“कर्मयोगिनी माता अहिल्या” ने बताया भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान
अयोध्या, 17 जनवरी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” महानाट्य ने माता अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणास्पद जीवन, त्याग, सेवा व सुशासन की जीवंत प्रस्तुति दी। संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के संयुक्त तत्वाधान […] The post “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” ने बताया भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान appeared first on VSK Bharat.
अयोध्या, 17 जनवरी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” महानाट्य ने माता अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणास्पद जीवन, त्याग, सेवा व सुशासन की जीवंत प्रस्तुति दी।
संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के संयुक्त तत्वाधान में अंगद टीला परिसर में आयोजित “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” महानाट्य ने माता अहिल्या के प्रेरणास्पद जीवन, उनके त्याग, सेवा, सुशासन और लोक कल्याणकारी प्रेरणास्पद जीवन पर दर्शकों को चिंतन करने को विवश किया। भारतीय दर्शन में कभी नारी शक्ति को कमतर आँका ही नहीं गया। नारी सशक्तिकरण शब्दावली पश्चिमी सभ्यता की देन है। हमारे यहाँ नारियों को सदैव पूज्य व शक्ति स्वरूपा का दर्जा प्राप्त रहा। महानाट्य में माता होल्कर के बाल्यकाल से लेकर सम्पूर्ण शासनकाल तक की उनकी जीवन-यात्रा, सामाजिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण में योगदान तथा नारी सशक्तिकरण के उनके आदर्शों को रंगमंचीय भाषा में सजीव ढंग से उकेरा गया।
बचपन से मस्तमौली और निर्भीक अहिल्या के पिता मनकोजी शिंदे व माँ सुशीला शिंदे ने मालवा के राजा के पुत्र खांडेराव से विवाह कर दिया। अहिल्या के बुद्धि कौशल से राजा मल्हार राव राज्य सुरक्षा के प्रति निश्चिंत हो गए। कुछ समय बाद खांडेराव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए तो ससुर मल्हार राव की प्रेरणा से अहिल्या ने राज्य सिंहासन लेना स्वीकार किया। उन्होंने एक कर्मयोगी के रूप में न्यायोचित राज्य कार्य प्रारम्भ कर दिया, प्रजा में जय जयकार होने लगा। उन्होंने मंदिर, धर्मशालाएं, सराय निर्माण आदि जनहित के काम किए।
महानाट्य ने ऐतिहासिक चेतना ही जागृत नहीं की, बल्कि कर्मयोग, सेवा और नैतिक नेतृत्व जैसे शाश्वत मूल्यों की प्रासंगिकता को भी उकेरा। सीसीआरटी की यह प्रस्तुति भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ऐतिहासिक स्मृति के संवर्धन तथा समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कलाकारों के संवाद संकलित ध्वनि के साथ बेहतर सामंजस्य बना रहे थे, जिससे कोई यह नहीं भांप सका की संवाद पूर्व संकलित है।
मंचन में प्रमुख रूप से सारा शर्मा ने अहिल्याबाई होल्कर, प्रियंका वर्मा ने अहिल्याबाई के बचपन, सहित लगभग 40 कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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