तुषार गांधी महात्मा गांधी के परपोते और अरुण मणिलाल गांधी के पुत्र हैं। उनका जन्म 17 जनवरी 1960 को हुआ था। तुषार गांधी एक लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और महात्मा गांधी फाउंडेशन के संस्थापक हैं। उन्होंने "लेट्स किल गांधी" (2007) और "द लॉस्ट डायरी ऑफ कस्तूर, माई बा" (2022) जैसी पुस्तकें लिखी हैं।
मार्च 2005 में, तुषार गांधी ने दांडी मार्च की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसी मार्ग पर पुनः यात्रा का आयोजन किया था। उन्होंने कमल हासन की फिल्म "हे राम" में भी अभिनय किया है।
हाल ही में, तुषार गांधी ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शेगांव, महाराष्ट्र में हिस्सा लिया, जो उनकी जन्मस्थली भी है।
तुषार गांधी ने महात्मा गांधी की हत्या से संबंधित दस्तावेज़ों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
तुषार गांधी वर्तमान में मुंबई में रहते हैं और सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सद्भाव और गांधीवादी सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं।
आज जब मैं सुबह से इस भारत जोड़ो यात्रा में राहुल जी के साथ चल रहा था तो एक याद एक शॉट ए रही थी की जिस तरह से
जनता गरीब जनता सामान्य जनता को अपने पास करते द अपने गले से लगा रहे द और उनके दुख दर्द का थोड़ा बोझ चंद लम्हों के लिए तो भी हल्का कर रहे द और यह याद आया की दूसरी तरफ आज हमारे प्रधानमंत्री जी हैं जो जब जहां जाते हैं
वहां अगर उनके रास्ते में गरीबों की बस्ती ए जाए तो पर्दे लगवा देते हैं की ताकि उनको देखना ना पड़े यह जो फर्क है वो जनता के नेता और एक राजनीतिक नेता के बीच में होता है
यह हमने याद रखना बहुत जरूरी है क्योंकि इस देश की इस भूमि की परंपरा है की जो
जनता का हमदर्द बनकर निकाला है वही इस देश
का सही में नेता बनाया
बापू भी गरीबों की झोपड़ी तक जाते द
और उन्हें में शामिल होने के लिए अपने आप
को मोड़ते द वैसे
और आज कई सालों के बाद
वह देखने को मिल रहा है वापस
मेरे मैं यह मेरा sadbhagya समझता हूं की
मुझे
चंद लम्हों के लिए एक दिन के लिएस यह जो अनुभव है वो प्राप्त करने का मौका मिला क्योंकि ऐसे अनुमानों के बारे
में इतिहास में पढ़ा करता था पर यह मेरी जिंदगी में कभी मुमकिन होगा यहसोचा नहीं था इसके पहले 2005 में दांडी
कुछ में राहुल जी के साथ चला था मैं
आज वापस चला हूं यही याद आती है की
1930 में दांडी कुछ में बापू मोतीलाल
नेहरू और पंडित नेहरू साथ में चले द
उसके बाद 1947 में
दंगों के बीच जब बापू नोआखली और dipera
में चल रहे द तो पंडित जी वहां जाते द
उनके साथ विचार विमर्श करने और साथ हो
जाते द उसके बाद 2005 में जैसे मैंने कहा
राहुल जी और सोनिया मैडम दोनों उसे दांडी कुछ की 75वीं सालगिरह पर साथ में आए दतो वह परंपरा को आज आगे चलते हुए मैं मेरा यह कर्तव्य समझता हूं और sadbhagya समझता हूं की मुझे ये मौका मिला मैं ज्यादा देर बोलूंगा नहीं लेकिन इतना जरूर कहूंगा जो लोग यह का रहे हैं की जो टूटा नहीं हैउसको जोड़ने के लिए क्यों आए हो उनको यह जवाब देना जरूरी है
की जब कुछ टूट जाए उसका इंतजार करने वालेजो होते हैं उनकी दिल में यह इच्छा होती है की वो टूट जाए और इसलिए इंतजार करते बैठे रहते हैं देश प्रेमी वो होता है जो उसको अंदाजा भी आए अगर शक भी हो की यह देश को तोड़ने की प्रकृति चल रही है
तो घरों से निकलकर उसे द्वेष को तोड़ने वालों से उसे देश का रक्षण करते हैं और यह जरूरी है देश टूटने के बाद टुकड़ों को जमा करने के लिए जाने वाले देश प्रेमी नहीं होते इसीलिए इस भारत जोड़ो यात्रा का महत्व है वो टूटे नहीं इसलिए एक जैन सैलाब पैदा कर रहे हैं आणि आभार मंटो जा पढ़ती नामी पहला वाराणसी जनता यात्रा का समर्थन देते राजा