के पाठ के
बारे में कहा जाता है की यह पृथ्वीराज
चौहान की बेटी संयुक्त का अपहरण ले आए द
उसे समय जयचंद की सी के वीर योद्धा मलखान
सिंह और आल्हा उदल अपना फेस बदलकर नाटक की
पोशाक में संयोगिता का पता लगाने संभल आए
द जहां आज ये चक्की का पाठ तांगा हुआ है
वहां एक किला है और यहां किले पर एक
खिड़की थी अल उदल ने छलांगा लगाकर खिड़की
पर पेलता तंगी और चक्की का पार्ट टाइम
दिया जिसका पर्पस sahyogita का पता लगाना
था उसे वक्त उसकी ऊंचाई 60 फुट थी बाद में
sahyogita का पता चल गया और पृथ्वीराज से
युद्ध हुआ और एक शाही ऐलान किया गया की अब
संभल में कोई भी नाटक तब तक नहीं होगा जब
तक कोई भी कलाकार या कलाकार एक छलांगा
लगाकर इस चक्की के पार्ट को नीचे नहीं
उतार देगा दोस्तों अब बात करते हैं आधुनिक
संबल की यह आने के लिए एक मुरादाबाद से
ट्रेन ही आती है ट्रेन की पटरी सिर्फ
संभालता ही बिछी होने की वजह से दूसरे
राज्यों के लिए सीधी ट्रेन की कोई सुविधा
नहीं है जो संभल के विकास में बहुत बड़े
रुकावट है इसके अलावा संभल आने के लिए तीन
बस स्टैंड है जिसमें एक सरकारी रोडवेज बस
बस स्टैंड है यहां से अलीगढ़ बुलंदशहर
चंदौसी आगरा दिल्ली मुरादाबाद अमरोहा आदि
के लिए सीधी बस सेवा है बाकी दो प्राइवेट
बस स्टैंड सर्विस भी यहां पर उपलब्ध है
जहां से लोकल एरिया के लिए बसें मिलती हैं
दोस्तों संभल का ये मशहूर चंदौसी चौराहा
है इसके पूर्व में चंदौसी पश्चिम की ओर
raysisti उत्तर की ओर मुरादाबाद तथा
दक्षिण की ओर चौधरी सराय है चौधरी सराय
चौराहा पहुंचने पर यहां से उत्तर की दिशा
में बहस हुई अलीगढ़ और बुलंदशहर अर्थात
दक्षिण में मुरादाबाद और पश्चिम में
हसनपुर दिल्ली के लिए मार्ग जाता है संभल
से पश्चिम की ओर जाने पर ब्लूमिंग बर्ड्स
स्कूल के पास में bajipuram चौराहा है जो
संभल के अंदर लगने वाले जाम से एकदम से
निजात दिलाता है इसमें संभल मुरादाबाद
अमरोहा दिल्ली में हसनपुर से आने वाली
भारी यातायात के साधन बिना संभल में
एंट्री किए हुए बायपास से निकल जाते हैं
यह है संभलकर
जिला मजिस्ट्रेट यह मुरादाबाद से आने वाले
मार्ग पर स्थित है यह संभल की पुरानी
तहसील है जो तहसील रोड पर है संभल का
मुख्यालय बहजोई है संभल का पीडब्ल्यूडी
ऑफिस चंदौसी चौराहा मार्ग हसीना बेगम
हॉस्पिटल के सामने स्थित है अब बात करते
हैं स्वास्थ्य सेवाओं की तो संभल के अंदर
दो गवर्नमेंट हॉस्पिटल तो इसके अलावा कई
प्राइवेट हॉस्पिटल्स हैं जिसमें मुख्य द
डॉक्टर अतुल naharotra एमजी हॉस्पिटल जहां
तक कपिल खान का बच्चा हॉस्पिटल त्यागी आई
केयर हॉस्पिटल हसीना बेगम मल की
स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल सुशीला सक्सेना
हॉस्पिटल एंड बिस्मिल्लाह हॉस्पिटल आदि यहां पर स्थित है बात करते हैं शिक्षा की संभल के अंदर कोई भी यूनिवर्सिटी नहीं है संभल के चौधरी सराय में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल पीजी कॉलेज है इसके अलावा आचार्य मुकेश हकीम रईस सरस्वती इंटर कॉलेज बाल विद्या मंदिर हिंदू इंटर कॉलेज शंकर भूषण शरण जनता इंटर कॉलेज एवं ब्लूमिंग शब्द आदि स्कूल यहां पर मौजूद अब कई मौलवी बन गए हैं जिसने विशाल मेगा मार्ट सूरज प्लाजा इसके अलावा संभल का पुराना में बाजार और nakaasar का पुराना जो नया बाजार आदि शामिल हैं यह संभल का फाइनेंस एरिया है मतलब यहां एक लाइन में कई सारी बैंक स्थित है यहां से पश्चिम की ओर चलते हुए तेल मंडी आती है जहां पर मेंथा ऑयल का बड़ा बिजनेस किया जाता है संभल में एक मंडी का भी गठन किया गया है ये मंडी हसनपुर मार्ग पर स्थित है संभल के दो अभिन्न अंग हैं सराय तीन में हयातनगर यह घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं और इनके जो कस्बा नुमा बाजार होते हैं इन्हीं के अंदर स्थित हैं तेल मंडी से पश्चिम की ओर जाने पर आती है यहां पर नए पुराने इंजन विज़न नेटवर्क का बहुत तादाद में कम किया जाता है
प्राचीन काल
संभल का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि यह क्षेत्र महाभारत काल में अस्तित्व में था। सम्भल को 'श्रृंगवेरपुर' के नाम से भी जाना जाता था, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहाँ से गंगा के किनारे की सभ्यता का विकास हुआ।
मध्यकालीन इतिहास
मध्यकाल में सम्भल का महत्व तब बढ़ा जब इसे दिल्ली सल्तनत और मुगलों के शासनकाल में प्रमुख प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाया गया। सम्भल की विशेष पहचान तब बनी जब बाबर ने इसे अपने साम्राज्य के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में चुना। सम्राट अकबर ने सम्भल को अपने सुभा (प्रांत) में शामिल किया।
संभल का यह भी गौरवशाली इतिहास है कि यहाँ विभिन्न संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। यह क्षेत्र हिंदू, मुस्लिम, और अन्य समुदायों के बीच सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक है।
आधुनिक काल
ब्रिटिश काल में सम्भल स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। यहाँ के कई क्रांतिकारियों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद सम्भल का विकास तेजी से हुआ और यह जिला अपने व्यापार और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध हुआ।
संस्कृति और विरासत
संभल अपने धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ की प्रमुख धार्मिक धरोहरों में शिव मंदिर, जामा मस्जिद और कंकाली देवी मंदिर शामिल हैं। सम्भल की भूमि पर कई सूफी संतों ने भी निवास किया, जिससे यहाँ सूफी संस्कृति का प्रभाव पड़ा।
संभल का वर्तमान
1997 में इसे मुरादाबाद जिले से अलग कर एक नया जिला बनाया गया था। 2011 में इसे फिर से सम्भल जिले के रूप में नामित किया गया। आज सम्भल कृषि, हस्तशिल्प और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान रखता है।
संभल का इतिहास उसकी विविधता और समृद्धि को दर्शाता है। यह जिला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता के लिए भी जाना जाता है।