श्रीनगर का शंकराचार्य मंदिर – ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए ₹1.21 करोड़ रुपये स्वीकृत
श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में नेशनल कल्चर फंड (NCF) के तहत ₹1.21 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की है। यह राशि मंदिर में visitor amenities यानी आगंतुक सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। इस संबंध में सरकार की ओर […] The post श्रीनगर का शंकराचार्य मंदिर – ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए ₹1.21 करोड़ रुपये स्वीकृत appeared first on VSK Bharat.
श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में नेशनल कल्चर फंड (NCF) के तहत ₹1.21 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की है। यह राशि मंदिर में visitor amenities यानी आगंतुक सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। इस संबंध में सरकार की ओर से संसद में जानकारी दी गई है।
हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस राशि से कौन-कौन से काम होंगे। लेकिन इतना स्पष्ट है कि योजना का उद्देश्य ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण के साथ यहां आने वाले लोगों की सुविधाओं को बेहतर करना है।
शंकराचार्य मंदिर श्रीनगर शहर से करीब 1,000 फीट ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 244 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊपर पहुंचने के बाद श्रीनगर शहर, डल झील और आसपास की पहाड़ियों का दृश्य दिखाई देता है। यही वजह है कि मंदिर की यात्रा केवल पूजा और दर्शन तक सीमित नहीं रहती। यहां पहुंचने से लेकर वापस लौटने तक का पूरा अनुभव श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आगंतुक सुविधाओं का विकास ऐतिहासिक स्थल को देखने आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बना सकता है।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से परियोजना को “Development of Visitor Amenities” के रूप में बताया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया कि राशि का इस्तेमाल किन-किन सुविधाओं पर किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अभी यह दावा करना सही नहीं होगा कि परियोजना के तहत नए शौचालय, पेयजल व्यवस्था, बैठने की जगह, रास्तों या किसी दूसरी विशेष सुविधा का निर्माण निश्चित रूप से होगा। विस्तृत कार्ययोजना सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ₹1.21 करोड़ से जमीन पर क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे। यह पहल फिलहाल दो चीजों को साथ लेकर चलने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है – धरोहर का संरक्षण और पर्यटकों की सुविधा।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है मंदिर
शंकराचार्य मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानि ASI के संरक्षण में आने वाले ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है। ASI देशभर में ऐसे स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और विकास से जुड़े काम करता है। ‘National Culture Fund’, ASI के संरक्षण में आने वाले स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों के संरक्षण, नवीनीकरण और विकास के लिए वित्तीय सहायता देता है। इसलिए शंकराचार्य मंदिर को मिली ₹1.21 करोड़ की राशि का मतलब यह नहीं है कि मंदिर को अब संरक्षण का दर्जा मिला है। मंदिर पहले से ASI के संरक्षण में है और नई राशि उसके विकास से जुड़े कामों के लिए सवीकृत हुई है।
धरोहरों के संरक्षण पर लगातार हो रहा खर्च
शंकराचार्य मंदिर के लिए स्वीकृत यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर किए जा रहे खर्च का हिस्सा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में ASI के श्रीनगर सर्किल को ₹7.17 करोड़ आवंटित किए गए थे और पूरी राशि खर्च हुई। 2024-25 में ₹4.90 करोड़ आवंटित किए गए, जिसमें से ₹4.89 करोड़ खर्च हुए। वहीं, 2025-26 में ₹5.95 करोड़ आवंटित किए गए और पूरी राशि खर्च की गई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में श्रीनगर सर्किल के लिए ₹4.70 करोड़ का प्रावधान है। इसमें से 5 अगस्त 2026 तक ₹2.12 करोड़ खर्च किए जा चुके थे।
स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार संसाधन लगाए जा रहे हैं।
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