नेपाल में 6.1 तीव्रता का भूकंप, पाकिस्तान और तिब्बत में भी महसूस किए गए झटके
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नेपाल में 6.1 तीव्रता का भूकंप, पाकिस्तान और तिब्बत में भी महसूस किए गए झटके
काठमांडू: नेपाल में शुक्रवार तड़के 6.1 तीव्रता के भूकंप ने लोगों में दहशत फैला दी। भूकंप का केंद्र सिन्धुपाल्चोक जिले के भैरवकुंडा क्षेत्र में स्थित था। इस भूकंप के झटके भारत और तिब्बत में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों ने आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटकों) की संभावना जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
पाकिस्तान में भी आया भूकंप
नेपाल के बाद पाकिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। शुक्रवार सुबह 05:14 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 4.5 मापी गई। इसका केंद्र पाकिस्तान में ही था, लेकिन नेपाल के मुकाबले यह भूकंप कम तीव्रता का था। पाकिस्तान में भी किसी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।
डर के कारण घरों से बाहर निकले लोग
नेपाल के सिन्धुपाल्चोक जिले के वरिष्ठ अधिकारी गणेश नेपाली ने बताया कि भूकंप के तेज झटकों से लोग नींद से जागकर घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। उन्होंने कहा, "झटके इतने तेज थे कि कुछ ही सेकंड में हम घर छोड़कर बाहर भागने को मजबूर हो गए। हालांकि, अब तक किसी बड़ी हानि की सूचना नहीं है।"
आफ्टरशॉक्स की चेतावनी, सतर्क रहने की सलाह
नेपाल के भूगर्भीय विशेषज्ञों ने कहा कि बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स (अनुकरणीय झटके) आ सकते हैं, जिससे और नुकसान हो सकता है। इसीलिए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और खुले स्थानों में रहने की सलाह दी है।
नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र
नेपाल दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में आता है और इसे भूकंपीय जोन IV और V में वर्गीकृत किया गया है। वर्ष 2015 में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में 9,000 से अधिक लोग मारे गए थे और लाखों इमारतें नष्ट हो गई थीं। इसी इतिहास को देखते हुए मध्यम तीव्रता के भूकंप भी नेपाल में डर और सतर्कता का कारण बन जाते हैं।
निगरानी जारी, जनता से सावधानी बरतने की अपील
नेपाल सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। यदि किसी क्षेत्र में नुकसान की सूचना मिलती है, तो तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।
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भूकंप क्यों आता है? कारण और वैज्ञानिक व्याख्या
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) की हलचल के कारण आता है। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या अलग होती हैं, तो विशाल ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो धरती की सतह तक पहुंचकर झटकों (Seismic Waves) के रूप में महसूस होती है।
भूकंप आने के मुख्य कारण:
1. टेक्टोनिक प्लेटों की गति (Tectonic Plate Movement)
- पृथ्वी की ऊपरी सतह कई विशाल प्लेटों में विभाजित है, जो निरंतर गतिशील रहती हैं।
- जब ये प्लेटें आपस में टकराती या खिसकती हैं, तो ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जिससे भूकंप आता है।
- हिमालय क्षेत्र, जापान, इंडोनेशिया आदि क्षेत्र टेक्टोनिक रूप से सक्रिय हैं, इसलिए यहां अधिक भूकंप आते हैं।
2. ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption)
- जब ज्वालामुखी विस्फोट होता है, तो मैग्मा और गैसों के दबाव के कारण धरती की सतह हिलती है।
- यह कंपन भूकंप के झटकों के रूप में महसूस किया जाता है।
3. भू-स्खलन और खदानों में विस्फोट (Landslides & Mining Explosions)
- जब किसी पहाड़ या बड़े भूभाग का अचानक खिसकना या गिरना होता है, तो यह कंपन पैदा करता है।
- कोयला खदानों और खनन कार्यों के कारण भी छोटे भूकंप आ सकते हैं।
4. कृत्रिम गतिविधियां (Human Activities)
- परमाणु परीक्षण, भारी निर्माण कार्य, जलाशयों और बांधों में अत्यधिक जलभराव आदि से भी इंड्यूस्ड अर्थक्वेक (Induced Earthquake) हो सकते हैं।
भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर मापा जाता है:
- 3.0 से कम – हल्के झटके, महसूस नहीं होते
- 3.0 - 5.0 – हल्के कंपन, हल्का नुकसान
- 5.0 - 7.0 – मध्यम तीव्रता, इमारतों को नुकसान
- 7.0 से अधिक – विनाशकारी भूकंप, बड़ी तबाही मचाने की क्षमता
भूकंप एक प्राकृतिक घटना है जो पृथ्वी के अंदर चल रही गतिशील प्रक्रियाओं का परिणाम होती है। नेपाल, भारत, जापान और इंडोनेशिया जैसे देश भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। सुरक्षा के लिए लोगों को भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण करना चाहिए और आपातकालीन उपायों की जानकारी रखनी चाहिए।