हेल्ले लेंग – भारत विरोध का नया चेहरा, पुरानी टूलकिट

कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल जब भारत और नॉर्वे अपने महत्वपूर्ण फैसलों को विश्व के समक्ष रख रहे हों। जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है, प्रेस ब्रीफिंग हो। दोनों देशों के प्रमुख द्विपक्षीय संबंधों, फैसलों को प्रेस को ब्रीफ करने के बाद वहां से अपने दूसरे कार्यक्रमों के लिए जा रहे हों। उसी वक्त – अचानक योजनाबद्ध तौर […] The post हेल्ले लेंग – भारत विरोध का नया चेहरा, पुरानी टूलकिट appeared first on VSK Bharat.

May 23, 2026 - 09:15
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हेल्ले लेंग – भारत विरोध का नया चेहरा, पुरानी टूलकिट

कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

जब भारत और नॉर्वे अपने महत्वपूर्ण फैसलों को विश्व के समक्ष रख रहे हों। जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है, प्रेस ब्रीफिंग हो। दोनों देशों के प्रमुख द्विपक्षीय संबंधों, फैसलों को प्रेस को ब्रीफ करने के बाद वहां से अपने दूसरे कार्यक्रमों के लिए जा रहे हों। उसी वक्त – अचानक योजनाबद्ध तौर पर अपना प्रोपेगैंडा चलाना। हेल्ले लेंग का ये पूछना कि – “प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल क्यों नहीं लेते?”

– फिर 2024 के बाद अचानक 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक्टिव होना। हेल्ले लेंग द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ उस वीडियो को X पर पोस्ट करना। भारत विरोध में विष वमन करना। तत्पश्चात भारत में बैठे भारत विरोधियों का उस पर लहालोट होना। वीडियो के सहारे कांग्रेस के शहजादे एंड कंपनी द्वारा – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आक्षेप लगाना। सबसे पहले उस वीडियो को रिट्वीट करना।

ये सब कुंठित और पराजित भारत विरोधी राजनीति के अतिरिक्त कुछ नहीं है। वैश्विक स्तर पर भारत को पत्रकारिता, मानवाधिकार आदि पर ज्ञान देना। ये सब पुरानी टैक्टिक्स, टूलकिट के नए प्रयोग हैं। अंतर केवल इतना है कि भारत विरोधी कंटेंट वही है, बस पैकेजिंग चेंज है। ये कोई संयोग नहीं है, बल्कि भारत की साख को कमतर सिद्ध करने के टूलकिटिए प्रयोग हैं।

अब आते हैं कहानी पर..

हेल्ले लेंग के X पर पोस्ट के बाद जब भारत के विदेश मंत्रालय (पश्चिमी) के सचिव सिबी जॉर्ज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें बुलाया। वहां हेल्ले लेंग NGO’s पैटर्न वाली टूलकिट के क्वेश्चन लेकर आईं। प्रोवोक करने पर उतर आईं। वहां सिबी जॉर्ज ने उनका अच्छी तरह से ज्ञानवर्धन किया। तथ्य के आधार पर उन्हें समझाया। लेकिन हेल्ले लेंग प्रोपेगैंडा से बाज नहीं आईं। हेल्ले लेंग का एक सवाल उनके प्रोपेगैंडा को आईने की तरह साफ़ कर देता है। हेल्ले पूछती हैं कि – ‘दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे?’

– उनके इसी सवाल में उनकी और उन्हें प्लांट करने वाले आकाओं की भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। ये सब भारत की बढ़ती साख, विश्व समुदाय के बीच भारत की स्वीकार्यता के विरुद्ध नैरेटिव चलाने का अहम हिस्सा है। हेल्ले लेंगे वही तथाकथित पत्रकार हैं जो चीन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कसीदे पढ़ती रही हैं। उनकी प्रशंसा में आर्टिकल लिखती रही हैं। हेल्ले लेंग का एजेंडा एकदम साफ़ था वो था – भारत विरोध। हालांकि ये सब नया नहीं है, भारत के ख़िलाफ़ ये प्रयास वर्षों से जारी हैं। भारत इन सबसे ऊपर उठकर नए दौर में है। जहां ऐसे सस्ते तरीक़े, पब्लिसिटी स्टंट भारत की साख पर बट्टा नहीं लगा सकते। हां, केवल इतना है कि मीडिया की सनसनी ज़रूर बन सकते हैं।

उनकी सोच पर तरस आता है। ‘मोदी विरोध और भारत विरोध’ में फ़र्क नहीं पता? भारत में बैठे दुर्बुद्धियों को समझ नहीं आता है? चिन्ता की बात ये है कि – भारत के ख़िलाफ़ जब भी कोई वैश्विक प्रोपेगैंडा चलाया जाता है। ठीक वैसे ही भारत में भी कुछ लोग पूरी ऊर्जा के साथ एक्टिव हो जाते हैं। उन्हें अपनी राजनीति के लिए खाद-पानी; भारत विरोधी प्रोपेगैंडा से मिलता है।

