अब वर्चुअल वर्ल्ड में पढ़ाई करेंगे विद्यार्थी
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो ने बताया कि पढ़ाई में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रचलन काफी बढ़ गया है।
अब वर्चुअल वर्ल्ड में पढ़ाई करेंगे विद्यार्थी
एसओएल जून से शुरू करेगा लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, ऑनर्स, स्नातकोत्तर व एमबीए के छात्रों के लिए हो रही शुरुआत
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में पढ़ाई का स्वरूप बदलने जा रहा है। अब एसओएल के विद्यार्थी वर्चुअल वर्ल्ड में पढ़ाई कर सकेंगे।

दरअसल, एसओएल जून से लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) की शुरूआत करने जा रहा है। सबसे पहले इसका लाभ ऑनर्स, स्नातकोत्तर व एमबीए के विद्यार्थियों को मिलेगा। सिस्टम के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑडियो बुक, वीडियो लेक्चर, पूर्व छात्रों से संवाद, सतत मूल्यांकन व लाइव लेक्चर की सुविधा ऑनलाइन मिलेगी। प्रशासन ने बीते साल टेस्टिंग मोड में इस सिस्टम से आंतरिक मूल्यांकन को करके देखा था। शुरूआत में इसमें दिक्कत आई, बाद में इसे सुधार लिया गया। लिहाजा अब इसे जून से सभी सुविधाओं के साथ शुरू किया जा रहा है।
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो ने बताया कि पढ़ाई में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रचलन काफी बढ़ गया है। हर किसी के पास कंपयूटर, इंटरनेट की उपलब्धता है। ऐसे में पढ़ाई के लिए छात्रों को वर्चुअल वर्ल्ड में लेकर जाया जा रहा है। जून में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के तहत ऑनर्स, स्नातकोत्तर व एमबीए प्रोग्राम में जिन भी छात्रों का दाखिला होगा उन्हें एलएमएस का पासवर्ड दे दिया जाएगा। इस सिस्टम के माध्यम से छात्रों का अपना एक होम पेज मिल जाएगा।
ऑनलाइन होगी विद्यार्थियों से जुड़ी सभी जानकारियां जिस पर विद्यार्थियों से जुड़ी सभी जानकारी ऑनलाइन होगी। मसलन यदि कोई छात्र ऑडियो लेक्चर सुनना चाहता है तो उसके कोर्स के मुताबिक यूजर आईडी व पासवर्ड डालते ही यह उपलब्ध हो जाएंगे। इसी तरह से वह घर बैठे ही वीडियो लेक्चर भी देख व सुन सकेगा। इसी तरह से कक्षाओं का लाइव लिंक भी उपलब्ध होगा। प्रिंटेड पाठ्य सामग्री भी यहीं उपलब्ध हो जाएगी। यहां वह शिक्षक छात्र पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों व पूर्व छात्रों के पोर्टल से पूर्व छात्रों से संवाद कर सकेंगे। तमाम तरह के नोटिफिकेशन भी उसे होम पेज पर मिलते रहेंगे।
वीडियो के माध्यम से वह शिक्षकों से इंटरेक्ट कर सकेगा। सतत मूल्यांकन, आंतरिक मूल्यांकन भी यहीं हो जाएगा। एलएमएस पर विद्यार्थियों ने कितना समय बिताया, कितनी सामग्री को पढ़ा है, इसका भी मूल्यांकन होता रहेगा। ऑनलाइन सिस्टम शुरू होने से ऑफलाइन मिलने वाली सुविधाएं बंद नहीं की जाएंगी।