श्री राम मंदिर प्रकरण पर दुष्प्रचार के खिलाफ संत समाज एकजुट; संतों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने का किया आग्रह

अयोध्या, 23 जुलाई। अयोध्या धाम स्थित श्री राम सत्संग भवन, धर्म मंडपम (मणिरामदास छावनी) में गुरुवार को आयोजित संत मंडल संगोष्ठी में श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े प्रकरण को लेकर देशभर में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर संतों ने चिंता व्यक्त की। संतों ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा को […] The post श्री राम मंदिर प्रकरण पर दुष्प्रचार के खिलाफ संत समाज एकजुट; संतों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने का किया आग्रह appeared first on VSK Bharat.

Jul 24, 2026 - 17:18
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श्री राम मंदिर प्रकरण पर दुष्प्रचार के खिलाफ संत समाज एकजुट; संतों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने का किया आग्रह

अयोध्या, 23 जुलाई।

अयोध्या धाम स्थित श्री राम सत्संग भवन, धर्म मंडपम (मणिरामदास छावनी) में गुरुवार को आयोजित संत मंडल संगोष्ठी में श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े प्रकरण को लेकर देशभर में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर संतों ने चिंता व्यक्त की। संतों ने कहा कि अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा को प्रभावित करने के उद्देश्य से भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। संतों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और तथ्यों के आधार पर ही अपनी राय बनाने की अपील की।

संतों ने अयोध्या की एकता, सनातन परंपरा तथा श्री राम जन्मभूमि की मर्यादा की रक्षा का संकल्प दोहराया। साथ ही श्रद्धालुओं में फैली भ्रांतियों को दूर करने, धार्मिक समिति की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने तथा समन्वय और संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन महंत डॉ. रामानन्द दास जी महाराज ने किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का गौरव देश और दुनिया में बढ़ा है। श्री राम जन्मभूमि से जुड़े एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को लेकर राजनीतिक स्तर पर भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया, लेकिन संत समाज नीर-क्षीर विवेक के साथ सत्य का पक्ष रखेगा। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के लोग होते हैं, किन्तु कुछ घटनाओं को आधार बनाकर पूरे अयोध्या धाम और मंदिर व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

श्री राजकुमार दास जी महाराज ने कहा कि अयोध्या सप्तपुरियों में प्रथम मोक्षदा पुरी है और सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। घटना के बाद जिस प्रकार का दुष्प्रचार हुआ, उससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी। उनके अनुसार श्री राम मंदिर के माध्यम से संगठित हुए हिन्दू समाज की आस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया। इस प्रकार के दुष्प्रचार का समय रहते तथ्यात्मक उत्तर देना आवश्यक है।

संगोष्ठी में राघवेश दास जी ने कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण के विरोध में रहे लोग अब नए-नए विवाद खड़े करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि कहीं कोई चूक हुई भी है तो उसे संवाद और सामूहिक प्रयास से सुधारा जाना चाहिए।

रामायणी रामकृष्ण दास जी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से अयोध्या की छवि प्रभावित हुई है और उसे पुनः सुदृढ़ बनाने के लिए संत समाज को आगे आना होगा। रामायणी कमला दास जी ने कहा कि समय और परिस्थितियों के प्रभाव से किसी से भी भूल हो सकती है, लेकिन उसका समाधान संगठन और समन्वय से संभव है।

महंत वैदेही वल्लभशरण जी महाराज ने धार्मिक समिति में संतों के चयन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे धार्मिक विषयों में संत समाज की भूमिका और प्रभावी होगी। महंत शशिकान्त दास जी महाराज ने कहा कि श्री राम मंदिर को लेकर फैलाया जा रहा दुष्प्रचार निराधार है और समाज को इससे भ्रमित नहीं होना चाहिए।

रामदास जी महाराज (नाका हनुमानगढ़ी) ने कहा कि संवाद के माध्यम से बड़े से बड़े विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। डॉ. भरतदास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री राम की जन्मभूमि की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है तथा बिना तथ्य जाने किसी के संबंध में टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

महंत गिरीशदास जी महाराज ने कहा कि समाज में सही जानकारी पहुंचाना अयोध्यावासियों का नैतिक दायित्व है। महंत मनीष दास जी महाराज ने कहा कि संत समाज को विषम परिस्थितियों में संयमित और जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए तथा अयोध्या की गरिमा को किसी भी परिस्थिति में आघात नहीं पहुंचना चाहिए।

महंत जनार्दन दास जी महाराज ने कहा कि घटना को आवश्यकता से अधिक प्रचार मिला, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में संत समाज की भूमिका और अधिक सक्रिय होनी चाहिए। महंत परशुराम दास जी महाराज ने सनातन और हिन्दुत्व के विरुद्ध कार्य करने वाली शक्तियों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

जयराम दास जी महाराज ने धार्मिक समिति में संतों को शामिल किए जाने का स्वागत किया, जबकि सत्यनारायण दास जी ने भगवान श्री राम के आदर्शों का अनुसरण करने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने पर बल दिया।

निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत गौरी शंकरदास जी ने कहा कि जिनका मंदिर और सनातन परंपरा से कभी जुड़ाव नहीं रहा, वही आज मंदिर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। रामानुज दास जी महाराज ने संतों से मर्यादा और गुरु-शिष्य परंपरा के अनुरूप आचरण करने का आग्रह किया।

सत्येन्द्र दास जी ने कहा कि अयोध्या को बदनाम करने के प्रयास स्वीकार नहीं किए जाएंगे। महंत संजय दास जी ने श्रीराम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों की ऐसी संगोष्ठियां नियमित रूप से आयोजित होनी चाहिए।

महंत मुरलीदास जी महाराज ने श्री राम मंदिर आंदोलन में विभिन्न संगठनों के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है।

आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी ने कहा कि जब भी सनातन और अयोध्या के विरुद्ध दुष्प्रचार हो, उसका तत्काल तथ्यों के साथ प्रतिवाद किया जाना चाहिए। समसामयिक विषयों पर संत समाज की नियमित मासिक बैठकें होनी चाहिए, ताकि अयोध्या का पक्ष एक स्वर में सामने आ सके।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महंत कमलनयन दास जी महाराज ने कहा कि समाज को दुष्प्रचार से बचाने और अयोध्या की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी संतों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। समय के साथ सभी तथ्यों का सत्य सामने आएगा और समाज को भ्रमित करने वाले प्रयास सफल नहीं होंगे।

संगोष्ठी में संतों ने श्रीराम मंदिर प्रकरण को लेकर फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार का सामूहिक रूप से विरोध करते हुए अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादा, सामाजिक सद्भाव और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए संगठित होकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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