चाहे पूर्व का हिंडेनबर्ग रिपोर्ट वाला प्रोपेगैंडा हो या 2021 में किसान आंदोलन के समय ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट वाली टूलकिट या विभिन्न विदेशी यूनिवर्सिटी में पूर्व प्रायोजित कार्यक्रमों में जाकर – भारत के लोकतंत्र पर हमला बोलना हो। दूसरे देशों को भारत के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप का आमंत्रण देना हो।

तथाकथित पत्रकार हेल्ले लेंग के कंधे पर बंदूक रखकर भारत विरोध का जो प्रोपेगैंडा चलाया गया, उसे नॉर्वे ख़ुद ध्वस्त कर चुका है। नार्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्त आईडे भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं। नार्वे के विदेश मंत्री ने जो कहा वो भारत विरोधियों के मुंह पर करारा तमाचा है। आईडे ने कहा कि – “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के लोकप्रिय और प्रभावशाली राजनेता हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।” इतना ही नहीं, आईडे कह रहे हैं – “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और बहुत तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। आने वाले समय में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत एक बहुत महत्वपूर्ण और नवाचार से भरपूर साझेदार है।”

क्या नॉर्वे के विदेश मंत्री का ये कहना हेल्ले लेंग और उनके समर्थकों के लिए पर्याप्त नहीं है? ऐसे में हेल्ले लेंग जैसे टूलकिट वाले एजेंडाबजों की क्रेडिबिलिटी क्या रह जाती है? ये कौन होते हैं जो भारत को ज्ञान देंगे? स्पष्ट है कि भारत विरोध अस्वीकार्य है।

लेकिन रुकिये.. कहानी कुछ और भी है।

भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया कैसे प्रोपेगैंडा चलाता है। वो भारत के ख़िलाफ़ कैसे Micro Level प्लानिंग के साथ Global Propaganda चलाता है। राष्ट्रनिष्ठ व्यक्ति के लिए उसे समझना इतना भी मुश्किल नहीं है।

स्व. उमेश उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार) ने वर्षों के शोध के बाद एक प्रामाणिक पुस्तक लिखी थी। ‘Western Media Narratives on India :From Gandhi to Modi’ – इसे मंगाकर पढ़िए। आपको पश्चिमी मीडिया से लेकर भारत को लेकर पश्चिम की हीनग्रंथि का सहज ही अनुमान हो जाएगा। ये दुनिया कभी भी भारत की प्रगति बर्दाश्त नहीं कर सकती है। भारत को लेकर दुराग्रह पालने वाला पश्चिमी मीडिया एक ख़ास एजेंडे पर काम करता है। फिर पत्रकारिता पर भारत को ज्ञान बघारता है। स्व. उमेश उपाध्याय ने अपनी पुस्तक में तथ्यात्मक रूप से सारे संदर्भ उकेरे हैं।

क्योंकि बाजारवादी आसुरी शक्तियां भारत की एकता, शक्ति और सम्प्रभु नीति से भयभीत हैं। उन्हें भारत की स्थिरता रास नहीं आ रही है। ऐसे में वैश्विक शक्तियां भारत के ख़िलाफ़ अनेकानेक प्रोपेगैंडा चलाएंगी। विभाजनकारी, विप्लवकारी टूलकिट चलाएंगी। नाम, चेहरे और स्थान बदले रहेंगे, लेकिन उनका काम एक रहेगा। वो है भारत विरोध। भारत को अस्थिर करना। जैसा उन्होंने हमारे पड़ोस नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि में किया। लेकिन भारत के मामले में डीप स्टेट, ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज, भारत विरोधी शक्तियों को मुंह की खानी पड़ी। किन्तु उनका प्रोपेगैंडा बदस्तूर जारी है।

ऐसे में भारत के ही कुछ लोगों का इनके साथ कदमताल करना। भारत विरोधी हर चीज़ को मुद्दा बनाकर पेश करना। और इससे अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन तलाशना कोई नई बात नहीं है। जब भी दुनिया के किसी हिस्से से भारत विरोधी टूलकिट एक्टिवेट होगी। ये लोग उसके सबसे बड़े प्रचारक के तौर पर आएंगे। क्योंकि भारत की जनता ने उन्हें इतनी बार ख़ारिज कर दिया है कि ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज के अलावा उनके पास अब कोई सहारा नहीं बचा है।

पर, भारत माता की संतानें हर विभाजनकारी मंसूबे को ध्वस्त कर देती हैं। भारत सामूहिक चेतना के साथ आगे बढ़ चला है। भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। हमारी आपकी सतर्कता और राष्ट्र निष्ठा भारत विरोधियों की नींद उड़ाने के लिए पर्याप्त है।

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