पाकिस्तान में तख्तापलट की तैयारी? नवाज वाली स्क्रिप्ट शहबाज के लिए लिख रहे मुनीर!

पाकिस्तान इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है. आतंकवाद और BLA के हमलों ने सरकार और सेना को आमने-सामने ला दिया है. सेना प्रमुख असीम मुनीर, शहबाज सरकार को कमजोर बताते हुए तख्तापलट की जमीन तैयार कर रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे 1999 में परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के खिलाफ किया था.

Mar 22, 2025 - 21:27
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पाकिस्तान में तख्तापलट की तैयारी? नवाज वाली स्क्रिप्ट शहबाज के लिए लिख रहे मुनीर!
पाकिस्तान में तख्तापलट की तैयारी? नवाज वाली स्क्रिप्ट शहबाज के लिए लिख रहे मुनीर!

पाकिस्तान इस समय भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. आतंकवाद, बम धमाके, अज्ञात बंदूकधारियों के हमले और बढ़ती गरीबी ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के बढ़ते हमलों ने सरकार और सेना दोनों की नींद उड़ा दी है.

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के सामने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती बनी हुई है, लेकिन अब यह मामला केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं रह गया है. पाकिस्तान में तख्तापलट की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. क्योंकि जिस तरह से मुनीर शहबाज सरकार को कमजोर बता रहे हैं, वह इशारा कर रहा है कि कहीं पाकिस्तान में फिर से नवाज शरीफ वाली कहानी तो नहीं दोहराई जा सकती है.

सेना और सरकार आमने-सामने

पाकिस्तान में जिस आग में जनता झुलस रही है, वह सेना और सरकार के बीच संघर्ष की ओर भी इशारा कर रही है. सेना प्रमुख असीम मुनीर, शहबाज सरकार को कमजोर बताते हुए लगातार निशाना साध रहे हैं. हाल ही में एक सुरक्षा बैठक में उन्होंने देश की सुरक्षा स्थिति बिगड़ने का ठीकरा सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि पाकिस्तान को बेहतर शासन की जरूरत है. उन्होंने सवाल उठाया कि कब तक पाकिस्तान कमजोर प्रशासन के चलते अपने नागरिकों की जान गंवाता रहेगा.

बयान से दे दिया बड़ा इशारा

मुनीर के इस बयान ने साफ कर दिया कि वे शहबाज शरीफ को कमजोर प्रधानमंत्री साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे 1999 में परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के खिलाफ माहौल बनाया था. BLA के बढ़ते हमलों के बहाने सेना ने सरकार को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान में यह पहली बार नहीं हो रहा है जब सेना लोकतांत्रिक सरकार को कमजोर बताकर सत्ता पर कब्जा करने की योजना बना रही हो.

तख्तापलट करने की चाल?

सेना प्रमुख मुनीर का हालिया बयान पाकिस्तान में आने वाले राजनीतिक संकट की ओर इशारा करता है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को एक ‘मजबूत राज्य’ बनाना जरूरी है और इसके लिए एक सख्त प्रशासन की जरूरत है. यह बयान दर्शाता है कि मुनीर सरकार की असफलताओं को उभारकर सेना के दखल को उचित ठहराने की कोशिश कर रहे हैं.

ऐसा ही कुछ 1999 में हुआ था, जब परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. तब मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध की हार के लिए नवाज शरीफ को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि हकीकत यह थी कि कारगिल युद्ध की पूरी योजना खुद मुशर्रफ की थी. आज वही कहानी दोबारा लिखी जा रही है, बस किरदार बदल गए हैं. नवाज की जगह शहबाज हैं और मुशर्रफ की जगह असीम मुनीर.

फिर होगा लोकतंत्र का कत्ल?

पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन वहां सेना की ताकत हमेशा हावी रही है. सेना वहां की राजनीति को नियंत्रित करने का काम करती रही है. अब जब पाकिस्तान आंतरिक सुरक्षा संकट से गुजर रहा है, तो सेना फिर से अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश में है. अगर सेना ने सत्ता हथियाने का फैसला कर लिया, तो पाकिस्तान में लोकतंत्र को गहरी चोट पहुंचेगी.

इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान में अब तक कई बार सेना ने तख्तापलट किया है. अयूब खान, जियाउल हक और परवेज मुशर्रफ ने लोकतांत्रिक सरकारों को अपदस्थ करके सत्ता संभाली थी. अब असीम मुनीर का सरकार पर हमला करना भी उसी दिशा में उठाया गया कदम नजर आता है.

अमेरिका-चीन की भूमिका भी अहम

अगर पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट होता है, तो इसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी पड़ेगा. अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे, यह भी अहम सवाल है. अमेरिका पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार का समर्थक रहा है, लेकिन उसका झुकाव हमेशा सेना की ओर भी रहा है. वहीं, चीन भी पाकिस्तान में स्थिरता चाहता है क्योंकि वहां उसके कई बड़े निवेश हैं.

अगर असीम मुनीर ने तख्तापलट की दिशा में कदम बढ़ाए, तो अमेरिका और चीन की प्रतिक्रिया इस पर गहरा असर डालेगी. अमेरिका पहले भी पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के नाम पर हस्तक्षेप कर चुका है. चीन भी नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़े, क्योंकि इससे उसकी आर्थिक परियोजनाओं को खतरा हो सकता है.

फंसे शरीफ के लिए आगे क्या?

अगर पाकिस्तान में तख्तापलट होता है, तो शहबाज शरीफ का भविष्य क्या होगा? क्या उन्हें भी अपने भाई नवाज शरीफ की तरह निर्वासन में जाना पड़ेगा? यह सवाल अब चर्चा में है. पाकिस्तान के हालात जिस तेजी से बिगड़ रहे हैं, उसे देखकर यह कहना मुश्किल नहीं कि आने वाले दिनों में शहबाज सरकार पर संकट और गहरा सकता है.

पाकिस्तान में हर बार जब कोई प्रधानमंत्री सेना के खिलाफ जाता है या कमजोर पड़ता है, तो उसकी कुर्सी छीन ली जाती है. यह सिलसिला 75 सालों से चलता आ रहा है. अब देखना होगा कि शहबाज इस लड़ाई में टिक पाते हैं या फिर पाकिस्तान में एक और सैन्य तख्तापलट देखने को मिलेगा.

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@Dheeraj kashyap युवा पत्रकार- विचार और कार्य से आने वाले समय में अपनी मेहनत के प्रति लगन से समाज को बेहतर बना सकते हैं। जरूरत है कि वे अपनी ऊर्जा, साहस और ईमानदारी से र्काय के प्रति सही दिशा में उपयोग करें , Bachelor of Journalism And Mass Communication - Tilak School of Journalism and Mass Communication CCSU meerut / Master of Journalism and Mass Communication - Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University पत्रकारिता- प्रेरणा मीडिया संस्थान नोएडा 2018 से केशव संवाद पत्रिका, प्रेरणा मीडिया, प्रेरणा विचार पत्रिका,