परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज दो दिवसीय प्रवास पर पहुँचे चित्रकूट
चित्रकूट। यथार्थ गीता के प्रणेता परमपूज्य सदगुरुदेव परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज का 5 मई को आरोग्यधाम परिसर में शुभागमन हुआ, जहाँ से वह परमपूज्य दादागुरु की पावन भूमि समाधि स्थल श्री परमहंस आश्रम अनुसुइया चित्रकूट जाएंगे एवं वहाँ आयोजित होने वाले दो दिवसीय भंडारे में सम्मिलित होंगे। परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज प्रसिद्ध भारतीय […] The post परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज दो दिवसीय प्रवास पर पहुँचे चित्रकूट appeared first on VSK Bharat.
चित्रकूट।
यथार्थ गीता के प्रणेता परमपूज्य सदगुरुदेव परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज का 5 मई को आरोग्यधाम परिसर में शुभागमन हुआ, जहाँ से वह परमपूज्य दादागुरु की पावन भूमि समाधि स्थल श्री परमहंस आश्रम अनुसुइया चित्रकूट जाएंगे एवं वहाँ आयोजित होने वाले दो दिवसीय भंडारे में सम्मिलित होंगे।
परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज प्रसिद्ध भारतीय संत और आध्यात्मिक गुरु हैं, उन्हें श्रीमद्भागवत गीता की व्याख्या ‘यथार्थ गीता’ के रचयिता के रूप में जाना जाता है। मुख्य उद्देश्य गीता के ज्ञान को जन-सामान्य की भाषा में समझाना है। यह पुस्तक बताती है कि गीता का ज्ञान केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव मात्र के लिए भी है, जो सांसारिक दुखों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के सक्तेशगढ़ आश्रम में निवास करते हैं। स्वामी जी का जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले के ओसियां गाँव में एक भाटी राजपूत परिवार में हुआ था। मात्र 23 वर्ष की आयु में, आपने सत्य की खोज में घर त्याग दिया 1955 में, आप चित्रकूट के अनुसूइया में परमहंस स्वामी परमानंद जी महाराज की शरण में आए।
आपने 15 वर्षों तक अपने गुरुदेव के सान्निध्य में कठिन साधना की और अंतर्ज्ञान प्राप्त किया। आपने ‘यथार्थ गीता’ की रचना की, जो गीता का सरल और व्यावहारिक भाष्य है। स्वामी जी का मुख्य आश्रम मिर्जापुर के सक्तेशगढ़ में स्थित है। आपकी शिक्षा कर्म, योग और आत्म-साक्षात्कार पर केंद्रित है, आप गुरु को हृदय में धारण करने पर जोर देते हैं।
चित्रकूट आगमन पर आरोग्यधाम परिसर में दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने उनका स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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