1993 सीरियल बम ब्लास्ट केस: अब्दुल करीम टुंडा को अजमेर कोर्ट की ओर से बरी, विवादों में
अब्दुल करीम टुंडा को मुख्य आरोपी माना गया था जोने 1993 में पांच बड़े शहरों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल था।
Deepak abhay Aug 15, 2025 0
Deepak abhay Aug 15, 2025 0
UP HAED Feb 9, 2026 0
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1993 के सीरियल बम ब्लास्ट केस में अब्दुल करीम टुंडा को 10 साल बाद अजमेर कोर्ट ने बरी कर दिया है। यह एक महत्वपूर्ण और इतिहासी फैसला है जिसने देश को चौंका दिया है। अब्दुल करीम टुंडा को मुख्य आरोपी माना गया था जोने 1993 में पांच बड़े शहरों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल था।
टुंडा का जन्म 1943 में पुरानी दिल्ली में हुआ था और उनका पूरा नाम अब्दुल करीम है। उनका पिता छत्तालाल मियां लोहे की ढलाई काम करते थे। उनकी शादी जरीना नामक महिला से हुई थी और उनके साथ कई बच्चे थे।
टुंडा ने भारतीय सेना की ट्रेनिंग लेने के बाद पाकिस्तान में आईएसआई (Inter-Services Intelligence) से जुड़ने का निर्णय लिया था। उसकी गतिविधियों में चोरी, बुर्का पहनकर दुकानों में घुसना और बम बनाने की प्रक्रिया में हाथ को खो देना शामिल था।
1993 में पांच शहरों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में टुंडा ने अहमदाबाद, सूरत, मुंबई, लखनऊ, और हैदराबाद में बम विस्फोट किए थे, जिसमें कई लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप, टुंडा पर भारी आरोप लगे और उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर खोजा जाने लगा।
लगभग 31 साल बाद, अजमेर कोर्ट ने टुंडा को इस मामले में बरी कर दिया है। यह एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद फैसला है जिसने देशवासियों को चौंका दिया है। हालांकि, इसके खिलाफ अबियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बना रखी है।
इस घटना के माध्यम से दिखाया जा रहा है कि टुंडा का योगदान आतंकवादी गतिविधियों में था और उन्हें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में उनका नाम स्पष्ट होगा।
अजमेर, राजस्थान: राजस्थान के अजमेर जिले की टाडा कोर्ट ने 1993 के बम धमाकों के मुख्य आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है, जिसका फैसला हादसे के 31 साल बाद किया गया है। अदालत ने टुंडा को इस मामले में दोषी नहीं पाया, जबकि इरफान और हमीदुद्दीन को दोषी करार दिया गया है।
इस फैसले के बाद अब्दुल करीम टुंडा को बरी करने का तरीका हुआ विवेचनीय है, और यह मुख्य आरोपी के खिलाफ उपयुक्त प्रमाणों की कमी को दर्शाता है। अदालत ने साबित किया कि टुंडा को किसी भी मामले में दोषी ठहराना संभावनाओं के खिलाफ है।
इस मामले में इरफान और हमीदुद्दीन को दोषी ठहराना एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ सख्ती से उत्तर रहा है।
अब्दुल करीम टुंडा को 2013 में नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था, और इसके बाद से उसे न्यायिक प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इसमें हिन्दुस्तानी जनता पार्टी के सदस्यों द्वारा चलाए गए बम धमाकों का मामला शामिल था, जिसमें बहुत लोगों की मौके पर मौत हो गई थी।
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