खान-पान की दुकानों की पहचान के अपने मंत्री के फैसले को हिमाचल सरकार ने पलटा
प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला बोले, मंत्री की बात को योगी सरकार के निर्णय से न जोड़ें
खान-पान की दुकानों की पहचान के अपने मंत्री के फैसले को हिमाचल सरकार ने पलटा
हिमाचल सरकार के प्रवक्ता बोले- स्ट्रीट वेंडर्स नीति हो रही है तैयार, नहीं लिया ऐसा कोई निर्णय
हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की उस घोषणा को हिमाचल प्रदेश सरकार ने नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर रेहड़ी, फास्ट फूड कार्नर और ढाबे वालों को नाम-पते दिखाने होंगे। सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स नीति के संबंध में समाज के विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जा रहा है, किंतु अभी तक सरकार ने विक्रेताओं द्वारा दुकानों पर नेम प्लेट या अन्य पहचान अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। प्रदेश सरकार स्ट्रीट वेंडर्स से संबंधित मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संदर्भ में निर्णय लेने से पूर्व सभी सुझावों पर संवेदनशीलता से विचार किया जाएगा।
बुधवार को विक्रमादित्य सिंह ने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर लिखा था कि खाने-पीने का सामान बेचने वालों को नाम-पता दिखाना अनिवार्य किया गया है। विक्रमादित्य सिंह, योगी आदित्यनाथ के माडल से प्रेरित हो रहें हैं, जब यह भाव आलाकमान तक गया तो क्षतिपूर्ति का अभियान चला। इसी के चलते प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ल ने दिल्ली में कहा कि विक्रमादित्य सिंह के कथन को उत्तर प्रदेश के साथ जोड़ना ठीक नहीं है। शुक्ल का कहना है कि पहचान पत्र से ये सुनिश्चित हो पाएगा कि अधिकृत व्यक्ति ही दुकानें लगा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने राज्य में फेरी लगाकर सामान बेचने वाले लोगों को नियंत्रित करने और सड़कों पर रेहड़ी लगाकर सामान बेचने वालों की सुविधा के लिए सर्वदलीय कमेटी का गठन किया है। इसे योगी सरकार से जोड़ना सही नहीं है। पोस्ट से हटाई योगी सरकार के निर्णय की प्रति स्वयं विक्रमादित्य सिंह भी रक्षात्मक हुए और उन्होंने दिल्ली में ढाबों, फास्ट फूड रेहड़ी मालिकों को पहचान पत्र लगाने पर कहा कि इस तरह की पहचान पत्र की व्यवस्था का उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय से किसी तरह का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पोस्ट का पाठ तो वैसे ही रहने दिया किंतु योगी सरकार के इस संबंध में मंगलवार को लिए निर्णय की प्रति हटा दी।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहचान सार्वजनिक होना जरूरी
विक्रमादित्य सिंह दिल्ली दौरे पर हैं। उनका कहना था कि हिमाचल प्रदेश के हालिया घटनाक्रम के बाद प्रदेश उच्च न्यायालय ने समय-समय पर सरकार को आदेश दिए हैं कि वेडिंग जोन बनाए जाएं। बकौल विक्रमादित्य सिंह, प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी राज्य से व्यक्ति आ सकता है, लेकिन प्रदेश की सुरक्षा को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक होनी चाहिए। ये राज्य की आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के साथ नशीली दवाओं के सेवन को रोकने के लिए भी अतिआवश्यक है। इसको लेकर सरकार बेहद गंभीर है और इसे रोकने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
सिफारिशों का मूल्यांकन करने के उपरांत ही अंतिम निर्णय लेगा
गौरतलब है कि संजौली मस्जिद प्रकरण के बाद समाज की मांग पर सरकार ने एक समिति का गठन किया है। यह समिति इस मामले में प्रदेश सरकार को सिफारिशें देने से पूर्व विभिन्न हितधारकों के सुझावों की समीक्षा करेगी। सरकार का कहना है कि मंत्रिमंडल समिति की सिफारिशों का गहनता से मूल्यांकन करने के उपरांत ही अंतिम निर्णय लेगा।