दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री बैन — क्या है वजह?
अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री रोके जाने पर आक्रोश। जानें घटना का पूरा हाल, जयशंकर से हुई वार्ता और मीडिया-समुदाय की प्रतिक्रिया। आमिर खान मुत्तकी प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली, महिला पत्रकारों पर बैन, Afghanistan FM Delhi press meet women barred, Jaishankar Muttaqi meeting, Afghan minister visit India 2025
दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों की एंट्री बैन — क्या है वजह?
नई दिल्ली, स्पेशल रिपोर्ट। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश से रोक दिया गया — और यह घटना तुरंत विवाद बनने के साथ-साथ सोशल मीडिया व मीडिया समुदाय में भारी निंदा का विषय बन गई। India Today+1
मुत्तकी शुक्रवार को भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की — जिसमें व्यापार, मानवीय सहायता और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद अफगान दूतावास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ पुरुष पत्रकारों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। कई रिपोर्टों के अनुसार महिला पत्रकारों ने बताया कि उन्होंने पहले से तय ड्रेस-कोड का सम्मान किया हुआ था, फिर भी उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। The Indian Express+1
इमरजेंसी और सामाजिक प्रतिक्रिया — कई पत्रकारों और राजनीतिक हस्तियों ने इस कदम की निंदा की। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया कि कई महिला पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे तालिबान की महिलाओं पर लागू नीतियों का ही प्रदर्शन बताया। विपक्षी और पत्रकार संगठन भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जबकि कई उपयोगकर्ताओं ने पूछा कि क्या कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल भारत में अपनी 'पृष्ठभूमि-वाली' पॉलिसियों को लागू कर सकता है। The Times of India+1
आधिकारिक बयान और तर्क — किसी आधिकारिक पक्ष द्वारा (तरीके से) यह स्पष्ट नहीं किया गया कि महिला पत्रकारों को किन कारणों से रोका गया। कुछ रिपोर्टों ने संकेत दिया कि यह निर्णय तालिबानी प्रतिनिधि दल की ओर से लिया गया था; वहीं यह भी पूछा जा रहा है कि क्या भारतीय अधिकारियों को इस फैसले की जानकारी थी या सहमति दी गई थी। ऐसे मामले दुर्लभ हैं, क्योंकि न्यू दिल्ली में किसी भी विजिटिंग प्रतिनिधि दल के मीडिया-इवेंट में आमतौर पर भारतीय मीडिया के सभी वर्गों को शामिल किया जाता है। Hindustan Times+1
राजनीतिक-डिप्लोमैटिक संदर्भ — मुत्तकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग किसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा और अफगान भूमि पर किसी भी चरमपंथी समूह को पनाह नहीं दी जाएगी — यह वह संदेश था जो बैठक के दौरान और प्रेस ब्रीफिंग में बार-बार आया। साथ ही, भारत ने काबुल स्थित अपनी तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा देने का ऐलान किया, जिसे मुत्तकी ने स्वागत योग्य बताया। इन घोषणाओं का महत्व द्विपक्षीय नीतिगत स्तर पर देखा जा रहा है। The Times of India+1
मीडिया और समाज पर असर — इस घटना ने एक बड़े सवाल को फिर से उठाया है: क्या किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को हमारे देश के भीतर आयोजित सार्वजनिक मीडिया-इवेंट में इस तरह के भेदभावी नियम लागू करने की अनुमति दी जानी चाहिए? कई पत्रकारों ने सुझाव दिया कि अगली बार इस तरह की स्थिति से निपटने के लिये मेकानिज्म या स्पष्ट निर्देश की जरूरत है — ताकि भारत की नीतियों, प्रेस-स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के सिद्धांतों का सम्मान सुनिश्चित हो। The Wire+1
कॉन्टैक्ट/सोर्स हाइलाइट्स (प्रमुख रिपोर्ट्स)
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NDTV की रिपोर्ट — “Afghan Minister Sparks Outrage With 'Ban' On Women Journalists At Press Meet”.
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Indian Express — विस्तृत विश्लेषण और बैकग्राउंड पर लेख।
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Times of India — शुरुआती कवरेज और सोशल मीडिया प्रतिक्रिया।
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The Wire — स्वतंत्र विश्लेषण और प्रेस-स्वतंत्रता के निहितार्थ।
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India Today / Hindustan Times / Economic Times — विस्तृत रिएक्शन और फोटो/वीडियो रेकॉर्ड।