Deepfake क्या है
Deepfake एक तकनीकी शब्द है जो एक नवीन प्रकार की डिजिटल मनिपुलेशन को व्यक्त करता है, जिसका उपयोग वीडियो या ऑडियो को अन्य व्यक्ति के चेहरे या आवाज के साथ मिश्रित करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार के तकनीकी कार्य में, एक व्यक्ति का चेहरा या आवाज किसी दूसरे व्यक्ति के वीडियो या ऑडियो में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे यह माना जाता है कि वह व्यक्ति वास्तव में बोल रहा है या कुछ कर रहा है जो उसकी वास्तविकता में नहीं है।
डीपफेक्स तकनीक का उपयोग अक्सर मनोरंजन उद्योग में या सामाजिक मीडिया पर वायरल वीडियो या फोटो बनाने के लिए किया जाता है, जिससे इसे एक नया जाल समस्या के रूप में देखा जाता है। यह तकनीकी कौशल की तेजी से बढ़ती दिशा का प्रतीक है, जो डिजिटल विश्व को अधिक विवादास्पद बना सकता है और गहरे दायरे की फर्जी जानकारियों का समर्थन कर सकता है।
इसलिए, डीपफेक्स के आगमन से नए तकनीकी और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि फेक न्यूज़, व्यक्तिगत या सार्वजनिक अवमानना, और व्यक्तिगत या गैर-संवेदनशील जानकारी के लिए डिजिटल साक्षात्कार का उपयोग। इस तरह की तकनीकी उपाय को समझना और इसके प्रभावों को सामाजिक, नैतिक, और कानूनी दृष्टिकोण से देखना महत्वपूर्ण है।
कैसे काम करता है
डीपफेक्स तकनीक का काम करने का तरीका तकनीकी रूप से बहुत उच्च स्तर पर होता है। यहाँ एक सामान्य विवरण है कि डीपफेक्स कैसे काम करता है:
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डेटा संग्रहण:
- पहला कदम है डेटा संग्रहण, जिसमें लाखों फोटोग्राफ़ियों या वीडियो के सैंपल्स को संग्रहित किया जाता है। इन सैंपल्स में व्यक्ति के चेहरे के विभिन्न आँकड़े और विभिन्न एंगल्स सहित अन्य विशेषताएँ शामिल होती हैं।
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शिक्षान (डीप लर्निंग):
- फिर एक डीप लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है जो ये सैंपल्स अधिकतम समझने के लिए शिक्षित होता है। यह शिक्षान क्रिया विशेषताओं को चिन्हित करती है जैसे कि चेहरे के विभिन्न भागों के रूप या व्यक्तिगत शैलियाँ।
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जनरेटिंग:
- अब, यह शिक्षान प्रक्रिया उन डेटा सेट्स को आधार मानक बनाती है जो नए वीडियो या फोटो तैयार करने के लिए उपयुक्त होते हैं। इसमें चेहरे को व्यक्ति के आदर्श रूप में जमा करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है।
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मर्जिंग:
- अंततः, यह फेक वीडियो या फोटो का उत्पादन किया जाता है, जिसमें चेहरे या आवाज असली वीडियो या फोटो के साथ मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में, अलग-अलग विशेषताएं जैसे कि आँखों की गति, मुख में हलचल, बोलने का ढंग आदि को ध्यान में रखा जाता है ताकि अंततः उत्पन्न वीडियो या फोटो में यह नजर आए कि यह असली है।
आज के समय यह सभी प्रक्रियाएं बहुत गहराई और संघर्षशील होती हैं ताकि फिर से असलीता के साथ मेल खाएं। इसलिए, डीपफेक्स तकनीक को बड़े ध्यान और उन्हीं नियंत्रणों के साथ उपयोग करना आवश्यक है ताकि इसका गलत उपयोग न किया जाए।
AI कैसे काम करता है
AI या Artificial Intelligence वह शाखा है जो कंप्यूटर सिस्टम को मानव बुद्धि के कुछ कार्यों को समझने, सीखने, और करने की क्षमता देती है। AI कैसे काम करता है, इसे समझने के लिए हमें एक कंप्यूटर प्रोग्राम के विभिन्न तत्वों को समझना चाहिए:
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डेटा संग्रहण:
- AI के लिए सबसे पहला कदम होता है डेटा का संग्रहण। यह डेटा किसी भी रूप में हो सकता है, जैसे कि टेक्स्ट, छवियाँ, ऑडियो, वीडियो, संवाद, सेंसर डेटा आदि।
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डेटा प्रसंस्करण:
- इसके बाद, डेटा को स्ट्रक्चर्ड रूप में प्रसंस्कृत किया जाता है ताकि उससे पैटर्न और जानकारी प्राप्त की जा सके। यह प्रक्रिया डेटा क्लीनिंग, फॉर्मेटिंग, और फीचर इंजीनियरिंग के माध्यम से किया जाता है।
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मॉडल ट्रेनिंग:
- फिर, एक AI मॉडल को ट्रेन किया जाता है जो डेटा सेट से पैटर्न और नियमों को सीखता है। यह शामिल होता है अल्गोरिदमों, नेटवर्क्स, या अन्य AI टेक्निक्स का उपयोग करके।
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टेस्टिंग और डिप्लॉयमेंट:
- मॉडल को ट्रेन करने के बाद, उसे टेस्ट किया जाता है कि क्या वह वास्तविक डेटा पर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। फिर उसे वास्तविक जीवन में लागू किया जाता है ताकि वह अपने कार्यों को सम्भाल सके।
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सुधार और अपग्रेड:
- AI मॉडल को समय-समय पर सुधारा और अपग्रेड किया जाता है ताकि वह नवीनतम डेटा और प्रौद्योगिकियों के साथ समर्थ हो सके।
AI का काम करने का मूल तत्व है इसके अल्गोरिदम्स जो डेटा से सीखते हैं और फिर वह ज्ञान को आधार बनाकर नई स्थितियों का समाधान करते हैं। यहां अधिक संगठित तरीके से कार्य करने के लिए मॉडल को ट्रेन किया जाता है ताकि वह अधिक सही नतीजे दे सके