एसी से मिल रहा सुकून, लेकिन पर्यावरण को नुकसान
भारत में इस साल गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। तपते सूरज और गर्म होती धरती ने लोगों को बेहाल कर दिया है। इस भीषण गर्मी से बचने के लिए हम अपने घर और दफ्तर में एयर कंडीशनर (एसी) लगवाते हैं। कार में बाहर जाते समय भी सबसे पहले एसी चालू करते हैं। आज के समय में चाहे शहर हो या गांव, हर जगह एसी का इस्तेमाल हो रहा है।
इस वजह से देश में एसी की बिक्री में भी भारी वृद्धि हुई है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, अभी भारत में हर 100 घरों में से सिर्फ 8 घरों में ही एसी है, लेकिन यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस साल करीब 1 करोड़ 40 लाख एसी बिक चुके हैं।
हालांकि, एसी की ठंडी हवा से लोगों को सुकून मिल रहा है, लेकिन यह धरती को गर्म कर रहा है। एसी चलने पर उसमें से जहरीली गैसें निकलती हैं, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हैं। हाइड्रो फ्लोरोकार्बन (HFCs) नामक गैसें कूलेंट में इस्तेमाल होती हैं, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं।
बढ़ती गर्मी के साथ-साथ एसी की मांग भी बढ़ी है, जिससे बिजली की मांग भी बढ़ रही है। लगातार एसी चलने से ट्रांसफार्मरों पर भी लोड बढ़ा है। बिजली उत्पादन में कुछ देशों में आज भी कोयले का इस्तेमाल होता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।
पिछले 25 वर्षों में वैश्विक तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जिसका एक कारण एसी भी है। एसी की संख्या बढ़ने और इनके 24 घंटे चलने से ऊर्जा की मांग में भी इजाफा हुआ है। आज इमारतों में उपयोग की जाने वाली बिजली का लगभग 20% एसी के कारण होता है। दुनिया भर में यह बिजली की खपत का 10% है। एसी से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी बढ़ा है, जो दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 7% है।
इंसान ने अपनी सुख-सुविधाओं के लिए प्रकृति और स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर कई आविष्कार किए हैं, जिनमें से एक है एसी। यह बगैर शोर-शराबे के हमारे घर को ठंडा कर रहा है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है।