चित्रकूट में प्रबुद्ध जन गोष्ठी सम्पन्न, भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने पर मंथन
चित्रकूट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने चित्रकूट में आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी में सहभागिता करते हुए उपस्थित प्रमुख नागरिकों के समक्ष महत्वपूर्ण प्रश्न रखा कि “आप लोगों के विचार से भारत के पास ऐसा क्या है, जिसे वह विश्व के अन्य देशों को प्रदान कर पुनः ‘विश्व गुरु’ […] The post चित्रकूट में प्रबुद्ध जन गोष्ठी सम्पन्न, भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने पर मंथन appeared first on VSK Bharat.
चित्रकूट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने चित्रकूट में आयोजित प्रबुद्ध जन गोष्ठी में सहभागिता करते हुए उपस्थित प्रमुख नागरिकों के समक्ष महत्वपूर्ण प्रश्न रखा कि “आप लोगों के विचार से भारत के पास ऐसा क्या है, जिसे वह विश्व के अन्य देशों को प्रदान कर पुनः ‘विश्व गुरु’ के रूप में स्थापित हो सकता है?”
जन संवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मझगवां खंड, सतना द्वारा लोहिया सभागार उद्यमिता विद्यापीठ, दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मझगवां खंड के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्धजनों की उपस्थिति रही।
भय्याजी जोशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की यात्रा और मूल उद्देश्यों व कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का मूल ध्येय समाज में नैतिक मूल्यों का संवर्धन, राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ीकरण तथा आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण करना है।
उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर अरविंद घोष, स्वामी विवेकानंद एवं वीर सावरकर के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन महान विचारकों ने भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक समृद्धि और मानवता के कल्याण के सिद्धांत को विश्व के लिए मार्गदर्शक माना है।
भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत की आत्मा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के भाव में निहित है, जो विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और समरसता का संदेश देता है। यदि भारतीय समाज अपने मूल्यों, परंपराओं और कर्तव्यबोध को आत्मसात कर ले, तो भारत पुनः विश्व मंच पर नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की एकता, सजगता और सक्रियता ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। विभिन्न सेवा, शिक्षा और सामाजिक समरसता के कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये प्रयास समाज को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रबुद्धजनों ने भी अपने विचार साझा किए और भारत की सांस्कृतिक विरासत, योग, आयुर्वेद, आध्यात्मिक ज्ञान एवं पारिवारिक मूल्यों को विश्व के लिए उपयोगी बताते हुए भारत की विशिष्ट पहचान के रूप में प्रस्तुत किया।
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