एएसआई और वक्फ बोर्ड के बीच विवाद: 250 संरक्षित स्मारक वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज
एएसआई और वक्फ बोर्ड के बीच विवाद: 250 संरक्षित स्मारक वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज, Dispute between ASI and Waqf Board 250 protected monuments registered as Waqf property
एएसआई और वक्फ बोर्ड के बीच विवाद: 250 संरक्षित स्मारक वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हालिया आंतरिक सर्वेक्षण में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, एएसआई के 250 संरक्षित स्मारक वर्तमान में वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत हैं। इस मामले को एएसआई जल्द ही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष उठाएगी और इन स्मारकों पर नियंत्रण वापस लेने की मांग करेगी।
रिपोर्ट का मुख्य बिंदु
1. बढ़ती संख्या:
सितंबर में जेपीसी की चौथी बैठक में एएसआई ने ऐसे स्मारकों की संख्या 120 बताई थी। इसके बाद किए गए व्यापक सर्वेक्षण में यह संख्या 250 तक पहुंच गई है।
2. प्रमुख स्मारक:
इन स्मारकों में दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल जैसे फिरोजशाह कोटला की जामा मस्जिद, आरके पुरम में छोटी गुमटी मकबरा, हौज खास मस्जिद और ईदगाह शामिल हैं।
3. विवाद का कारण:
वक्फ अधिनियम 1995 के तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को दान के आधार पर वक्फ संपत्ति घोषित करने का अधिकार है। कई मामलों में बोर्ड ने इन संरक्षित स्मारकों को अपनी संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर लिया है, जिससे एएमएएसआर अधिनियम 1958 के तहत एएसआई को अधिकारों के टकराव का सामना करना पड़ रहा है।
ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कई स्मारक सच्चर समिति की 2006 की रिपोर्ट में सूचीबद्ध हैं, जो भारत के मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर आधारित थी।
एएसआई की मांग
एएसआई का कहना है कि ये स्मारक राष्ट्रीय धरोहर हैं और इनका संरक्षण केवल एएसआई के पास होना चाहिए। प्रबंधन में टकराव और कानूनी विवादों के कारण इन धरोहरों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
आगे की कार्यवाही
एएसआई इस मुद्दे को जेपीसी के सामने पेश करेगी और इन संरक्षित स्मारकों पर अपना नियंत्रण वापस लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया की मांग करेगी।
यह विवाद न केवल कानूनी अधिकारों का सवाल उठाता है, बल्कि भारत की धरोहर के संरक्षण और प्रबंधन के प्रति सरकार की जिम्मेदारी पर भी ध्यान आकर्षित करता है।