पीएम आवास योजना के तहत छह लाख घरों के निर्माण को सरकार ने दी मंजूरी
लगभग सभी राज्यों ने किए एमओयू पर हस्ताक्षर, मार्च तक कर लिया जाएगा लाभार्थियों का चयन
शहरों में निर्धन और मध्यम वर्ग को आवास उपलब्ध कराने के लिए पीएम आवास योजना के तहत केंद्र सरकार ने पहले चरण में छह लाख से अधिक घरों के निर्माण को लेकर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। पीएम आवास योजना के दूसरे चरण में शहरों में पांच साल में एक करोड़ घर बनने हैं।
योजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार के साथ लगभग सभी राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि लगभग सभी राज्यों से घरों के प्रस्ताव मिले हैं। राज्यों में लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया अगले साल के शुरुआत में आरंभ हो जाएगी। डिमांड सर्वे और उनका प्रमाणन अगले मार्च तक पूरा कर लिए जाने की योजना है। इसके साथ ही राज्यों को मार्च तक ही अपने यहां अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी तैयार कर लेनी है जोकि पीएम आवास योजना के लिए किए गए एमओयू की एक अनिवार्य शर्त है।
छह लाख घरों के निर्माण के साथ ही केंद्र सरकार किरायेदारी के माडल वाली अफोर्डेबेल रेंटल हाउसिंग पर भी इस बार काफी जोर दे रही है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर व कम आय वर्ग के उन लोगों को किराये पर घर मुहैया कराए जाएंगे जो घर नहीं खरीदना चाहते हैं। इसमें कामकाजी महिलाओं पर खास ध्यान दिया गया है। अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के दो माडल हैं। पहला पीपीपी आधार पर मौजूदा सरकारी रिक्त सरकारी भवनों को किराएदारी के लिए तैयार करना और दूसरा निजी और सरकारी उपक्रमों को इसके लिए प्रोत्साहन देना कि वे किराए वाले घरों का निर्माण करें और उनका संचालन तथा रखरखाव करें। इसके लिए सरकार सहायता उपलब्ध कराएगी। यह माडल खास तौर पर औद्योगिक श्रमिकों और कामकाजी महिलाओं के लिए है।